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दो उदाहरण लेकर दर्शाइए कि सभी सम प्राकृत...

दो उदाहरण लेकर दर्शाइए कि सभी सम प्राकृत संख्याओं का घन सम होता है। | 8 | घन और घनमूल | MATHS |...

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In a set of three numbers, the average of first two numbers is 21, the average of the last two numbers is 24, and the average of the first and the last numbers is 15. What is the average of three numbers? तीन संख्याओं के सेट में, पहली दो संख्याओं का औसत 21 है, अंतिम दो संख्याओं का ओसत 24 है, ओर पहली. और अंतिम संख्या का औसत 15 है। उन तीन संख्याओं का औसत क्या हे?

Four different numbers are given here. The average of the first three numbers is four times to the fourth number and the average of all four numbers is 87.75. What is the average of the first three numbers ? यहाँ चार अलग-अलग संख्याएँ दी गई हैं | पहली तीन संख्याओं का औसत चौथी संख्या का चार गुणा है और सभी चार संख्याओं का औसत 87.75 है | पहली तीन संख्याओं का औसत कितना है ?

The average of 15 numbers is 45. The average of the first six numbers is 42 and that of last six numbers is 43. The seventh number is two times the eighth number but 5 more than the 9th number. The average of the seventh and the ninth number is : 15 संख्याओं का औसत 45 है | प्रथम छह संख्याओं का औसत 42 है और अंतिम छह संख्याओं का औसत 43 है| 7 वीं संख्या, 8 वीं संख्या की दोगुनी है, लेकिन 9 वीं संख्या से 5 अधिक है| तो 7 वीं और 9 वीं संख्याओं का औसत कितना है ?

विद्याभ्यासी पुरुष को साथियों का अभाव कभी नहीं रहता। उसकी कोठरी में सदा ऐसे लोगों का वास रहता है, जो अमर हैं। वे उसके प्रति सहानुभूति । प्रकट करने और उसे समझाने के लिए सदा प्रस्तुत रहते हैं। कवि, दार्शनिक और विद्वान जिन्होंने प्रकृति के रहस्यों का उद्घाटन किया है और बड़े-बड़े. महात्मा, जिन्होंने आत्मा के गूढ़ रहस्यों की थाह लगा ली है, सदा उसकी बातें सुनने और उसकी शंकाओं का समाधान करने के लिए उद्यत रहते हैं। बिना किसी उद्देश्य के सरसरी तौर पर पुस्तकों के पन्ने उलटते जाना अध्ययन नहीं है। लिखी हुई बातों को विचारपूर्वक पूर्णरूप से हृदय से ग्रहण करने का नाम अध्ययन है। प्रत्येक स्त्री-पुरुष को अपने पढ़ने का उद्देश्य स्थित कर लेना चाहिए। इसके लिए सबसे मुख्य बात यह है कि पढ़ना नियमपूर्वक हो अर्थात् इसके लिए नित्य का सम उपयुक्त होता है। विद्या का अभ्यास करने वाले व्यक्तियों को साथियों की कमी महसूस नहीं होती है क्योंकि

विद्याभ्यासी पुरुष को साथियों का अभाव कभी नहीं रहता। उसकी कोठरी में सदा ऐसे लोगों का वास रहता है, जो अमर हैं। वे उसके प्रति सहानुभूति । प्रकट करने और उसे समझाने के लिए सदा प्रस्तुत रहते हैं। कवि, दार्शनिक और विद्वान जिन्होंने प्रकृति के रहस्यों का उद्घाटन किया है और बड़े-बड़े. महात्मा, जिन्होंने आत्मा के गूढ़ रहस्यों की थाह लगा ली है, सदा उसकी बातें सुनने और उसकी शंकाओं का समाधान करने के लिए उद्यत रहते हैं। बिना किसी उद्देश्य के सरसरी तौर पर पुस्तकों के पन्ने उलटते जाना अध्ययन नहीं है। लिखी हुई बातों को विचारपूर्वक पूर्णरूप से हृदय से ग्रहण करने का नाम अध्ययन है। प्रत्येक स्त्री-पुरुष को अपने पढ़ने का उद्देश्य स्थित कर लेना चाहिए। इसके लिए सबसे मुख्य बात यह है कि पढ़ना नियमपूर्वक हो अर्थात् इसके लिए नित्य का सम उपयुक्त होता है। 'विद्वान' शब्द का विलोम है