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मोलरता को परिभाषित करें तथा इसका सूत्र भ...

मोलरता को परिभाषित करें तथा इसका सूत्र भी लिखें। | कक्षा 12 | समाधान | रसायन शास्त्र | संशय

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Amit and Sunil together can complete a work in 9 days, Sunil and Dinesh together can complete the same work in 12days, and Amit and Dinesh together can complete the same work in 18 days. In how many days will they complete the work if Amit, Sunil and Dinesh work together? / अमित और सुनील एक साथ किसी कार्य को 9 दिनों में पूरा कर सकते हैं | सुनील तथा दिनेश एक साथ इस कार्य को 12 दिनों में पूरा कर सकते हैं तथा अमित और दिनेश इस कार्य को एक साथ 18 दिनों में पूरा कर सकते हैं | यदि अमित, सुनील तथा दिनेश एक साथ कार्य करें, तो वे इस कार्य को कितने दिनों में पूरा करेंगे ?

One side of a rhombus is 6.5 cm and one of it’s diagonal is 12 cm. What is the area of the rhombus? किसी समचतुर्भुज की एक भुजा 6.5 सेमी की है तथा इसका एक विकर्ण 12 सेमी का है | इस समचतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात करें |

इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है युवक चित्त को सबसे अधिक प्रभावित जिस शास्त्र ने किया है, वह है

इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान नवीन तथ्यों के साथ किसका सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता?

इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है 'अनायास' में प्रयुक्त उपसर्ग है

इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है 'अंजाम' शब्द है

Sudha bought 80 articles at the same price. She sold some of them at 8% profit remaining at 12% loss resulting in an overall profit of 6%. The number of items sold at 8% profit is: सुधा ने समान कीमत पर 80 वस्तुओं को क्रय किया | उसने उनमें से कुछ को 8% लाभ पर तथा शेष को 12% हानि पर बेचा जिसके परिणामस्वरूप कुल 6% का लाभ हुआ | 8% लाभ पर बेची गयी वस्तुओं की संख्या ज्ञात करें|

इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को

इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है मनोविज्ञान का सन्धि विच्छेद है

इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है