Home
Class
GUIDANCE
भारत में आजकल सांस्कृतिक कलाकृतियों पर ह...

भारत में आजकल सांस्कृतिक कलाकृतियों पर हमला करना आसान हो गया है | 12 | समानार्थी शब्द | अंग्रेज़ी ...

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

बिहार बोर्ड में TOP करना आखिर क्यों है आसान

निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: आकाश का साफा बाँधकर जानकार सूरज की चिलम खींचता बैठा है पहाड़ घुटनों पर पड़ी है नदी चादर-सी पास ही दहक रही है। पलाश के जंगल की अँगीठी अंधकार दूर पूर्व में सिमटा बैठा है भेड़ों के गल्ले-सा अचानक बोला मोर जैसे किसी ने आवाज दी - 'अजी सुनते हो।' चिलम औंधी धुआँ उठा सूरज डूबा अँधेरा छा गया। कविता में दो समानार्थी शब्द हैं: 1. अंधकार 2. अँधेरा पलाश वन को अँगीठी कहा गया है क्योंकि

निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: आकाश का साफा बाँधकर जानकार सूरज की चिलम खींचता बैठा है पहाड़ घुटनों पर पड़ी है नदी चादर-सी पास ही दहक रही है। पलाश के जंगल की अँगीठी अंधकार दूर पूर्व में सिमटा बैठा है भेड़ों के गल्ले-सा अचानक बोला मोर जैसे किसी ने आवाज दी - 'अजी सुनते हो।' चिलम औंधी धुआँ उठा सूरज डूबा अँधेरा छा गया। कविता में दो समानार्थी शब्द हैं: 1. अंधकार 2. अँधेरा इन दोनों के बारे में कौन-सा कथन सत्य है?

संसार के सभी देशों में शिक्षित व्यक्ति की सबसे पहली पहचान यह होती है। कि वह अपनी मातृभाषा में दक्षता से काम कर सकता है। केवल भारत ही एक ऐसा देश है, जिसमें शिक्षित व्यक्ति वह समझा जाता है, जो अपनी मातृभाषा में दक्ष हो या न हो, किन्तु अंग्रेज़ी में जिसकी दक्षता असंदिग्ध हो। संसार के अन्य देशों में सुसंस्कृत व्यक्ति वह समझा जाता है, जिसके घर में । अपनी भाषा की पुस्तकों का संग्रह हो और जिसे बराबर यह पता रहे कि उसकी भाषा के अच्छे लेखक और कवि कौन हैं तथा समय-समय पर उनकी कौन-सी कृतियाँ प्रकाशित हो रही हैं? भारत में स्थिति दूसरी है। यहाँ घर में प्रायः साज-सज्जा के आधुनिक उपकरण तो होते हैं, किन्तु अपनी भाषा की कोई पुस्तक नहीं होती है। यह दुर्वस्था भले ही किसी ऐतिहासिक प्रक्रिया का परिणाम है, किन्तु वह सुदशा नहीं है दुर्वस्था ही है। इस दृष्टि से भारतीय भाषाओं के लेखक केवल यूरोपीय और अमेरिकी लेखकों से ही हीन नहीं हैं, बल्कि उनकी किस्मत चीन, जापान के लेखकों की किस्मत से भी खराब है, क्योंकि इन सभी लेखकों की कृतियाँ वहाँ के अत्यन्त सुशिक्षित लोग भी पढ़ते हैं। केवल हम ही नहीं हैं, जिनकी पुस्तकों पर यहाँ के तथाकथित शिक्षित समुदाय की दृष्टि प्राय: नहीं पड़ती। हमारा तथाकथित उच्च शिक्षित समुदाय जो कुछ पढ़ना चाहता है, उसे अंग्रेजी में ही । पढ़ लेता है यहाँ तक उसकी कविता और उपन्यास पढ़ने की तृष्णा भी अंग्रेजी की कविता और उपन्यास पढ़कर ही समाप्त हो जाती है और उसे यह जानने की इच्छा नहीं होती कि शरीर से वह जिस समाज का सदस्य है उसके मनोभाव उपन्यास और काव्य में किस अदा से व्यक्त हो रहे हैं। 'संसार' शब्द का समानार्थी शब्द है