Home
Class
SCIENCE
संश्लेषित रेशे एवं प्लास्टिक - L4 | प्ला...

संश्लेषित रेशे एवं प्लास्टिक - L4 | प्लास्टिक का परिचय |Class 8 विज्ञान | 7 PM Class by Amba Mam

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

दोहरान |प्लास्टिक का पर्यावरण पर प्रभाव |4 R सिद्धांत |प्राकृतिक एवं संश्लेषित रेशों में अंतर |रेशों को जलाकर उसकी पहचान करना |सारांश

The average weight of a certain number of students in a class is 68.5 kg. If 4 new students having weights 72.2 kg, 70.8kg, 70.3kg and 66.7 kg join the class, then the average weight of all the students increases by 300 g. The number of students in the class, initially is: किसी कक्षा में छात्रों की एक निश्चित संख्या का औसत वज़न 68.5 किलो ग्राम है | यदि 4 नए छात्र कक्षा में आ जाते हैं, जिनका वज़न क्रमशः 72.2 किलो ग्राम, 70.8 किलो ग्राम, 70.3 किलो ग्राम तथा 66.7 किलो ग्राम है, तो सभी छात्रों का औसत वज़न 300 ग्राम से बढ़ जाता है | आरंभ में कक्षामें छात्रों की संख्या कितनी थी ?

बौद्ध शिक्षण पद्धति का आरम्भ स्वयं बुद्ध ने सरल तथा जनमानस की भाषा में जीवन के तत्त्वों के उपदेश तथा जगह-जगह चर्चा करके किया। लोगों को शिक्षित करने के लिए महात्मा बुद्ध ने व्याख्यान, प्रश्नोत्तर प्रासंगिक उपमा, दृष्टान्त एवं कथा को माध्यम बनाया बुद्ध के बाद से बौद्ध शिक्षा पद्धति भी एक निश्चित स्वरूप, संगठन के साथ हिन्दू शिक्षा पद्धति से अलग स्वतन्त्र शिक्षा पद्धति के रूप में विकसित हुई। प्रारम्भ में हिन्दू तथा बौद्ध शिक्षा पद्धति के मूल में कोई विशेष अन्तर नहीं था, किन्तु बाद में आकर दोनों शिक्षा प्रणालियों के आदर्श एवं पद्धति में विशेष रूप से उस पाठ्यक्रम में जो विशेष रूप से आम उपासक की बजाय बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियों के लिए था, बहुत कम समानता रह गई थी। बौद्ध धर्म में शिक्षा प्रारम्भ संस्कार ब्राह्मणों के उपनयन संस्कार की भाँति होता था। बौद्ध संघ में सम्मिलित होने के लिए दो संस्कार आवश्यक थे प्रथम था 'पब्बज्जा' तथा दूसरा उपसम्पदा पब्बज्जा से उपासकत्व का प्रारम्भ होता था। उपनयन की भाँति इसे भी आध्यात्मिक जन्म कहा गया है। यह 8 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति को दी जा सकती थी। संरक्षक की अनुज्ञा इसके लिए आवश्यक थी। व्यक्ति को तीन प्रकार की शरण की शपथ एवं दस धर्मादेश दिए जाते थे। ये शरण बुद्ध धर्म एवं संघ की होती थी। दस धर्मादेशों में निम्न की मनाही थी 1 1। पारिवारिक जीवन 2। ऐसी वस्तु ग्रहण करना जो दी न हो 3। अशुद्ध आचरण 4। झूठ बोलना 5। मादक द्रव्यों का सेवन 6। असमय भोजन 7। नृत्य-गायन 8। पुष्प माला, इत्र, गहने आदि का प्रयोग 9। उच्च आसन का प्रयोग 10। सोना एवं चाँदी की प्राप्ति ब्राह्मणों में शिक्षा का प्रारम्भ किस संस्कार से होता था?

बौद्ध शिक्षण पद्धति का आरम्भ स्वयं बुद्ध ने सरल तथा जनमानस की भाषा में जीवन के तत्त्वों के उपदेश तथा जगह-जगह चर्चा करके किया। लोगों को शिक्षित करने के लिए महात्मा बुद्ध ने व्याख्यान, प्रश्नोत्तर प्रासंगिक उपमा, दृष्टान्त एवं कथा को माध्यम बनाया बुद्ध के बाद से बौद्ध शिक्षा पद्धति भी एक निश्चित स्वरूप, संगठन के साथ हिन्दू शिक्षा पद्धति से अलग स्वतन्त्र शिक्षा पद्धति के रूप में विकसित हुई। प्रारम्भ में हिन्दू तथा बौद्ध शिक्षा पद्धति के मूल में कोई विशेष अन्तर नहीं था, किन्तु बाद में आकर दोनों शिक्षा प्रणालियों के आदर्श एवं पद्धति में विशेष रूप से उस पाठ्यक्रम में जो विशेष रूप से आम उपासक की बजाय बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियों के लिए था, बहुत कम समानता रह गई थी। बौद्ध धर्म में शिक्षा प्रारम्भ संस्कार ब्राह्मणों के उपनयन संस्कार की भाँति होता था। बौद्ध संघ में सम्मिलित होने के लिए दो संस्कार आवश्यक थे प्रथम था 'पब्बज्जा' तथा दूसरा उपसम्पदा पब्बज्जा से उपासकत्व का प्रारम्भ होता था। उपनयन की भाँति इसे भी आध्यात्मिक जन्म कहा गया है। यह 8 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति को दी जा सकती थी। संरक्षक की अनुज्ञा इसके लिए आवश्यक थी। व्यक्ति को तीन प्रकार की शरण की शपथ एवं दस धर्मादेश दिए जाते थे। ये शरण बुद्ध धर्म एवं संघ की होती थी। दस धर्मादेशों में निम्न की मनाही थी 1 1। पारिवारिक जीवन 2। ऐसी वस्तु ग्रहण करना जो दी न हो 3। अशुद्ध आचरण 4। झूठ बोलना 5। मादक द्रव्यों का सेवन 6। असमय भोजन 7। नृत्य-गायन 8। पुष्प माला, इत्र, गहने आदि का प्रयोग 9। उच्च आसन का प्रयोग 10। सोना एवं चाँदी की प्राप्ति प्रस्तुत गद्यांश का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक निम्नलिखित में से क्या हो सकता है?

बौद्ध शिक्षण पद्धति का आरम्भ स्वयं बुद्ध ने सरल तथा जनमानस की भाषा में जीवन के तत्त्वों के उपदेश तथा जगह-जगह चर्चा करके किया। लोगों को शिक्षित करने के लिए महात्मा बुद्ध ने व्याख्यान, प्रश्नोत्तर प्रासंगिक उपमा, दृष्टान्त एवं कथा को माध्यम बनाया बुद्ध के बाद से बौद्ध शिक्षा पद्धति भी एक निश्चित स्वरूप, संगठन के साथ हिन्दू शिक्षा पद्धति से अलग स्वतन्त्र शिक्षा पद्धति के रूप में विकसित हुई। प्रारम्भ में हिन्दू तथा बौद्ध शिक्षा पद्धति के मूल में कोई विशेष अन्तर नहीं था, किन्तु बाद में आकर दोनों शिक्षा प्रणालियों के आदर्श एवं पद्धति में विशेष रूप से उस पाठ्यक्रम में जो विशेष रूप से आम उपासक की बजाय बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियों के लिए था, बहुत कम समानता रह गई थी। बौद्ध धर्म में शिक्षा प्रारम्भ संस्कार ब्राह्मणों के उपनयन संस्कार की भाँति होता था। बौद्ध संघ में सम्मिलित होने के लिए दो संस्कार आवश्यक थे प्रथम था 'पब्बज्जा' तथा दूसरा उपसम्पदा पब्बज्जा से उपासकत्व का प्रारम्भ होता था। उपनयन की भाँति इसे भी आध्यात्मिक जन्म कहा गया है। यह 8 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति को दी जा सकती थी। संरक्षक की अनुज्ञा इसके लिए आवश्यक थी। व्यक्ति को तीन प्रकार की शरण की शपथ एवं दस धर्मादेश दिए जाते थे। ये शरण बुद्ध धर्म एवं संघ की होती थी। दस धर्मादेशों में निम्न की मनाही थी 1 1। पारिवारिक जीवन 2। ऐसी वस्तु ग्रहण करना जो दी न हो 3। अशुद्ध आचरण 4। झूठ बोलना 5। मादक द्रव्यों का सेवन 6। असमय भोजन 7। नृत्य-गायन 8। पुष्प माला, इत्र, गहने आदि का प्रयोग 9। उच्च आसन का प्रयोग 10। सोना एवं चाँदी की प्राप्ति धर्मादेश' शब्द है

बौद्ध शिक्षण पद्धति का आरम्भ स्वयं बुद्ध ने सरल तथा जनमानस की भाषा में जीवन के तत्त्वों के उपदेश तथा जगह-जगह चर्चा करके किया। लोगों को शिक्षित करने के लिए महात्मा बुद्ध ने व्याख्यान, प्रश्नोत्तर प्रासंगिक उपमा, दृष्टान्त एवं कथा को माध्यम बनाया बुद्ध के बाद से बौद्ध शिक्षा पद्धति भी एक निश्चित स्वरूप, संगठन के साथ हिन्दू शिक्षा पद्धति से अलग स्वतन्त्र शिक्षा पद्धति के रूप में विकसित हुई। प्रारम्भ में हिन्दू तथा बौद्ध शिक्षा पद्धति के मूल में कोई विशेष अन्तर नहीं था, किन्तु बाद में आकर दोनों शिक्षा प्रणालियों के आदर्श एवं पद्धति में विशेष रूप से उस पाठ्यक्रम में जो विशेष रूप से आम उपासक की बजाय बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियों के लिए था, बहुत कम समानता रह गई थी। बौद्ध धर्म में शिक्षा प्रारम्भ संस्कार ब्राह्मणों के उपनयन संस्कार की भाँति होता था। बौद्ध संघ में सम्मिलित होने के लिए दो संस्कार आवश्यक थे प्रथम था 'पब्बज्जा' तथा दूसरा उपसम्पदा पब्बज्जा से उपासकत्व का प्रारम्भ होता था। उपनयन की भाँति इसे भी आध्यात्मिक जन्म कहा गया है। यह 8 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति को दी जा सकती थी। संरक्षक की अनुज्ञा इसके लिए आवश्यक थी। व्यक्ति को तीन प्रकार की शरण की शपथ एवं दस धर्मादेश दिए जाते थे। ये शरण बुद्ध धर्म एवं संघ की होती थी। दस धर्मादेशों में निम्न की मनाही थी 1 1। पारिवारिक जीवन 2। ऐसी वस्तु ग्रहण करना जो दी न हो 3। अशुद्ध आचरण 4। झूठ बोलना 5। मादक द्रव्यों का सेवन 6। असमय भोजन 7। नृत्य-गायन 8। पुष्प माला, इत्र, गहने आदि का प्रयोग 9। उच्च आसन का प्रयोग 10। सोना एवं चाँदी की प्राप्ति बौद्ध शिक्षा पद्धति में शिक्षा देने हेतु निम्नलिखित में से किसे माध्यम बनाया जाता था?

The average weight of some students in a class was 58.4kg. When 5 students having the average weight 62.8 kg joined the class, the average weight of all the students in the class increased by 0.55 kg. The number of students initially in the class were: एक कक्षा में कुछ छात्रों का औसत वज़न 58.4 किलो ग्राम था | जब 62.8 किलो ग्राम औसत वज़न वाले 5 छात्र इस कक्षा में आते हैं, तो कक्षा के सभी छात्रों का औसत वज़न 0.55 किलो ग्राम बढ़ जाता है | आरंभ में कक्षा में छात्रों की संख्या कितनी थी ?

The number of students in class XI in science, arts and commerce stream of a school over a period of 4 years (2011-2014) has been depicted through the bar chart given below: 4 साल (2011-2014) की अवधि में स्कूल के विज्ञान, कला और वाणिज्य स्ट्रीम में ग्यारहवीं कक्षा में छात्रों की संख्या को नीचे दिए गए दंड आरेख के माध्यम से दर्शाया गया है| What is the average of the number of arts students in the given class over the given period of 4 years? 4 वर्ष की दी गई अवधि में दी गई कक्षा में आर्टस के छात्रों की संख्या का औसत कया है

The ratio of the number of boys in sections A and B of a class is 2 : 3 and the ratio between the total number of boys and girls in sections A and B is 3 : 4. If the number of girls in B is 50% of the number of boys in B, then what will be the ratio between the number of girls in A and B ? एक कक्षा के अनुभाग A और B में लड़कों की संख्या का अनुपात 2:3 है तथा अनुभाग A और B में लड़कों और लड़कियों की कुल संख्या का अनुपात 3:4 है | यदि 8 में लड़कियों की संख्या, B में लड़कों की संख्या की 50% है, तो A और B में लड़कियों की संख्या का अनुपात कितना होगा ?

Class 10 Maths (Hindi) | Chapter 8 | त्रिकोणमिति का परिचय | Important Questions and Quick Revision

Recommended Questions
  1. संश्लेषित रेशे एवं प्लास्टिक - L4 | प्लास्टिक का परिचय |Class 8 विज्ञा...

    Text Solution

    |

  2. d-ब्लॉक तत्व किन तत्वों को कहते हैं? ये आवर्त सारणी में किस वर्ग में स...

    Text Solution

    |

  3. आवर्त सारणी के वर्ग 15 के तत्वों की हाइड्रोजन के प्रति क्रियाशीलता को ...

    Text Solution

    |

  4. संयोजी कड़ी किसे कहते है? ऐनिलिडा-आर्थोपोडा संघ तथा सरीसृप-पक्षी वर्ग क...

    Text Solution

    |

  5. सरीसृप तथा पक्षी वर्ग को जोड़ने वाली कड़ी का नाम लिखिए!

    Text Solution

    |

  6. रेलवे के आधे टिकट का मूल्य पूरे किराये का आधा तथा आरक्षण व्यय पूरे टिक...

    Text Solution

    |

  7. क आयत का क्षेत्रफल समान रहता है यदि इसकी लम्बाई में 7 मीटर की वृद्धि औ...

    Text Solution

    |

  8. एक कक्षा के छात्रों को पंक्ति में खड़ा किया जाता है। यदि प्रत्येक पंक्...

    Text Solution

    |

  9. 40 बच्चों की एक कक्षा में लड़कियों और लड़कों का अनुपात 2 : 3 हैं। 5 नव...

    Text Solution

    |