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टीएमवी के पास | 12 | वायरस वाइरोइड्स और प्रिअन्स | जीव विज्ञान | दिनेश प्रकाशन | संशय

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कुछ लाख वर्ष पहले की बात है जब मनुष्य जंगली था, वनमानुष जैसा उसे नाख़ून की जरुरत थी उसकी जीवन रक्षा के लिए नाख़ून बहुत ज़रूरी थे असल में वही उसके अस्त्र थे दाँत भी थे पर नाख़ून के बाद ही उनका स्थान था उन दिनों उसे झूझना पड़ता था प्रतिद्वन्दियो को पछाड़ना पड़ता था नाख़ून उसके लिए आवश्यक अंग था फिर वह अपने अंग से बाहर की वस्तुओ का सहारा लेने लग। पत्थर के ढेले और पेड़ की डाले काम में लाने लगा (रामचन्द्रजी की वानरी सेना के पास ऐसे ही अस्त्र थे) ! उसने हड्डियों के भी हथियार बनाये! इन हड्डी के हथियार में सबसे मजबूत और सब से ऐतिहासिक था इन्द्र देव का वज्र, जो ऋषि मुनि की हड्डियों से बना था मनुष्य और आगे बढ़ा उसने धातु के हथियार बनाये जिनके पास लोहे के अस्त्र और शस्त्र थे वे विजयी हुए। देवताओ के राजा तक को मनुष्ये के राजा से इसलिए सहायता लेनी पड़ती थी क्यूंकि मनुष्ये के राजा के पास लोहे के अस्त्र थे असुरो के पास अनेक विधाये थी पर लोहे के अस्त्र नहीं थे शायद घोड़े भी नहीं थे आर्यो के पास यह दोनों चीज़े थी आर्ये विजयी हुए फिर इतिहास अपनी गति से बढ़ता गया नाग हारे सुपर्ण हारे यक्ष हारे गन्धर्व हारे असुरे हारे राक्षस हारे लोहे के अस्त्रों ने बाज़ी मार ली इतिहास आगे बढ़ा। पलीते वाली बंदूकों ने, कारतूसों ने, तोपों ने , बमो ने , बम वर्षक वायुयानों ने इतिहास को किस कीचड़ भरे घाट तक घसीटा है यह सबको मालूम है नख धर मनुष्य अब भी बढ़ रहे है अब भी प्रकृति भी मनुष्यो को उसके भीतर वाले अस्त्र से वंचित नहीं कर रही है , अब भी याद दिला देती है के तुम्हारे नाख़ून को भुलाया नहीं जा सकता। तुम वही लाख वर्ष पहले के नख - दंतावलम्वी जीव हो-पशु के साथ ही सतह पर विचरने वाले और चरने वाले। प्राचीन काल में मनुष्य को नाख़ून की आवश्यकता क्यों थी

The given pie chart shows the marks obtained in an examination by a student (in degrees). Observe the pie chart and answer the question that follows: दिया गया पाई चार्ट एक छात्र द्वारा परीक्षा में प्राप्त अंकों (डिग्री में) को दर्शाता है। पाई चार्ट का निरीक्षण करें और निम्न प्रश्न का उत्तर दें: If total marks are 720, then the marks obtained in Chemistry, Biology and Maths together is what percentage of the total marks? यदि कुल अंक 720 हैं, तो रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित में प्राप्त अंक कुल अंकों का कितना प्रतिशत है?

कुछ लाख वर्ष पहले की बात है जब मनुष्य जंगली था, वनमानुष जैसा उसे नाख़ून की जरुरत थी उसकी जीवन रक्षा के लिए नाख़ून बहुत ज़रूरी थे असल में वही उसके अस्त्र थे दाँत भी थे पर नाख़ून के बाद ही उनका स्थान था उन दिनों उसे झूझना पड़ता था प्रतिद्वन्दियो को पछाड़ना पड़ता था नाख़ून उसके लिए आवश्यक अंग था फिर वह अपने अंग से बाहर की वस्तुओ का सहारा लेने लग। पत्थर के ढेले और पेड़ की डाले काम में लाने लगा (रामचन्द्रजी की वानरी सेना के पास ऐसे ही अस्त्र थे) ! उसने हड्डियों के भी हथियार बनाये! इन हड्डी के हथियार में सबसे मजबूत और सब से ऐतिहासिक था इन्द्र देव का वज्र, जो ऋषि मुनि की हड्डियों से बना था मनुष्य और आगे बढ़ा उसने धातु के हथियार बनाये जिनके पास लोहे के अस्त्र और शस्त्र थे वे विजयी हुए। देवताओ के राजा तक को मनुष्ये के राजा से इसलिए सहायता लेनी पड़ती थी क्यूंकि मनुष्ये के राजा के पास लोहे के अस्त्र थे असुरो के पास अनेक विधाये थी पर लोहे के अस्त्र नहीं थे शायद घोड़े भी नहीं थे आर्यो के पास यह दोनों चीज़े थी आर्ये विजयी हुए फिर इतिहास अपनी गति से बढ़ता गया नाग हारे सुपर्ण हारे यक्ष हारे गन्धर्व हारे असुरे हारे राक्षस हारे लोहे के अस्त्रों ने बाज़ी मार ली इतिहास आगे बढ़ा। पलीते वाली बंदूकों ने, कारतूसों ने, तोपों ने , बमो ने , बम वर्षक वायुयानों ने इतिहास को किस कीचड़ भरे घाट तक घसीटा है यह सबको मालूम है नख धर मनुष्य अब भी बढ़ रहे है अब भी प्रकृति भी मनुष्यो को उसके भीतर वाले अस्त्र से वंचित नहीं कर रही है , अब भी याद दिला देती है के तुम्हारे नाख़ून को भुलाया नहीं जा सकता। तुम वही लाख वर्ष पहले के नख - दंतावलम्वी जीव हो-पशु के साथ ही सतह पर विचरने वाले और चरने वाले | पंक गद्यांश में आये किस शब्द का प्रयायवाची शब्द है ?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 2 एक दिवस प्रेम, विज्ञान ने आपस में बातें की। ऊँचा कर शीश और तान निज वक्ष तनिक विज्ञान बोला यो सुन रे ओ प्रेम वायु में उड़ाया गहरे पानी पठाया ऊँचे शिखरों पर चढ़ाया मैंने ही मानव को। मैंने ही मोड़ डाला अनगिन सरि-धारों को, मरुथल-पहाड़ों को मेरा सहारा ले मानव पदों ने चप्पा-चप्पा भी रौंद डाला। सुन रे, ओ प्रेम मैने मौसम बदल डाला। ग्रीष्म में शीत और शीत में ग्रीष्म कर पहुँचाया कितना है सुख मैंने मानव को। विज्ञान के कारण मौसम में क्या बदलाव आया?

जीव विज्ञान |परिचय जैव प्रक्रम|7 मुख्य जैव प्रक्रम|पोषण |पोषण की विधीया |परपोषण के प्रकार |OMR

Amit and Sunil together can complete a work in 9 days, Sunil and Dinesh together can complete the same work in 12days, and Amit and Dinesh together can complete the same work in 18 days. In how many days will they complete the work if Amit, Sunil and Dinesh work together? / अमित और सुनील एक साथ किसी कार्य को 9 दिनों में पूरा कर सकते हैं | सुनील तथा दिनेश एक साथ इस कार्य को 12 दिनों में पूरा कर सकते हैं तथा अमित और दिनेश इस कार्य को एक साथ 18 दिनों में पूरा कर सकते हैं | यदि अमित, सुनील तथा दिनेश एक साथ कार्य करें, तो वे इस कार्य को कितने दिनों में पूरा करेंगे ?

कुछ लाख वर्ष पहले की बात है जब मनुष्य जंगली था, वनमानुष जैसा उसे नाख़ून की जरुरत थी उसकी जीवन रक्षा के लिए नाख़ून बहुत ज़रूरी थे असल में वही उसके अस्त्र थे दाँत भी थे पर नाख़ून के बाद ही उनका स्थान था उन दिनों उसे झूझना पड़ता था प्रतिद्वन्दियो को पछाड़ना पड़ता था नाख़ून उसके लिए आवश्यक अंग था फिर वह अपने अंग से बाहर की वस्तुओ का सहारा लेने लग। पत्थर के ढेले और पेड़ की डाले काम में लाने लगा (रामचन्द्रजी की वानरी सेना के पास ऐसे ही अस्त्र थे) ! उसने हड्डियों के भी हथियार बनाये! इन हड्डी के हथियार में सबसे मजबूत और सब से ऐतिहासिक था इन्द्र देव का वज्र, जो ऋषि मुनि की हड्डियों से बना था मनुष्य और आगे बढ़ा उसने धातु के हथियार बनाये जिनके पास लोहे के अस्त्र और शस्त्र थे वे विजयी हुए। देवताओ के राजा तक को मनुष्ये के राजा से इसलिए सहायता लेनी पड़ती थी क्यूंकि मनुष्ये के राजा के पास लोहे के अस्त्र थे असुरो के पास अनेक विधाये थी पर लोहे के अस्त्र नहीं थे शायद घोड़े भी नहीं थे आर्यो के पास यह दोनों चीज़े थी आर्ये विजयी हुए फिर इतिहास अपनी गति से बढ़ता गया नाग हारे सुपर्ण हारे यक्ष हारे गन्धर्व हारे असुरे हारे राक्षस हारे लोहे के अस्त्रों ने बाज़ी मार ली इतिहास आगे बढ़ा। पलीते वाली बंदूकों ने, कारतूसों ने, तोपों ने , बमो ने , बम वर्षक वायुयानों ने इतिहास को किस कीचड़ भरे घाट तक घसीटा है यह सबको मालूम है नख धर मनुष्य अब भी बढ़ रहे है अब भी प्रकृति भी मनुष्यो को उसके भीतर वाले अस्त्र से वंचित नहीं कर रही है , अब भी याद दिला देती है के तुम्हारे नाख़ून को भुलाया नहीं जा सकता। तुम वही लाख वर्ष पहले के नख - दंतावलम्वी जीव हो-पशु के साथ ही सतह पर विचरने वाले और चरने वाले। इनमे से किस ऋषि की हड्डियों से हथियार बनाया गया था ?

कुछ लाख वर्ष पहले की बात है जब मनुष्य जंगली था, वनमानुष जैसा उसे नाख़ून की जरुरत थी उसकी जीवन रक्षा के लिए नाख़ून बहुत ज़रूरी थे असल में वही उसके अस्त्र थे दाँत भी थे पर नाख़ून के बाद ही उनका स्थान था उन दिनों उसे झूझना पड़ता था प्रतिद्वन्दियो को पछाड़ना पड़ता था नाख़ून उसके लिए आवश्यक अंग था फिर वह अपने अंग से बाहर की वस्तुओ का सहारा लेने लग। पत्थर के ढेले और पेड़ की डाले काम में लाने लगा (रामचन्द्रजी की वानरी सेना के पास ऐसे ही अस्त्र थे) ! उसने हड्डियों के भी हथियार बनाये! इन हड्डी के हथियार में सबसे मजबूत और सब से ऐतिहासिक था इन्द्र देव का वज्र, जो ऋषि मुनि की हड्डियों से बना था मनुष्य और आगे बढ़ा उसने धातु के हथियार बनाये जिनके पास लोहे के अस्त्र और शस्त्र थे वे विजयी हुए। देवताओ के राजा तक को मनुष्ये के राजा से इसलिए सहायता लेनी पड़ती थी क्यूंकि मनुष्ये के राजा के पास लोहे के अस्त्र थे असुरो के पास अनेक विधाये थी पर लोहे के अस्त्र नहीं थे शायद घोड़े भी नहीं थे आर्यो के पास यह दोनों चीज़े थी आर्ये विजयी हुए फिर इतिहास अपनी गति से बढ़ता गया नाग हारे सुपर्ण हारे यक्ष हारे गन्धर्व हारे असुरे हारे राक्षस हारे लोहे के अस्त्रों ने बाज़ी मार ली इतिहास आगे बढ़ा। पलीते वाली बंदूकों ने, कारतूसों ने, तोपों ने , बमो ने , बम वर्षक वायुयानों ने इतिहास को किस कीचड़ भरे घाट तक घसीटा है यह सबको मालूम है नख धर मनुष्य अब भी बढ़ रहे है अब भी प्रकृति भी मनुष्यो को उसके भीतर वाले अस्त्र से वंचित नहीं कर रही है , अब भी याद दिला देती है के तुम्हारे नाख़ून को भुलाया नहीं जा सकता। तुम वही लाख वर्ष पहले के नख - दंतावलम्वी जीव हो-पशु के साथ ही सतह पर विचरने वाले और चरने वाले। इनमे से किस धातु के बने हथियार मनुष्य के राजा के पास थे, जिस कारणवश देवताओ के राजा को उनसे सहायता माँगनी पड़ती थी?

कुछ लाख वर्ष पहले की बात है जब मनुष्य जंगली था, वनमानुष जैसा उसे नाख़ून की जरुरत थी उसकी जीवन रक्षा के लिए नाख़ून बहुत ज़रूरी थे असल में वही उसके अस्त्र थे दाँत भी थे पर नाख़ून के बाद ही उनका स्थान था उन दिनों उसे झूझना पड़ता था प्रतिद्वन्दियो को पछाड़ना पड़ता था नाख़ून उसके लिए आवश्यक अंग था फिर वह अपने अंग से बाहर की वस्तुओ का सहारा लेने लग। पत्थर के ढेले और पेड़ की डाले काम में लाने लगा (रामचन्द्रजी की वानरी सेना के पास ऐसे ही अस्त्र थे) ! उसने हड्डियों के भी हथियार बनाये! इन हड्डी के हथियार में सबसे मजबूत और सब से ऐतिहासिक था इन्द्र देव का वज्र, जो ऋषि मुनि की हड्डियों से बना था मनुष्य और आगे बढ़ा उसने धातु के हथियार बनाये जिनके पास लोहे के अस्त्र और शस्त्र थे वे विजयी हुए। देवताओ के राजा तक को मनुष्ये के राजा से इसलिए सहायता लेनी पड़ती थी क्यूंकि मनुष्ये के राजा के पास लोहे के अस्त्र थे असुरो के पास अनेक विधाये थी पर लोहे के अस्त्र नहीं थे शायद घोड़े भी नहीं थे आर्यो के पास यह दोनों चीज़े थी आर्ये विजयी हुए फिर इतिहास अपनी गति से बढ़ता गया नाग हारे सुपर्ण हारे यक्ष हारे गन्धर्व हारे असुरे हारे राक्षस हारे लोहे के अस्त्रों ने बाज़ी मार ली इतिहास आगे बढ़ा। पलीते वाली बंदूकों ने, कारतूसों ने, तोपों ने , बमो ने , बम वर्षक वायुयानों ने इतिहास को किस कीचड़ भरे घाट तक घसीटा है यह सबको मालूम है नख धर मनुष्य अब भी बढ़ रहे है अब भी प्रकृति भी मनुष्यो को उसके भीतर वाले अस्त्र से वंचित नहीं कर रही है , अब भी याद दिला देती है के तुम्हारे नाख़ून को भुलाया नहीं जा सकता। तुम वही लाख वर्ष पहले के नख - दंतावलम्वी जीव हो-पशु के साथ ही सतह पर विचरने वाले और चरने वाले। लोहे के अस्त्र तथा घोड़े होने के कारण इनमे से कौन विजयी रहा ?