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प्राकृतिक पारितन्त्र द्वारा प्रदत्त पारि...

प्राकृतिक पारितन्त्र द्वारा प्रदत्त पारितन्त्र सेवाएँ हैं | 12 | पारितन्त्र | BIOLOGY | NEET PRE...

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The given pie chart shows the marks obtained in an examination by a student (in degrees). Observe the pie chart and answer the question that follows: दिया गया पाई चार्ट एक छात्र द्वारा परीक्षा में प्राप्त अंकों (डिग्री में) को दर्शाता है। पाई चार्ट का निरीक्षण करें और निम्न प्रश्न का उत्तर दें: If total marks are 720, then the marks obtained in Chemistry, Biology and Maths together is what percentage of the total marks? यदि कुल अंक 720 हैं, तो रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित में प्राप्त अंक कुल अंकों का कितना प्रतिशत है?

The marks of Eleven students in ascending order for a test are given below with Median as 36, the value of k is: नीचे एक परीक्षा में ग्यारह छात्रों के द्वारा प्राप्त किये गए अंक आरोही क्रम में दिए गए हैं जिनकी मध्यिका 36 है |k का मान है : 10, 12, 16, 25, 28, k + 3, k + 5, 43, 45, 47, 53.

The given pie chart shows the marks obtained in an examination by a student (in degrees). Observe the pie chart and answer the question that follows: दिया गया पाई चार्ट एक छात्र द्वारा परीक्षा में प्राप्त अंकों (डिग्री में) को दर्शाता है। पाई चार्ट का निरीक्षण करें और निम्न प्रश्न का उत्तर दें: If the total marks are 720, then the difference between the total marks obtained in Physics, Maths and Physical Education and the total marks in Chemistry, Biology and English out of the total marks is यदि कुल अंक 720 हैं, तो भौतिक विज्ञान, गणित और शारीरिक शिक्षा में प्राप्त कुल अंकों और कुल अंकों में से रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान और अंग्रेजी में कुल अंकों के बीच का अंतर है:

A and B together can do a piece of work in 12 days which B and C together can do in 16 days. After A has been working at it for 5 days and B for 7 days, C finishes it in 13 days. In how many days B could finish the work? A और B मिलकर एक काम 12 दिन में कर सकते हैं जसे B और C मिलकर 16 दिन में कर सकते हैं। A द्वारा उस पर 5 दिन और B द्वारा 7 दिन करने के बाद C ने उसे 13 दिन में पूरा कर दिया। B उस काम को कितने दिन में पूरा कर सकता था? Options are (a) 48 day/ 48 दिन (b)24 day/ 24 दिन (c)16 day/ 16 दिन (d)12 day/ 12 दिन

The marks of Nine students in ascending order for a test are given below with Median as 34, the value of k is: नीचे एक परीक्षा में नो छात्रों के द्वारा प्राप्त किये गए अंक आरोही क्रम में दिए गये हैं तथा मध्यिका 34 है | k का मान है : 12, 16, k, 28, k + 5, 32, 39, 47, 53.

In the following question, two statements are given each followed by two conclusions I and IL You have to consider the statements to be true even if they seem to be at variance from commonly known facts. You have to decide which of the given conclusions, if any, follows from the given statements. Statement : I. We are going back again to our ancestors and finding out the importance of Yoga and Pranayam. II. People in west have already opted it. It does not require any external equipment but only body and soul. , Conclusions : I. Ancient science is treasure of many cures and natural remedies of various diseases. II. Technology has overshadowed these ancient sources and introduced new concepts of fitness called gym. / निम्नलिखित प्रश्न में, दो कथन दिए गए हैं जिनके आगे दो निष्कर्ष I और II निकाले गए हैं। आपको मानना है कि कथन सत्य है चाहे वे सामान्यतः ज्ञात तथ्यों से भिन्न प्रतीत होते हों। आपको निर्णय करना है कि दिए गए निष्कर्षों में से कौन-सा निश्चित रूप से कथनों द्वारा सही निकाला जा सकता है/सकते हैं, यदि कोई हो। कथनः I. हम फिर से अपने पूर्वजों की ओर लौट रहे हैं और योग तथा प्राणायाम के महत्व को समझ रहे हैं। II. पश्चिम के लोगों ने इसे पहले से ही अपना रखा है। इसके लिए किसी बाहरी उपकरण की जरूरत नहीं है, केवल आत्मा और शरीर चाहिए। निष्कर्ष : I. प्राचीन विज्ञान कई इलाजों का खजाना और विभिन्न रोगों का प्राकृतिक उपचार है। II. प्रौद्योगिकी ने इन प्राचीन स्रोतों को दबा दिया है और स्वस्थ रहने के लिए नई अवधारणा को जन्म दिया है जिसे जिम कहते हैं।

जब से नव उदारवाद की बयार चली है तब से कहा जा रहा है कि सारा विश्व अमेरिकी रंग में, देर-सबेर सराबोर हो जाएगा, यानी सब मुल्कों का अमेरिकीकरण हो जाएगा। ऐसा दावा भूतपूर्व अमेरिकी विदेशमन्त्री डॉ। हेनरी किसिंगर ने 12 अक्टूबर, 1999 को आयरलैण्ड की राजधानी डब्लिन के ट्रिनिटी कॉलेज में अपने व्याख्यान के क्रम में किया : 'बुनियादी चुनौती यह है कि जिसे भूमण्डलीकरण कहा गया है, वह अमेरिका द्वारा वर्चस्व जमाए रखने सम्बन्धी भूमिका का ही दूसरा नाम है। बीते दशक के दौरान अमेरिका ने अभूतपूर्व समृद्धि हासिल की, पूँजी की उपलब्धता को व्यापक और सघन किया, नई प्रौद्योगिकियों की विविधता के निर्माण, उनके विकास और विस्तृत वितरण हेतु धन की व्यवस्था की, अनगिनत सेवाओं और वस्तुओं के बाजार बनाए। आर्थिक दृष्टि से इससे बेहतर कुछ और नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि इन सबको देखते हुए अमेरिकी विचारों, मूल्यों और जीवन शैली को स्वीकारने के अलावा विश्व के पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के स्तम्भकार टॉमस एल। फ्रिडमैन घोषणा करते दिखते हैं कि हम अमेरिकी एक गतिशील विश्व के समर्थक मुक्त बाजार के पैरोकार और उच्च तकनीक के पुजारी हैं। हम चाहते हैं कि विश्व हमारे नेतृत्व में रहे और लोकतान्त्रिक तथा पूँजीवादी बने। इतिहास के अन्त की घोषणा करने वाले फ्रांसिस फुकुयामा का मानना है कि विश्व का अमेरिकीकरण होना ही चाहिए, क्योंकि कई दृष्टियों से अमेरिका आज विश्व का सर्वाधिक उन्नत पूँजीवादी समाज है। उसके संस्थान इसी कारण बाजार की शक्तियों के तर्क संगत विकास के प्रतीक हैं। यदि बाजार की शक्तियों को वैश्वीकरण संचालित करता है, तो भूमण्डलीकरण के साथ-साथ अमेरिकीकरण अनिवार्य रूप से होगा। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' से जुड़े भारतीय मूल के टिप्पणीकार आकाश कपूर ने उपरोक्त चर्चा को आगे बढ़ाया है। कपूर के पिता भारतीय और माँ अमेरिकी हैं। वे पले-बढ़े हैं अमेरिका में, परन्तु अरसे से पुदुचेरी (पाण्डिचेरी) में रहते हैं। उनके लेख 'न्यूयॉर्क टाइम्स' और उनके भूमण्डलीय संस्करण 'इण्टरनेशनल हेराल्ड ट्रिब्यून' में नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं। नव उदारवाद का प्रभाव हो सकता है

जब से नव उदारवाद की बयार चली है तब से कहा जा रहा है कि सारा विश्व अमेरिकी रंग में, देर-सबेर सराबोर हो जाएगा, यानी सब मुल्कों का अमेरिकीकरण हो जाएगा। ऐसा दावा भूतपूर्व अमेरिकी विदेशमन्त्री डॉ। हेनरी किसिंगर ने 12 अक्टूबर, 1999 को आयरलैण्ड की राजधानी डब्लिन के ट्रिनिटी कॉलेज में अपने व्याख्यान के क्रम में किया : 'बुनियादी चुनौती यह है कि जिसे भूमण्डलीकरण कहा गया है, वह अमेरिका द्वारा वर्चस्व जमाए रखने सम्बन्धी भूमिका का ही दूसरा नाम है। बीते दशक के दौरान अमेरिका ने अभूतपूर्व समृद्धि हासिल की, पूँजी की उपलब्धता को व्यापक और सघन किया, नई प्रौद्योगिकियों की विविधता के निर्माण, उनके विकास और विस्तृत वितरण हेतु धन की व्यवस्था की, अनगिनत सेवाओं और वस्तुओं के बाजार बनाए। आर्थिक दृष्टि से इससे बेहतर कुछ और नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि इन सबको देखते हुए अमेरिकी विचारों, मूल्यों और जीवन शैली को स्वीकारने के अलावा विश्व के पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के स्तम्भकार टॉमस एल। फ्रिडमैन घोषणा करते दिखते हैं कि हम अमेरिकी एक गतिशील विश्व के समर्थक मुक्त बाजार के पैरोकार और उच्च तकनीक के पुजारी हैं। हम चाहते हैं कि विश्व हमारे नेतृत्व में रहे और लोकतान्त्रिक तथा पूँजीवादी बने। इतिहास के अन्त की घोषणा करने वाले फ्रांसिस फुकुयामा का मानना है कि विश्व का अमेरिकीकरण होना ही चाहिए, क्योंकि कई दृष्टियों से अमेरिका आज विश्व का सर्वाधिक उन्नत पूँजीवादी समाज है। उसके संस्थान इसी कारण बाजार की शक्तियों के तर्क संगत विकास के प्रतीक हैं। यदि बाजार की शक्तियों को वैश्वीकरण संचालित करता है, तो भूमण्डलीकरण के साथ-साथ अमेरिकीकरण अनिवार्य रूप से होगा। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' से जुड़े भारतीय मूल के टिप्पणीकार आकाश कपूर ने उपरोक्त चर्चा को आगे बढ़ाया है। कपूर के पिता भारतीय और माँ अमेरिकी हैं। वे पले-बढ़े हैं अमेरिका में, परन्तु अरसे से पुदुचेरी (पाण्डिचेरी) में रहते हैं। उनके लेख 'न्यूयॉर्क टाइम्स' और उनके भूमण्डलीय संस्करण 'इण्टरनेशनल हेराल्ड ट्रिब्यून' में नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं। लेखक प्रस्तुत गद्यांश के माध्यम से क्या कहना चाहता है?

जब से नव उदारवाद की बयार चली है तब से कहा जा रहा है कि सारा विश्व अमेरिकी रंग में, देर-सबेर सराबोर हो जाएगा, यानी सब मुल्कों का अमेरिकीकरण हो जाएगा। ऐसा दावा भूतपूर्व अमेरिकी विदेशमन्त्री डॉ। हेनरी किसिंगर ने 12 अक्टूबर, 1999 को आयरलैण्ड की राजधानी डब्लिन के ट्रिनिटी कॉलेज में अपने व्याख्यान के क्रम में किया : 'बुनियादी चुनौती यह है कि जिसे भूमण्डलीकरण कहा गया है, वह अमेरिका द्वारा वर्चस्व जमाए रखने सम्बन्धी भूमिका का ही दूसरा नाम है। बीते दशक के दौरान अमेरिका ने अभूतपूर्व समृद्धि हासिल की, पूँजी की उपलब्धता को व्यापक और सघन किया, नई प्रौद्योगिकियों की विविधता के निर्माण, उनके विकास और विस्तृत वितरण हेतु धन की व्यवस्था की, अनगिनत सेवाओं और वस्तुओं के बाजार बनाए। आर्थिक दृष्टि से इससे बेहतर कुछ और नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि इन सबको देखते हुए अमेरिकी विचारों, मूल्यों और जीवन शैली को स्वीकारने के अलावा विश्व के पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के स्तम्भकार टॉमस एल। फ्रिडमैन घोषणा करते दिखते हैं कि हम अमेरिकी एक गतिशील विश्व के समर्थक मुक्त बाजार के पैरोकार और उच्च तकनीक के पुजारी हैं। हम चाहते हैं कि विश्व हमारे नेतृत्व में रहे और लोकतान्त्रिक तथा पूँजीवादी बने। इतिहास के अन्त की घोषणा करने वाले फ्रांसिस फुकुयामा का मानना है कि विश्व का अमेरिकीकरण होना ही चाहिए, क्योंकि कई दृष्टियों से अमेरिका आज विश्व का सर्वाधिक उन्नत पूँजीवादी समाज है। उसके संस्थान इसी कारण बाजार की शक्तियों के तर्क संगत विकास के प्रतीक हैं। यदि बाजार की शक्तियों को वैश्वीकरण संचालित करता है, तो भूमण्डलीकरण के साथ-साथ अमेरिकीकरण अनिवार्य रूप से होगा। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' से जुड़े भारतीय मूल के टिप्पणीकार आकाश कपूर ने उपरोक्त चर्चा को आगे बढ़ाया है। कपूर के पिता भारतीय और माँ अमेरिकी हैं। वे पले-बढ़े हैं अमेरिका में, परन्तु अरसे से पुदुचेरी (पाण्डिचेरी) में रहते हैं। उनके लेख 'न्यूयॉर्क टाइम्स' और उनके भूमण्डलीय संस्करण 'इण्टरनेशनल हेराल्ड ट्रिब्यून' में नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं। इतिहास के अन्त की घोषणा किसने की थी?