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प्रक्कथन : चायना रोज एवं गुलाब दोनों पर ...

प्रक्कथन : चायना रोज एवं गुलाब दोनों पर अनुपर्ण पाया जाता है | कारण : ये संलग्न (adnate) प्रकार ...

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Two numbers are in the ratio 3:4. On increasing each of them by 30, the ratio becomes 9:10. The numbers are : दो संख्याएं 3 : 4 के अनुपात में हैं | दोनों को 30 से बढ़ाने पर, यह अनुपात 9 : 10 हो जाता है | ये संख्याएं हैं :

An article is sold at a profit of 30%. If both cost price and selling price of the article are decreased by Rs.100, the profit now would be 45%. The original cost price of the article is: एक वस्तु 30% के लाभ पर बेचा जाता है। यदि वस्तु की लागत मूल्य और विक्रय मूल्य दोनों को 100 रुपये कम किया जाता है, तो अब लाभ 45% होगा। वस्तु की मूल लागत मूल्य ज्ञात करें |

Two numbers are in the ratio 3:4. On increasing each of them by 30, the ratio becomes 9:10. The sum of the numbers is : दो संख्याएं 3 : 4 के अनुपात में है | दोनों को 30 से बढ़ाने पर, यह अनुपात 9 : 10 हो जाता है | इन संख्याओं का योग है -

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता जनसंख्या वृद्धि रोकना है। इस क्षेत्र में हमारे सभी प्रयत्न निष्फल रहे हैं। ऐसा क्यों है? यह इसलिए भी हो सकता है कि समस्या को देखने का हर एक का एक अलग नजरिया है। जनसंख्याशास्त्रियों के लिए यह आंकड़ों का अम्बार है। अफसरशाही के लिए यह टार्गेट तय करने की कवायद है। राजनीतिज्ञ इस वोट बैंक की दृष्टि से देखता है। ये सबस अपने-अपने ढंग से समस्या को सुलझाने में लगे हैं। अतः अलग-अलग किसी के हाथ सफलता नहीं लगी। पर यह स्पष्ट है कि परिवार के आकार पर आर्थिक विकास और शिक्षा का बहुत प्रभाव पड़ता है। यहाँ आर्थिक विकास का मतलब पाश्चात्य मतानुसार भौतिकवाद नहीं जहाँ बच्चों को बोझ माना जाता है। हमारे लिए तो यह सम्मानपूर्वक जीने के स्तर से सम्बन्धित है। यह मौजूदा सम्पति के समतामलक विवरण पर ही निर्भर नहीं है वरन् ऐसी शैली अपनाने से सम्बन्धित है जिसमें अस्सी करोड़ लोगों की ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल हो सके। इसी प्रकार स्त्री शिक्षा भी है। यह समाज में एक नए प्रकार का चिन्तन पैदा करेगी जिससे सामाजिक और आर्थिक विकास के नए आयाम खुलेंगे और साथ ही बच्चों के विकास का नया रास्ता भी खुलेगा। अतः जनसंख्या की समस्या सामाजिक है। यह अकेले सरकार नहीं सुलझा सकती। केन्द्रीयकरण से हटकर इसे ग्राम-ग्राम, व्यक्ति-व्यक्ति तक पहुँचना होगा। जब तक यह जन आन्दोलन नहीं बन जाता तब तक सफलता मिलना संदिग्ध है। परिवार के छोटा या बड़ा होने पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है