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0.022 को किस संख्या से गुणा करें कि गुणनफलन 66 हो जाए? | CLASS 6 | प्रैक्टिस सेट- 19 | MATHS | D...

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If a number multiplied by 25% of itself gives a number which is 200% more than the number, then the number is यदि किसी संख्या को उसके 25% से गुणा करने पर मिलने वाली संख्या उस संख्या से 20% अधिक हो, तो वह संख्या है-

If A = 0.abcabc ....., then by what number A should be multiplied so as to get an intergral value? यदि A = 0.abcabc ....., है, तो A को किस संख्या से गुणा किया जाए ताकि एक पूर्णाक मान ज्ञात हो?

Three numbers are such that if the average of any two of them is added to the third number, the sums obtained are 164, 158 and 132 respectively. What is the average of the original three numbers? तीन संख्याएँ इस प्रकार हैं कि यदि इनमें से किसी भी दो संख्या के औसत को तीसरी संख्या में जोड़ा जाए, तो योगफल क्रमशः 164, 158 और 132 प्राप्त होते हैं | इन तीन आरंभिक संख्याओं का औसत ज्ञात करें |

The average of n number is 36. If each of 75% of the numbers is increased by 6 and each of the remaining numbers is decreased by 9, then the new average of the numbers is: n संख्याओं का औसत 36 है | यदि इन संख्याओं के 75% में से प्रत्येक को 6 से बढ़ा दिया जाए और प्रत्येक शेष संख्या को 9 से कम कर दिया जाए, तो इन संख्याओं का नया औसत क्या होगा ?

When a positive integer is divided by d, the remainder is 15. When ten times of the same number is divided by d, the remainder is 6. The least possible value of d is: जब एक धनात्मक पूर्णाक को d से भाग दिया जाता है, तो शेषफल 15 आता है | जब इसी संख्या के 10 गुना को d से भाग दिया जाता है, तो शेषफल 6 आता है | d का न्यूनतम संभव मान हो सकता है :

Which of the following interchanges of signs and numbers would make the following equation correct? कौन से चिन्हों तथा संख्याओं को आपस में बदल देने से निम्नलिखित समीकरण सही हो जाएगा ? 18 - 8 div 12 xx 6 + 10 = 12 (a) × , ÷ , 12 and 6 (b) +, - , 8 and 10 (c) + , - , 6 and 8 (d) × , -, 18 and 6

राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं में व्यक्तिगत गुणों के अतिरिक्त संगठन में काम करने का गुण भी होना चाहिए। उनमें आज्ञापालन का भाव हो और वे अपने विकारों को राष्ट्रीय इच्छा की वेदी पर न्योछावर कर दें। जो काम हो वह संगठन के साथ। राष्ट्रीय महासभा की आकांक्षाओं का उल्लंघन कभी न किया जाए। यदि सत्य अंत:करण किसी भी तरह न माने तब भी राष्ट्रीय नेता की सम्मति अवश्य ही ले ली जाए। हम यह नहीं कह सकते कि अपने अंत:करण और विचार-शक्ति को बेच दिया जाए. परंतु हम यह अवश्य कहेंगे कि बहुत ही असाधारण अवस्थाओं को छोड़कर हमारे कार्य राष्ट्रीय महासभा के अधीन हों। व्यक्तिगत स्वतंत्रता बड़ी अच्छी चीज है - बड़ी अच्छी और अत्यंत ऊँची - परंतु राष्ट्र की स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए उसे संकुचित कर देना एक ऐसा त्याग है, जिसकी समता नहीं हो सकती, जो सब त्यागों में श्रेष्ठ है। वर्तमान परिस्थितियों में यदि किसी त्याग से तुरंत सफलता मिल सकती है, तो वह यही त्याग है। हमें आशा ही नहीं बल्कि विश्वास है कि जिन उत्साही और त्यागी आत्माओं ने सच्चे हृदय से राष्ट्रीय आहान का उत्तर दिया है, वे इस त्याग को करने में भी समर्थ होंगे। इनमें से किस शब्द में अति उपसर्ग का प्रयोग किया गया है?

राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं में व्यक्तिगत गुणों के अतिरिक्त संगठन में काम करने का गुण भी होना चाहिए। उनमें आज्ञापालन का भाव हो और वे अपने विकारों को राष्ट्रीय इच्छा की वेदी पर न्योछावर कर दें। जो काम हो वह संगठन के साथ। राष्ट्रीय महासभा की आकांक्षाओं का उल्लंघन कभी न किया जाए। यदि सत्य अंत:करण किसी भी तरह न माने तब भी राष्ट्रीय नेता की सम्मति अवश्य ही ले ली जाए। हम यह नहीं कह सकते कि अपने अंत:करण और विचार-शक्ति को बेच दिया जाए. परंतु हम यह अवश्य कहेंगे कि बहुत ही असाधारण अवस्थाओं को छोड़कर हमारे कार्य राष्ट्रीय महासभा के अधीन हों। व्यक्तिगत स्वतंत्रता बड़ी अच्छी चीज है - बड़ी अच्छी और अत्यंत ऊँची - परंतु राष्ट्र की स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए उसे संकुचित कर देना एक ऐसा त्याग है, जिसकी समता नहीं हो सकती, जो सब त्यागों में श्रेष्ठ है। वर्तमान परिस्थितियों में यदि किसी त्याग से तुरंत सफलता मिल सकती है, तो वह यही त्याग है। हमें आशा ही नहीं बल्कि विश्वास है कि जिन उत्साही और त्यागी आत्माओं ने सच्चे हृदय से राष्ट्रीय आहान का उत्तर दिया है, वे इस त्याग को करने में भी समर्थ होंगे। विकारों को किस वेदी पर न्योछावर करना चाहिए?

राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं में व्यक्तिगत गुणों के अतिरिक्त संगठन में काम करने का गुण भी होना चाहिए। उनमें आज्ञापालन का भाव हो और वे अपने विकारों को राष्ट्रीय इच्छा की वेदी पर न्योछावर कर दें। जो काम हो वह संगठन के साथ। राष्ट्रीय महासभा की आकांक्षाओं का उल्लंघन कभी न किया जाए। यदि सत्य अंत:करण किसी भी तरह न माने तब भी राष्ट्रीय नेता की सम्मति अवश्य ही ले ली जाए। हम यह नहीं कह सकते कि अपने अंत:करण और विचार-शक्ति को बेच दिया जाए. परंतु हम यह अवश्य कहेंगे कि बहुत ही असाधारण अवस्थाओं को छोड़कर हमारे कार्य राष्ट्रीय महासभा के अधीन हों। व्यक्तिगत स्वतंत्रता बड़ी अच्छी चीज है - बड़ी अच्छी और अत्यंत ऊँची - परंतु राष्ट्र की स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए उसे संकुचित कर देना एक ऐसा त्याग है, जिसकी समता नहीं हो सकती, जो सब त्यागों में श्रेष्ठ है। वर्तमान परिस्थितियों में यदि किसी त्याग से तुरंत सफलता मिल सकती है, तो वह यही त्याग है। हमें आशा ही नहीं बल्कि विश्वास है कि जिन उत्साही और त्यागी आत्माओं ने सच्चे हृदय से राष्ट्रीय आहान का उत्तर दिया है, वे इस त्याग को करने में भी समर्थ होंगे। यदि अंत:करण सत्य मानने को तैयार न हो, तो किसकी सलाह लेनी चाहिए?

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