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माप की कौन सी प्रणाली विश्व भर में स्वीक...

माप की कौन सी प्रणाली विश्व भर में स्वीकृत है? | 6 | माप और गति | भौतिकी | पी.ई...

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A boat moves downstream at the rate of 1 km in 7 1/2 minutes and upstream at the rate of 5km an hour. What is the speed (in km/hour) of the boat in the still water? एक नौका 7 1/2 मिनट में 1 किमी की गति से निचल प्रवाह में जाती है और 1 घंटे में 5 किमी को ग॒ति से ऊपरी प्रवाह में जाती है। स्थिर जल में नौका की गति (किमी/घंटा में) कितनी होगी?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये पाश्चात्य सभ्यता एवं संस्कृति में बहुत-सी अच्छी बातें होते हुए भी वह मूलतः अधिकार प्रधान, भोग प्रधान है, उसमें अपने सुख की प्रवृति प्रधान है। इसलिए यहाँ प्रधान जोर शरीर-सुख-भोग तथा उसके निमित अगणित साधन जुटाने की ओर है। जबकि भारतीय संस्कृति अनेक बुराइयों के होते हुए भी मुख्यतः धर्म प्रधान, कर्तव्य प्रधान, त्याग और तपस्या प्रवृति-मूलक संस्कृति है। विश्व-मानव या विश्व-मानवता एवं संस्कृति का निर्माण तभी सम्भव है जब मनुष्य अपने शरीर का विचार इस सीमा तक न करे कि उस प्रयत्न में वह आत्मा, वह प्राण ज्योति ही तिरोहित हो जाए जिससे मानव, मानव है। स्पष्टतः भारतीय संस्कृति में, अहिंसक जीवन निर्माण की, दूसरों के लिए जीने की सम्भावनाएँ अधिक होने से गाँधी जी की श्रद्धा थी कि भारतीय संस्कृति ही हमारे जीवन का दीप है और वही विश्व-संस्कृति या विश्व-मानवता की आध रिशिला बन सकती है। परदुःखकातरता से सम्बन्धित कथन है

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये पाश्चात्य सभ्यता एवं संस्कृति में बहुत-सी अच्छी बातें होते हुए भी वह मूलतः अधिकार प्रधान, भोग प्रधान है, उसमें अपने सुख की प्रवृति प्रधान है। इसलिए यहाँ प्रधान जोर शरीर-सुख-भोग तथा उसके निमित अगणित साधन जुटाने की ओर है। जबकि भारतीय संस्कृति अनेक बुराइयों के होते हुए भी मुख्यतः धर्म प्रधान, कर्तव्य प्रधान, त्याग और तपस्या प्रवृति-मूलक संस्कृति है। विश्व-मानव या विश्व-मानवता एवं संस्कृति का निर्माण तभी सम्भव है जब मनुष्य अपने शरीर का विचार इस सीमा तक न करे कि उस प्रयत्न में वह आत्मा, वह प्राण ज्योति ही तिरोहित हो जाए जिससे मानव, मानव है। स्पष्टतः भारतीय संस्कृति में, अहिंसक जीवन निर्माण की, दूसरों के लिए जीने की सम्भावनाएँ अधिक होने से गाँधी जी की श्रद्धा थी कि भारतीय संस्कृति ही हमारे जीवन का दीप है और वही विश्व-संस्कृति या विश्व-मानवता की आध रिशिला बन सकती है। मानव, मानव नहीं रह जाता जब

निम्न में से कौन-सी विशेषता बाज़ार की नहीं है?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये पाश्चात्य सभ्यता एवं संस्कृति में बहुत-सी अच्छी बातें होते हुए भी वह मूलतः अधिकार प्रधान, भोग प्रधान है, उसमें अपने सुख की प्रवृत्ति प्रधान है। इसलिए यहाँ प्रधान शरीर-सुख-भोग तथा उसके निमित्त अगणित साधन जुटाने को और है जबकि भारतीय संस्कृति अनेक बुराइयों के होते हुए भी मुख्यतः धर्म प्रधान, कर्तव्य प्रधान, त्याग और तपस्या प्रवृत्ति-मूलक संस्कृति है। विश्व-मानव या विश्व-मानवता एवं संस्कृति का निर्माण तभी सम्भव है जब मनुष्य अपने शरीर का विचार इस सीमा तक न करे कि उस प्रयत्न में वह आत्मा, वह प्राण ज्योति ही तिरोहित हो जाए जिससे मानव, मानव है। स्पष्टतः भारतीय संस्कृति में, अहिंसक जीवन निर्माण की, दूसरों के लिए जीने की सम्भावनाएँ अधिक होने से गाँधी जी को श्रद्धा थी कि भारतीय संस्कृति ही हमारे जीवन का दीप है और वही विश्व-संस्कृति या विश्व-मानवता की आध रिशिला बन सकती है। इनमें से कौन-सा कथन सत्य है?