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यादृच्छिक परीक्षण|परिणाम और प्रतिदर्श सम...

यादृच्छिक परीक्षण|परिणाम और प्रतिदर्श समष्टि|घटना तथा घटनाओं के प्रकार|असंभव व निश्चित घटनाएँ|सरल घटना|मिश्र घटना|घटनाओं का बीजगणित|पूरक घटना|घटना A या B|घटना A किन्तु B नहीं|परस्पर अपवर्जी घटनाएँ|नि:शेष घटनाएँ|प्रायिकता की अभिगृहीतीय दृष्टिकोण|घटना की प्रायिकता|घटना A या B की प्रायिकता|सप्रतिबंध प्रायिकता|सप्रतिबंध प्रायिकता के गुण|उदाहरण|सारांश

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सप्रतिबंध प्रायिकता|गुणन प्रमेय|स्वतंत्र घटना|बेज़् प्रमेय|प्रायिकता बंटन|द्विपद प्रायिकता तथा उदाहरण

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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मनु बहन ने पूरे दिन की डायरी लिखी, लेकिन एक जगह लिख दिया, 'सफाई वगैरह की। गांधीजी प्रतिदिन डायरी पढ़कर उस पर अपने हस्ताक्षर करते थे। आज की डायरी पर हस्ताक्षर करते हुए गांधीजी ने लिखा,कातने की गति का हिसाब लिखा जाए। मन में आए हुए विचार लिखे जाएं। जो-जो पढ़ा हो, उसकीटिप्पणी लिखी जाए। जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो'वगैरह' का उपयोग नहीं होना चाहिए। डायरी में 'वगैरह' शब्द के लिए कोई स्थान नहीं है" जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो बातें हुई हों वे लिखी जाए। मनु ने अपनी गलती का अहसास किया और डायरी विधा की पवित्रता को समझा। गांधीजी ने पुनः मनु से कहा-"डायरी लिखना आसान कार्य नहीं है। यह इबादत करने जैसी विधा है। हमें शुद्ध व सच्चे रूप से प्रत्येक छोटी-बड़ी घटना को निष्पक्ष रूप से लिखना चाहिए चाहे कोई बात हमारे विरुद्ध ही क्यों न जा रही हो। इससे हममेंसच्चाई स्वीकार करने की शक्ति प्राप्त होगी। गांधीजी प्रतिदिन डायरी पढ़कर क्या करते थे?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मनु बहन ने पूरे दिन की डायरी लिखी, लेकिन एक जगह लिख दिया, 'सफाई वगैरह की। गांधीजी प्रतिदिन डायरी पढ़कर उस पर अपने हस्ताक्षर करते थे। आज की डायरी पर हस्ताक्षर करते हुए गांधीजी ने लिखा,कातने की गति का हिसाब लिखा जाए। मन में आए हुए विचार लिखे जाएं। जो-जो पढ़ा हो, उसकीटिप्पणी लिखी जाए। जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो'वगैरह' का उपयोग नहीं होना चाहिए। डायरी में 'वगैरह' शब्द के लिए कोई स्थान नहीं है" जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो बातें हुई हों वे लिखी जाए। मनु ने अपनी गलती का अहसास किया और डायरी विधा की पवित्रता को समझा। गांधीजी ने पुनः मनु से कहा-"डायरी लिखना आसान कार्य नहीं है। यह इबादत करने जैसी विधा है। हमें शुद्ध व सच्चे रूप से प्रत्येक छोटी-बड़ी घटना को निष्पक्ष रूप से लिखना चाहिए चाहे कोई बात हमारे विरुद्ध ही क्यों न जा रही हो। इससे हममेंसच्चाई स्वीकार करने की शक्ति प्राप्त होगी। मनु को अपनी किस गलती का अहसास हुआ?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मनु बहन ने पूरे दिन की डायरी लिखी, लेकिन एक जगह लिख दिया, 'सफाई वगैरह की। गांधीजी प्रतिदिन डायरी पढ़कर उस पर अपने हस्ताक्षर करते थे। आज की डायरी पर हस्ताक्षर करते हुए गांधीजी ने लिखा,कातने की गति का हिसाब लिखा जाए। मन में आए हुए विचार लिखे जाएं। जो-जो पढ़ा हो, उसकीटिप्पणी लिखी जाए। जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो'वगैरह' का उपयोग नहीं होना चाहिए। डायरी में 'वगैरह' शब्द के लिए कोई स्थान नहीं है" जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो बातें हुई हों वे लिखी जाए। मनु ने अपनी गलती का अहसास किया और डायरी विधा की पवित्रता को समझा। गांधीजी ने पुनः मनु से कहा-"डायरी लिखना आसान कार्य नहीं है। यह इबादत करने जैसी विधा है। हमें शुद्ध व सच्चे रूप से प्रत्येक छोटी-बड़ी घटना को निष्पक्ष रूप से लिखना चाहिए चाहे कोई बात हमारे विरुद्ध ही क्यों न जा रही हो। इससे हममेंसच्चाई स्वीकार करने की शक्ति प्राप्त होगी। डायरी लिखना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मनु बहन ने पूरे दिन की डायरी लिखी, लेकिन एक जगह लिख दिया, 'सफाई वगैरह की। गांधीजी प्रतिदिन डायरी पढ़कर उस पर अपने हस्ताक्षर करते थे। आज की डायरी पर हस्ताक्षर करते हुए गांधीजी ने लिखा,कातने की गति का हिसाब लिखा जाए। मन में आए हुए विचार लिखे जाएं। जो-जो पढ़ा हो, उसकीटिप्पणी लिखी जाए। जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो'वगैरह' का उपयोग नहीं होना चाहिए। डायरी में 'वगैरह' शब्द के लिए कोई स्थान नहीं है" जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो बातें हुई हों वे लिखी जाए। मनु ने अपनी गलती का अहसास किया और डायरी विधा की पवित्रता को समझा। गांधीजी ने पुनः मनु से कहा-"डायरी लिखना आसान कार्य नहीं है। यह इबादत करने जैसी विधा है। हमें शुद्ध व सच्चे रूप से प्रत्येक छोटी-बड़ी घटना को निष्पक्ष रूप से लिखना चाहिए चाहे कोई बात हमारे विरुद्ध ही क्यों न जा रही हो। इससे हममेंसच्चाई स्वीकार करने की शक्ति प्राप्त होगी। दोनों कार्य हमारे कर्तव्यों में शामिल हैं

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। लोक कथाएँ आम जीवन में सदियों से रची-बसी हैं। इन में हम भूमिका निभाते हैं। अगर हम अपनी पढ़ी हुई लोक कथाओं को याद करें तो सहजता से हमें इनके कई उदाहरण मिल जाते हैं। जब हम कहानी सुना रहे होते हैं तो बच्चों से हमारी यह अपेक्षा रहती है कि वे पहली घटी घटनाओं को जरूर दोहराएँ। बच्चे भी घटना को याद रखते हुए साथ-साथ मजे से दोहराते हैं। इस तरह कथा सुनाने की इस प्रक्रिया में बच्चे इन घटनाओं को एक क्रम में रख कर देखते हैं। इन क्रमिक घटनाओं में एक तर्क होता है जो बच्चों के मनोभावों से मिलता-जुलता है। 'परिवेश की महक' पद का अर्थ है

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मनु बहन ने पूरे दिन की डायरी लिखी, लेकिन एक जगह लिख दिया, 'सफाई वगैरह की। गांधीजी प्रतिदिन डायरी पढ़कर उस पर अपने हस्ताक्षर करते थे। आज की डायरी पर हस्ताक्षर करते हुए गांधीजी ने लिखा,कातने की गति का हिसाब लिखा जाए। मन में आए हुए विचार लिखे जाएं। जो-जो पढ़ा हो, उसकीटिप्पणी लिखी जाए। जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो'वगैरह' का उपयोग नहीं होना चाहिए। डायरी में 'वगैरह' शब्द के लिए कोई स्थान नहीं है" जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो बातें हुई हों वे लिखी जाए। मनु ने अपनी गलती का अहसास किया और डायरी विधा की पवित्रता को समझा। गांधीजी ने पुनः मनु से कहा-"डायरी लिखना आसान कार्य नहीं है। यह इबादत करने जैसी विधा है। हमें शुद्ध व सच्चे रूप से प्रत्येक छोटी-बड़ी घटना को निष्पक्ष रूप से लिखना चाहिए चाहे कोई बात हमारे विरुद्ध ही क्यों न जा रही हो। इससे हममेंसच्चाई स्वीकार करने की शक्ति प्राप्त होगी। गांधीजी ने 'वगैरह' शब्द पर अपनी आपत्ति क्यों जताई?