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पेट्रोलियम के तीन घटकों के नाम बताइये। |...

पेट्रोलियम के तीन घटकों के नाम बताइये। | कक्षा 8 | कोयला और पेट्रोलियम | रसायन शास्त्र | संशय

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पिछली कक्षा में हमने सीखा|ऑक्सीकरण अभिक्रिया|क्यों जलते हुए पदार्थ ज्वाला उत्पन्न करते हैं अथवा नहीं करते हैं?|कोयले तथा पेट्रोलियम का निर्माण|कार्बनिक यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म|प्रतिस्थापन अभिक्रिया

The total number of students in class A and B is 96. The number of students in A is 40% more than that in B. The average weight (in kg) of the students in B is 50% more than that of the students in A. If the average weight of all the students in A and B taken together is 58 kg, then what is the average weight of the students in B? कक्षा A और कक्षा B के कुल छात्रों की संख्या 96 है | A के छात्रों की संख्या B के छात्रों से 40% अधिक है | B कक्षा के छात्रों का औसत वज़न A के छात्रों के औसत वज़न से 50% अधिक है | यदि A और B दोनों के छात्रों का कुल औसत वज़न 58 किलो ग्राम है, तो B के छात्रों का औसत वज़न ज्ञात करें |

इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है युवक चित्त को सबसे अधिक प्रभावित जिस शास्त्र ने किया है, वह है

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