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किसी पदार्थ का द्रव्यमान 50ग्राम /मोल है...

किसी पदार्थ का द्रव्यमान 50ग्राम /मोल है | इस पदार्थ के25 ग्राम सैम्पल को 400 जूलऊष्मा दी जाती ह...

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A hemispherical bowl of internal diameter 36 cm is full of a liquid. This liquid is to be filled into cylindrical bottles each of radius 3 cm and height 12 cm. How many such bottles are required to empty the bowl ? 36 सेमी आतंरिक व्यास वाला अर्धगोलीय कटोरा किसी तरल पदार्थ से भरा हुआ है | इस तरल पदार्थ को बेलनाकार बोतलों में डाला जाता है जिनमें से प्रत्येक की त्रिज्या 3 सेमी और ऊंचाई 12 सेमी है | कटोरे को खाली करने के लिए ऐसी कितनी बोतलों की आवश्यकता है ?

गोदान' प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भारत की आत्मा का करुण चित्र साकार हो उठा है। इसी कारण कई मनीषी आलोचक इसे ग्रामीण भारतीय परिवेशगत समस्याओं का महाकाव्य मानते हैं तो कई विद्वान् इसे ग्रामीण-जीवन और कृषि-संस्कृति का शोक गीत स्वीकारते हैं। कुछ विद्वान् तो ऐसे भी हैं कि जो इस उपन्यास को ग्रामीण भारत की आधुनिक 'गीता' तक स्वीकार करते हैं, जो कुछ भी हो, 'गोदान' वास्तव में मुंशी प्रेमचन्द का एक ऐसा उपन्यास है जिसमें आचार-विचार, संस्कार और प्राकृतिक परिवेश, जो गहन करुणा से युक्त है, प्रतिबिम्बित हो उठा है। डॉ। गोपाल राय का कहना है कि 'गोदान' ग्राम-जीवन और ग्राम संस्कृति को उसकी सम्पूर्णता में प्रस्तुत करने वाला अद्वितीय उपन्यास है न केवल हिन्दी । के वरन् किसी भी भारतीय भाषा के किसी भी उपन्यास में ग्रामीण समाज का । ऐसा व्यापक यथार्थ और सहानुभूतिपूर्ण चित्रण नहीं हुआ है। ग्रामीण जीवन और संस्कृति के अंकन की दृष्टि से इस उपन्यास का वही महत्त्व है, जो आधुनिक युग में युग जीवन की अभिव्यक्ति की दृष्टि से महाकाव्यों का हुआ करता था। इस प्रकार डॉ। राय गोदान को आधुनिक युग का महाकाव्य ही नहीं स्वीकारते वरन् सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य भी स्वीकारते हैं। उनके इस कथन का यही आशय है कि प्रेमचन्द जी ने ग्राम-जीवन से सम्बद्ध सभी पक्षों का न । केवल अत्यन्त विशदत्ता से चित्रण किया है, वरन् उनकी गहराइयों में जाकर उनके सच्चे चित्र प्रस्तुत कर दिए हैं। प्रेमचन्द जी ने जिस ग्राम-जीवन का चित्र गोदान में प्रस्तुत किया है, उसका सम्बन्ध आज ग्राम परिवेश से न होकर तत्कालीन ग्राम-जीवन से है। ग्रामीण जीवन को वास्तविक आधार प्रदान करने के लिए प्रेमचन्द जी ने चित्र के अनुरूप ही कुछ ऐसे खाँचे अथवा चित्रफलक निर्मित किए हैं, जो चित्र को - यथार्थ बनाने में सहयोगी सिद्ध हुए हैं। ग्रामीण किसानों के घर-द्वार, खेत-खलिहान और प्राकृतिक दृश्यों का ऐसा वास्तविक चित्रण अन्यत्र दुर्लभ है। 'गोदान' है

गोदान' प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भारत की आत्मा का करुण चित्र साकार हो उठा है। इसी कारण कई मनीषी आलोचक इसे ग्रामीण भारतीय परिवेशगत समस्याओं का महाकाव्य मानते हैं तो कई विद्वान् इसे ग्रामीण-जीवन और कृषि-संस्कृति का शोक गीत स्वीकारते हैं। कुछ विद्वान् तो ऐसे भी हैं कि जो इस उपन्यास को ग्रामीण भारत की आधुनिक 'गीता' तक स्वीकार करते हैं, जो कुछ भी हो, 'गोदान' वास्तव में मुंशी प्रेमचन्द का एक ऐसा उपन्यास है जिसमें आचार-विचार, संस्कार और प्राकृतिक परिवेश, जो गहन करुणा से युक्त है, प्रतिबिम्बित हो उठा है। डॉ। गोपाल राय का कहना है कि 'गोदान' ग्राम-जीवन और ग्राम संस्कृति को उसकी सम्पूर्णता में प्रस्तुत करने वाला अद्वितीय उपन्यास है न केवल हिन्दी । के वरन् किसी भी भारतीय भाषा के किसी भी उपन्यास में ग्रामीण समाज का । ऐसा व्यापक यथार्थ और सहानुभूतिपूर्ण चित्रण नहीं हुआ है। ग्रामीण जीवन और संस्कृति के अंकन की दृष्टि से इस उपन्यास का वही महत्त्व है, जो आधुनिक युग में युग जीवन की अभिव्यक्ति की दृष्टि से महाकाव्यों का हुआ करता था। इस प्रकार डॉ। राय गोदान को आधुनिक युग का महाकाव्य ही नहीं स्वीकारते वरन् सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य भी स्वीकारते हैं। उनके इस कथन का यही आशय है कि प्रेमचन्द जी ने ग्राम-जीवन से सम्बद्ध सभी पक्षों का न । केवल अत्यन्त विशदत्ता से चित्रण किया है, वरन् उनकी गहराइयों में जाकर उनके सच्चे चित्र प्रस्तुत कर दिए हैं। प्रेमचन्द जी ने जिस ग्राम-जीवन का चित्र गोदान में प्रस्तुत किया है, उसका सम्बन्ध आज ग्राम परिवेश से न होकर तत्कालीन ग्राम-जीवन से है। ग्रामीण जीवन को वास्तविक आधार प्रदान करने के लिए प्रेमचन्द जी ने चित्र के अनुरूप ही कुछ ऐसे खाँचे अथवा चित्रफलक निर्मित किए हैं, जो चित्र को - यथार्थ बनाने में सहयोगी सिद्ध हुए हैं। ग्रामीण किसानों के घर-द्वार, खेत-खलिहान और प्राकृतिक दृश्यों का ऐसा वास्तविक चित्रण अन्यत्र दुर्लभ है। 'गोदान' को किसने महाकाव्य माना है?

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