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किसी वृत्तीय पथ पर एक समान वेग से गतिमान...

किसी वृत्तीय पथ पर एक समान वेग से गतिमान कण पर लगने वाला अभिकेंद्रीय बल (F ) का मान उस कण के द्र...

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In a stadium an athlete is running on a circular path with uniform speed during a practice session. The angle covered by him during one second is found to be 10^@ by a coach observing him from the centre of the circular track. What would be the measure of angle (in degrees) described by the athlete by an observer standing on the circle? किसी स्टेडियम में एक एथलीट अभ्यास सत्र के दौरान एक समान चाल से वृत्ताकार पथ पर दौड़ रहा है | वृत्ताकार पथ के केंद्र से उसे देख रहे एक कोच की आँखों से उसके ( एथलीट ) द्वारा एक सेकंड में तय किया गया कोण 10. है | वृत्त पर खड़े प्रेक्षक की आँखों से एथलीट द्वारा बनाए गए कोण का माप क्या होगा ?

चुंबकीय क्षेत्र |बायो सावर्ट का नियम |एम्पियर का नियम |टेरोइड एवं परिनालिका के कारण चुंबकीय क्षेत्र |एकसमान चुंबकीय क्षेत्र मे गतिमान आवेश पर बल |साइक्लोट्रॉन |एकसमान चुंबकीय क्षेत्र मे धारावाही चालक पर बल |एकसमान चुंबकीय क्षेत्र मे धारावाही लूप पर बल आघूर्ण |चल कुंडली गैल्वेनोमीटर |Summary

The diameter of a right circular cylinder is decreased to one third of its initial value. If the volume of the cylinder remains the same, then the height becomes how many times of the initial height ? एक लम्ब वृत्तीय बेलन के व्यास को इसके आरंभिक मान से एक तिहाई कम कर दिया जाता है | यदि बेलन का आयतन समान बना रहता है, तो इसकी ऊंचाई अपने आरंभिक मान से कितना गुना हो जाएगी ?

The simple interest on a certain sum at 20% p.a for two years is Rs. 250. What is the compound interest ( compounded annually ) on the same sum at the same rate for the same period ? किसी निश्चित राशि पर 20% प्रतिवर्ष की ब्याज दर से दो वर्षों का साधारण ब्याज रु250 है | समान ब्याज दर पर समान अवधि के लिए समान राशि पर चक्रवृद्धि ब्याज (वार्षिक रूप से संयोजित) कितनी है ?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 16 भाग्यवाद आवरण पाप का और शस्त्र शोषण का जिससे दबाता एक जन भाग दूसरे जन का पूछो किसी भाग्यवादी से यदि विधि अंक प्रबल है, पद पर क्यों देती न स्वयं वसुधा निज रतन उगल है? उपजाता क्यों विभव प्रकृति को सींच-सींच वह जल से क्यों न उठा लेता निज सचित अर्थ पाप के बल से, और भोगता उसे दूसरा भाग्यवाद के छल से। नर समाज का भाग्य एक है वह श्रम, वह भुज-बल है। जिसके सम्मुख झुकी हुई है। पृथ्वी, विनीत नभ-तल है। नर समाज का भाग्य क्या है?

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