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प्राकृतिक चयन से प्राप्त हो सकता है .......

प्राकृतिक चयन से प्राप्त हो सकता है ....A... (जिसमें अधिक जीव औसत लक्षण मान (value) अर्जित करते ...

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The ratio of boys to girls in a class is 2 : 3 and the average score of all the students in the class in maths is 54. The average score of boys is 50% more than that of girls. What is the average score of girls ? एक कक्षा में लड़के और लड़कियों की संख्या का अनुपात 2 : 3 है और कक्षा में सभी छात्रों के गणित में औसत प्राप्तांक 54 है | लड़कों का औसत प्राप्तांक लड़कियों के औसत प्राप्तंक से 50% अधिक है | लड़कियों का औसत प्राप्तांक कितना है ?

There are 96 students in a class, out of which the number of girls is 40% more than that of the boys. The average score in mathematics of the boys is 40% more than the average score of girls. If the average score in mathematics of all the students is 63, then what is the average score of the girls in mathematics? एक कक्षा में 96 छात्र हैं, जिनमें से लड़कियों की संख्या लड़कों की संख्या से 40% अधिक है | लड़कों का गणित में औसत प्राप्तांक लड़कियों के औसत प्राप्तांक से 40% अधिक है | यदि गणित में सभी छात्रों का औसत प्राप्तांक 63 है, तो गणित में लड़कियों का औसत प्राप्तांक ज्ञात करें |

एक संस्कृत व्यक्ति किसी नई चीज की खोज करता है, किन्तु उसकी सन्तान को वह अपने पूर्वज से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी सन्तान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भाँति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकता। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान क विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित ही रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नहीं कह सकते। 'संस्कृत' का अर्थ है।

एक संस्कृत व्यक्ति किसी नई चीज की खोज करता है, किन्तु उसकी सन्तान को वह अपने पूर्वज से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी सन्तान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भाँति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकता। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान क विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित ही रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नहीं कह सकते। वास्तविक संस्कृत व्यक्ति वह है जो