तना

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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 12 एक दिन तने ने भी कहा था, जड़? जड़ तो जड़ ही है, जीवन से सदा डरी रही है और यही है उसका सारा इतिहास कि जमीन में मुँह गड़ाए पड़ी रही हैं लेकिन मैं जमीन से ऊपर उठा बाहर निकला, बढ़ा हूँ. मजबूत बना हूँ, इसी से तो तना हूँ एक दिन डालों ने भी कहा था, तना? किस बात पर है तना? जहाँ बिठाल दिया था वहीं पर है बना प्रगतिशील जगती में तिल भर नहीं डोला है खाया है, मोटाया है, सहलाया चोला है लेकिन हम तने से फूटी, दिशा-दिशा में गई ऊपर उठीं, नीचे आई, हर हवा के लिए दोल बनी, लहराईं इसी से तो डाल कहलाई। 'तना किस बात पर है तना?' पंक्ति में अलंकार है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 12 एक दिन तने ने भी कहा था, जड़? जड़ तो जड़ ही है, जीवन से सदा डरी रही है और यही है उसका सारा इतिहास कि जमीन में मुँह गड़ाए पड़ी रही हैं लेकिन मैं जमीन से ऊपर उठा बाहर निकला, बढ़ा हूँ. मजबूत बना हूँ, इसी से तो तना हूँ एक दिन डालों ने भी कहा था, तना? किस बात पर है तना? जहाँ बिठाल दिया था वहीं पर है बना प्रगतिशील जगती में तिल भर नहीं डोला है खाया है, मोटाया है, सहलाया चोला है लेकिन हम तने से फूटी, दिशा-दिशा में गई ऊपर उठीं, नीचे आई, हर हवा के लिए दोल बनी, लहराईं इसी से तो डाल कहलाई। तने ने जड़ का क्या इतिहास बताया ?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 12 एक दिन तने ने भी कहा था, जड़? जड़ तो जड़ ही है, जीवन से सदा डरी रही है और यही है उसका सारा इतिहास कि जमीन में मुँह गड़ाए पड़ी रही हैं लेकिन मैं जमीन से ऊपर उठा बाहर निकला, बढ़ा हूँ. मजबूत बना हूँ, इसी से तो तना हूँ एक दिन डालों ने भी कहा था, तना? किस बात पर है तना? जहाँ बिठाल दिया था वहीं पर है बना प्रगतिशील जगती में तिल भर नहीं डोला है खाया है, मोटाया है, सहलाया चोला है लेकिन हम तने से फूटी, दिशा-दिशा में गई ऊपर उठीं, नीचे आई, हर हवा के लिए दोल बनी, लहराईं इसी से तो डाल कहलाई। तने ने अपने बारे में क्या कहा?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 12 एक दिन तने ने भी कहा था, जड़? जड़ तो जड़ ही है, जीवन से सदा डरी रही है और यही है उसका सारा इतिहास कि जमीन में मुँह गड़ाए पड़ी रही हैं लेकिन मैं जमीन से ऊपर उठा बाहर निकला, बढ़ा हूँ. मजबूत बना हूँ, इसी से तो तना हूँ एक दिन डालों ने भी कहा था, तना? किस बात पर है तना? जहाँ बिठाल दिया था वहीं पर है बना प्रगतिशील जगती में तिल भर नहीं डोला है खाया है, मोटाया है, सहलाया चोला है लेकिन हम तने से फूटी, दिशा-दिशा में गई ऊपर उठीं, नीचे आई, हर हवा के लिए दोल बनी, लहराईं इसी से तो डाल कहलाई। डालें, तने को प्रगतिशील क्यों नहीं मानती?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 12 एक दिन तने ने भी कहा था, जड़? जड़ तो जड़ ही है, जीवन से सदा डरी रही है और यही है उसका सारा इतिहास कि जमीन में मुँह गड़ाए पड़ी रही हैं लेकिन मैं जमीन से ऊपर उठा बाहर निकला, बढ़ा हूँ. मजबूत बना हूँ, इसी से तो तना हूँ एक दिन डालों ने भी कहा था, तना? किस बात पर है तना? जहाँ बिठाल दिया था वहीं पर है बना प्रगतिशील जगती में तिल भर नहीं डोला है खाया है, मोटाया है, सहलाया चोला है लेकिन हम तने से फूटी, दिशा-दिशा में गई ऊपर उठीं, नीचे आई, हर हवा के लिए दोल बनी, लहराईं इसी से तो डाल कहलाई। डालों ने अपने गतिशील होने का क्या प्रमाण दिया?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 12 एक दिन तने ने भी कहा था, जड़? जड़ तो जड़ ही है, जीवन से सदा डरी रही है और यही है उसका सारा इतिहास कि जमीन में मुँह गड़ाए पड़ी रही हैं लेकिन मैं जमीन से ऊपर उठा बाहर निकला, बढ़ा हूँ. मजबूत बना हूँ, इसी से तो तना हूँ एक दिन डालों ने भी कहा था, तना? किस बात पर है तना? जहाँ बिठाल दिया था वहीं पर है बना प्रगतिशील जगती में तिल भर नहीं डोला है खाया है, मोटाया है, सहलाया चोला है लेकिन हम तने से फूटी, दिशा-दिशा में गई ऊपर उठीं, नीचे आई, हर हवा के लिए दोल बनी, लहराईं इसी से तो डाल कहलाई। प्रगतिशील में प्रयुक्त प्रत्यय है