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द्रव्यमान को देखते हुए, पृथ्वी और सूर्य ...

द्रव्यमान को देखते हुए, पृथ्वी और सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण बल की गणना करें

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एक संस्कृत व्यक्ति किसी चीज़ की खोज करता है, किन्तु उसकी संतान को वह अपने पूर्वजों से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी संतान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भांति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकती। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नही कह सकते। 'न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण बल की खोज की वाक्य को कर्मवाच्य में बदलिए!

Revision|गोलाकार द्रव्यमान वितरण के कारण गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र की तीव्रता|गोलीय कोश के कारण गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र की तीव्रता|गुरुत्व के कारण त्वरण|OMR|Summary

द्रव्यमान केन्द्र की परिभाषा | असतत कणों के द्रव्यमान केन्द्र की गणना | उदाहरण