जेल पर रखे एधिडियम ब्रोमाइड से अभिरंजित डी .एन. ए. रञ्जुक को जब यु .बी. विकिरण के अंतर्गत देखा ज...
जेल पर रखे एधिडियम ब्रोमाइड से अभिरंजित डी .एन. ए. रञ्जुक को जब यु .बी. विकिरण के अंतर्गत देखा ज...
Similar Questions
Explore conceptually related problems
शत-शत निर्झर-निर्झरणी कल मुखरित देवदारु कानन में शोणित धवल भोज-पत्रों से छाई हुई कुटी के भीतर रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से कुंतल को साजे इंद्रनील की माला डाले शंख-सरीखे सुघड़ गलों में कानों में कुवलय लटकाए शतदल लाल कमल वेणी में रजत-रचित मणि खचित कलामय पान-पात्र द्राक्षासव पूरित रखे सामने अपने-अपने लोहित चंदन की त्रिपुटी पर नरम निदाग बाल-कस्तूरी भृगछालों पर पलथी मारे मदिरारुण आँखों वाले उन उन्मद किन्नर-किन्नरियों की मृदुल मनोरम अंगुलियों को वंशी पर फिरते देखा है बादल को घिरते देखा है। कवि किन्नर-किन्नरियों की अंगुलियों को किस पर फिरते देखता है?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए। इस समय जनसत्त संसार के प्रत्येक देश के दरवाजे पर दस्तक दे रही है और आज वह अपने मजबूत हाथो में भारतवर्ष के दरवाजे की जंजीर भी खटखटाती हुई उसे अत्यंत प्राचीन भूमि के निवासियों से प्रश्न करती है की बतलाओ , तुम नवयुग का स्वागत किस प्रकार करना चाहते हो ? इस देश के युवको से और उन सभी प्रकार के लोगो से जो कर्मक्षेत्र में अवतीर्ण हो चुके है उसके संसार के अत्याचारों और अनाचारों की और ऊँगली उठाते हुए स्पष्ट प्रश्न है कि क्या उस समय जबकि संसार में न्याय और अन्याय का ऐसा घमासान युद्ध छिड़ा हुआ है , तुम निष्क्रिय और चुपचाप हाथ पर हाथ रखे बैठे रहना ही उचित समझते हो ? क्या उस समय जबकि राष्ट्रों के होनहार नैनिहाल केवल निकृष्ट श्रेणियों में जन्म लेने के कारण जबरदस्तों कि स्वार्थ वेदी पर बेदर्दी से बलिदान किये जा रहे है , जब केवल जाती या रंग के कारण मनुष्य मनुष्य कि गर्दन काट रहा है , तुम चुपचाप बैठे हुए इस विभीषिका को देखते रहना अपना धर्म समझते हो ? क्या उस समय जब व्यक्तियों के स्वेच्छाचारो के अंत कि घोषणा संसार भर में गूंज उठी है और स्वेच्छाचार अपनी धाक कि समाप्ति के पश्चात अब अपने जाने कि गंभीरतापूर्वक तयारी कर रहा है , तब उन घटनाओ को चुपचाप देखना ही तुम्हारा कर्तव्य है ? इनमे से किस कारणवश कुछ व्यक्तियों का बलिदान किया जा रहा है ?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए। इस समय जनसत्त संसार के प्रत्येक देश के दरवाजे पर दस्तक दे रही है और आज वह अपने मजबूत हाथो में भारतवर्ष के दरवाजे की जंजीर भी खटखटाती हुई उसे अत्यंत प्राचीन भूमि के निवासियों से प्रश्न करती है की बतलाओ , तुम नवयुग का स्वागत किस प्रकार करना चाहते हो ? इस देश के युवको से और उन सभी प्रकार के लोगो से जो कर्मक्षेत्र में अवतीर्ण हो चुके है उसके संसार के अत्याचारों और अनाचारों की और ऊँगली उठाते हुए स्पष्ट प्रश्न है कि क्या उस समय जबकि संसार में न्याय और अन्याय का ऐसा घमासान युद्ध छिड़ा हुआ है , तुम निष्क्रिय और चुपचाप हाथ पर हाथ रखे बैठे रहना ही उचित समझते हो ? क्या उस समय जबकि राष्ट्रों के होनहार नैनिहाल केवल निकृष्ट श्रेणियों में जन्म लेने के कारण जबरदस्तों कि स्वार्थ वेदी पर बेदर्दी से बलिदान किये जा रहे है , जब केवल जाती या रंग के कारण मनुष्य मनुष्य कि गर्दन काट रहा है , तुम चुपचाप बैठे हुए इस विभीषिका को देखते रहना अपना धर्म समझते हो ? क्या उस समय जब व्यक्तियों के स्वेच्छाचारो के अंत कि घोषणा संसार भर में गूंज उठी है और स्वेच्छाचार अपनी धाक कि समाप्ति के पश्चात अब अपने जाने कि गंभीरतापूर्वक तयारी कर रहा है , तब उन घटनाओ को चुपचाप देखना ही तुम्हारा कर्तव्य है ? गद्यांश के अनुसार विश्व के सभी देशो में आज किसकी धूम है ?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए। इस समय जनसत्त संसार के प्रत्येक देश के दरवाजे पर दस्तक दे रही है और आज वह अपने मजबूत हाथो में भारतवर्ष के दरवाजे की जंजीर भी खटखटाती हुई उसे अत्यंत प्राचीन भूमि के निवासियों से प्रश्न करती है की बतलाओ , तुम नवयुग का स्वागत किस प्रकार करना चाहते हो ? इस देश के युवको से और उन सभी प्रकार के लोगो से जो कर्मक्षेत्र में अवतीर्ण हो चुके है उसके संसार के अत्याचारों और अनाचारों की और ऊँगली उठाते हुए स्पष्ट प्रश्न है कि क्या उस समय जबकि संसार में न्याय और अन्याय का ऐसा घमासान युद्ध छिड़ा हुआ है , तुम निष्क्रिय और चुपचाप हाथ पर हाथ रखे बैठे रहना ही उचित समझते हो ? क्या उस समय जबकि राष्ट्रों के होनहार नैनिहाल केवल निकृष्ट श्रेणियों में जन्म लेने के कारण जबरदस्तों कि स्वार्थ वेदी पर बेदर्दी से बलिदान किये जा रहे है , जब केवल जाती या रंग के कारण मनुष्य मनुष्य कि गर्दन काट रहा है , तुम चुपचाप बैठे हुए इस विभीषिका को देखते रहना अपना धर्म समझते हो ? क्या उस समय जब व्यक्तियों के स्वेच्छाचारो के अंत कि घोषणा संसार भर में गूंज उठी है और स्वेच्छाचार अपनी धाक कि समाप्ति के पश्चात अब अपने जाने कि गंभीरतापूर्वक तयारी कर रहा है , तब उन घटनाओ को चुपचाप देखना ही तुम्हारा कर्तव्य है ? गद्यांश के अनुसार संसार में किसके बीच युद्ध हो रहा है ?