यदि दो रेखाएँ प्रतिच्छेद करती है तो सिद्ध कीजिए कि शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं। | 9 | MODEL P...
यदि दो रेखाएँ प्रतिच्छेद करती है तो सिद्ध कीजिए कि शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं। | 9 | MODEL P...
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From a point P outside the circle with centre O, two tangents PA and PB are drawn to meet the circle at A and B respectively. If angle APB=70^@ , then angle OAB is equal to : केंद्र O वाले वृत्त के बाहर स्थित किसी बिंदु P से दो स्पर्श रेखाएं PA और PB खींची जाती हैं जो वृत्त से क्रमशः A और B मिलती हैं | यदि angle APB=70^@ है, तो कोण OAB का मान ज्ञात करें |
हमारे व्यावहारिक अथवा वास्तविक जीवन में भी यही सिद्धांत काम करता है कि हम समाज अथवा लोगों को जो देते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। हम लोगों से प्यार करते हैं तो लोग भी हमें प्यार करते हैं लेकिन यदि हम लोगों से घृणा करते हैं तो वे भी हमसे घृणा ही करेंगे इसमें संदेह नहीं। यदि हम सबके साथ सहयोग करते हैं अथवा ईमानदार बने रहते हैं तो दूसरे भी हमारे प्रति सहयोगात्मक और ईमानदार हो जाते है। इसे आकर्षण का नियम कहा गया है। हम जैसा स्वभाव विकसित कर लेते हैं वैसी ही चीजें हमारी ओर आकर्षित होती हैं। गंदगी मक्खी को आकर्षित करती है तो फूल तितली को आकर्षित करते हैं। यदि हम स्वयं को फूल जैसा सुंदर, सुवासित, मसृण व रंगीन अर्थात सुंदर गुणों से युक्त बना लेंगे तो स्वाभाविक है कि समाज के सुंदर गुणी व्यक्ति हमारी ओर आकर्षित होंगे ही। यदि हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में केवल अच्छे लोग ही आएँ तो हमें स्वयं को उनके अनुरूप बनाना होगा - दुर्गुणों में नहीं, सदगुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल मात्र बाहर से नहीं, मन की गहराइयों में रचयं को सुंदर बनाना होगा। यदि हम बाहरी रुप स्वरुप से नहीं, वरन मन से सुंदर बन पाते है तो विचार और कर्म स्वयं सुंदर हो जाएंगे। जीवन रूपी सितार ठीक बजने लगेगा। जीवन के प्रति सत्यम् शिवम् और सुंदरम् का आकर्षण बढ़ने लगेगा। हमारे व्यवहार और कार्य स्वयं ठीक से हो जाएंगे यदि हम
हमारे व्यावहारिक अथवा वास्तविक जीवन में भी यही सिद्धांत काम करता है कि हम समाज अथवा लोगों को जो देते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। हम लोगों से प्यार करते हैं तो लोग भी हमें प्यार करते हैं लेकिन यदि हम लोगों से घृणा करते हैं तो वे भी हमसे घृणा ही करेंगे इसमें संदेह नहीं। यदि हम सबके साथ सहयोग करते हैं अथवा ईमानदार बने रहते हैं तो दूसरे भी हमारे प्रति सहयोगात्मक और ईमानदार हो जाते है। इसे आकर्षण का नियम कहा गया है। हम जैसा स्वभाव विकसित कर लेते हैं वैसी ही चीजें हमारी ओर आकर्षित होती हैं। गंदगी मक्खी को आकर्षित करती है तो फूल तितली को आकर्षित करते हैं। यदि हम स्वयं को फूल जैसा सुंदर, सुवासित, मसृण व रंगीन अर्थात सुंदर गुणों से युक्त बना लेंगे तो स्वाभाविक है कि समाज के सुंदर गुणी व्यक्ति हमारी ओर आकर्षित होंगे ही। यदि हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में केवल अच्छे लोग ही आएँ तो हमें स्वयं को उनके अनुरूप बनाना होगा - दुर्गुणों में नहीं, सदगुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल मात्र बाहर से नहीं, मन की गहराइयों में रचयं को सुंदर बनाना होगा। यदि हम बाहरी रुप स्वरुप से नहीं, वरन मन से सुंदर बन पाते है तो विचार और कर्म स्वयं सुंदर हो जाएंगे। जीवन रूपी सितार ठीक बजने लगेगा। जीवन के प्रति सत्यम् शिवम् और सुंदरम् का आकर्षण बढ़ने लगेगा। फूल के लिए कौन-सा विशेषण ul(" अनुपयुक्त ") है?
हमारे व्यावहारिक अथवा वास्तविक जीवन में भी यही सिद्धांत काम करता है कि हम समाज अथवा लोगों को जो देते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। हम लोगों से प्यार करते हैं तो लोग भी हमें प्यार करते हैं लेकिन यदि हम लोगों से घृणा करते हैं तो वे भी हमसे घृणा ही करेंगे इसमें संदेह नहीं। यदि हम सबके साथ सहयोग करते हैं अथवा ईमानदार बने रहते हैं तो दूसरे भी हमारे प्रति सहयोगात्मक और ईमानदार हो जाते है। इसे आकर्षण का नियम कहा गया है। हम जैसा स्वभाव विकसित कर लेते हैं वैसी ही चीजें हमारी ओर आकर्षित होती हैं। गंदगी मक्खी को आकर्षित करती है तो फूल तितली को आकर्षित करते हैं। यदि हम स्वयं को फूल जैसा सुंदर, सुवासित, मसृण व रंगीन अर्थात सुंदर गुणों से युक्त बना लेंगे तो स्वाभाविक है कि समाज के सुंदर गुणी व्यक्ति हमारी ओर आकर्षित होंगे ही। यदि हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में केवल अच्छे लोग ही आएँ तो हमें स्वयं को उनके अनुरूप बनाना होगा - दुर्गुणों में नहीं, सदगुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल मात्र बाहर से नहीं, मन की गहराइयों में रचयं को सुंदर बनाना होगा। यदि हम बाहरी रुप स्वरुप से नहीं, वरन मन से सुंदर बन पाते है तो विचार और कर्म स्वयं सुंदर हो जाएंगे। जीवन रूपी सितार ठीक बजने लगेगा। जीवन के प्रति सत्यम् शिवम् और सुंदरम् का आकर्षण बढ़ने लगेगा। लेखक द्वास 'आकर्षण का नियम किसे कहा गया है?
In triangle ABC , the perpendiculars drawn from A, B and C meet the opposite sides at D, E and F, respectively. AD, BE and CF intersect at point P. If angle EPD= 116^@ and the bisectors of angle A and angle B meet at Q, then the measure of angle AQB is : त्रिभुज ABC में,A, B तथा C से खींचे गए लम्ब सामने की भुजाओं पर क्रमशः D, E और F पर मिलते हैं | AD, BE और CF बिंदु P पर प्रतिच्छेद करते हैं | यदि angle EPD= 116^@ है और कोण A तथा कोण B के समद्विभाजक Q पर मिलते हैं , तो कोण AQB का मान ज्ञात करें |
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चिह्नित कीजिए: हमारे व्यावहारिक अथवा वास्तविक जीवन में भी यही सिद्धांत काम करता है कि हम समाज अथवा लोगों को जो देते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। हम लोगों से प्यार करते हैं तो लोग भी हमें प्यार करते हैं। लेकिन यदि हम लोगों से घृणा करते हैं तो वे भी हमसे घृणा ही करेंगे इसमें संदेह नहीं। यदि हम सबके सथ सहयोग करते हैं अथवा ईमानदार बने रहते हैं तो दूसरे भी हमारे प्रति सहयोगात्मक और ईमानदार हो जाते हैं। इसे आकर्षण का नियम कहा गया है। हम जैसा स्वभाव विकसित कर लेते हैं वैसी ही चीजें हमारी ओर आकर्षित होती हैं। गंदगी मक्खी को आकर्षित करती है, तो फूल तितली को आकर्षित करते हैं। यदि हम स्वयं को फूल जैसा सुंदर, सुवासित, मसृण व रंगीन अर्थात् सुंदर गुणों से युक्त बना लेंगे तो स्वाभाविक है कि समाज के सुंदर गुणी व्यक्ति हमारी ओर आकर्षित होंगे ही। यदि हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में केवल अच्छे लोग ही आएँ तो हमें स्वयं को उनके अनुरूप बनाना होगा - दुर्गुणों में नहीं, सदगुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल बाहर से नहीं, मन की गहराईयों में स्वयं को सुंदर बनाना होगा। यदि हम बाहरी रूप-स्वरूप से नहीं, वरन मन से सुंदर बन पाते हैं तो विचार और कर्म स्वयं सुंदर हो जाएँगे। जीवन रूपी सितार ठीक बजने लगेगा। जीवन के प्रति सत्यम्, शिवम् और सुंदरम् का आकर्षण बढ़ने लगेगा। फूल और तितली का उदाहरण देकर लेखक सिद्ध करना चाहता है कि
In the given figure, O is the centre of the circle. Its two chords AB and CD intersect each other at the point P within the circle. If AB = 15 cm, PB = 9 cm, CP = 3 cm, then find the length of PD. दी गयी आकृति में, Oवृत्त का केंद्र है। इसकी दो जीवाएँ AB और CD एक-दूसरे को वृत्त के भीतर बिंदु P पर प्रतिच्छेद करती हैं। यदि AB =15 सेमी, PB = 9 सेमी, CP = 3 सेमी है, तो PD की लंबाई ज्ञात कीजिए।
Two chords AB and CD of a circle with centre O intersect each other at P If angle APC=95^@ and angle AOD=110^@ , then what angle BOC is: केंद्र O वाले एक वृत्त की दो जीवाएँ AB तथा CD हैं जो एक-दूसरे को P पर प्रतिच्छेद करती हैं | यदि angle APC=95^@ तथा angle AOD=110^@ है ,तो angle BOC का मान क्या होगा ?
If a regular polygon has each of its angles equal to 3/5 times of two right angles, then the number of sides is यदि किसी सम बहुभुज के प्रत्येक कोण, दो समकोण के 3/5 गुना के बराबर है, तो भुजाओं की संख्या है-
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- यदि P(A)=(3)/(8),P(B)=(1)/(2),P(AcapB)=(1)/(4)," तो "P(A//B)=
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