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Trick रसायन के लिए बहुत जरूरी है तत्वो Periodicity For 11th NEET , IIT JEE | Vikram HAP Chemistry

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26 जनवरी - Happy Republic Day ? 12th बोर्ड 2024 के सभी छात्रों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी By Vikram Sir

निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेशः मैंने चाँटा मारा था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ : लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समय है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश : माँ, पढूँगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आउँगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश : अब रहने दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाउँगा। कोई आएं तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो - "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में...." माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। 'बहुत निकट आना' के लिए मुहावरा है-

कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेश: मैंने चाँटा मारा था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ : लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समय है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश : माँ, पढूंगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आऊंगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश : अब रहने दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाऊंगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो – “अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में...." माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। 'बहुत निकट आना' के लिए मुहावरा है

माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेशः मैंने चाँटा मारा, था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समया है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है * या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश: माँ, पढूँगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आउँगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा-होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश-: अब रहने-दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाउँगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो - "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में....'' माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। 'बहुत निकट आना' के लिए मुहावरा है ।

अभी भी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि आधुनिक कही जाने वाली आज की दुनिया आखिर कैसे संचालित हो रही है। हालाँकि हरेक देश के पास इसकी कोई-न-कोई आधिकारिक व्याख्या ज़रूर है कि वे कैसे और किन सन्दर्भो में आधुनिक हो रहे हैं। लेकिन इस बारे में मेरा कहना है कि आधुनिकता को समझने के लिए जरूरी है कि आप अपने अन्दर झाँक सकें। इससे आपको पता चलेगा कि आधुनिकता की राह पर बढ़ने के लिए समाज को किन चीजों की जरूरत होती है। बेशक, आज हर कोई मॉडर्न होना चाहता है, लेकिन आधुनिकता की राह उतनी स्पष्ट नहीं है, जितनी वह मानी जाती है। इसीलिए मैं यह बात बार-बार कहता हूँ कि पश्चिमी समाज कभी-कभी आधुनिक नहीं रहे। पश्चिम के पास एकमात्र उल्लेखनीय चीज़ है साइन्स, जिसमें उसने तरक्की की लेकिन जिम साइंटिस्टों के बलबूते वहाँ आधुनिकता का परचम लहराया जाता है, खुद वे साइंटिस्ट अपने कल्चर में उलझे रहते हैं। उनका यह कल्चर आधुनिकता का झण्डाबरदार है। यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उनके कल्चर पर दूसरी संस्कृतियों और लोकाचारों का असर नहीं हुआ होगा। अगर यह असर हुआ है तो सिर्फ वही आधुनिक क्यों कहा जाए ? लेखक के अनुसार आधुनिक होने के लिए क्या जरूरी है?

अभी भी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि आधुनिक कही जाने वाली आज की दुनिया आखिर कैसे संचालित हो रही है। हालाँकि हरेक देश के पास इसकी कोई-न-कोई आधिकारिक व्याख्या ज़रूर है कि वे कैसे और किन सन्दर्भो में आधुनिक हो रहे हैं। लेकिन इस बारे में मेरा कहना है कि आधुनिकता को समझने के लिए जरूरी है कि आप अपने अन्दर झाँक सकें। इससे आपको पता चलेगा कि आधुनिकता की राह पर बढ़ने के लिए समाज को किन चीजों की जरूरत होती है। बेशक, आज हर कोई मॉडर्न होना चाहता है, लेकिन आधुनिकता की राह उतनी स्पष्ट नहीं है, जितनी वह मानी जाती है। इसीलिए मैं यह बात बार-बार कहता हूँ कि पश्चिमी समाज कभी-कभी आधुनिक नहीं रहे। पश्चिम के पास एकमात्र उल्लेखनीय चीज़ है साइन्स, जिसमें उसने तरक्की की लेकिन जिम साइंटिस्टों के बलबूते वहाँ आधुनिकता का परचम लहराया जाता है, खुद वे साइंटिस्ट अपने कल्चर में उलझे रहते हैं। उनका यह कल्चर आधुनिकता का झण्डाबरदार है। यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उनके कल्चर पर दूसरी संस्कृतियों और लोकाचारों का असर नहीं हुआ होगा। अगर यह असर हुआ है तो सिर्फ वही आधुनिक क्यों कहा जाए ? लेखक ने किस बात की अस्पष्टता की ओर संकेत किया है?

अभी भी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि आधुनिक कही जाने वाली आज की दुनिया आखिर कैसे संचालित हो रही है। हालाँकि हरेक देश के पास इसकी कोई-न-कोई आधिकारिक व्याख्या ज़रूर है कि वे कैसे और किन सन्दर्भो में आधुनिक हो रहे हैं। लेकिन इस बारे में मेरा कहना है कि आधुनिकता को समझने के लिए जरूरी है कि आप अपने अन्दर झाँक सकें। इससे आपको पता चलेगा कि आधुनिकता की राह पर बढ़ने के लिए समाज को किन चीजों की जरूरत होती है। बेशक, आज हर कोई मॉडर्न होना चाहता है, लेकिन आधुनिकता की राह उतनी स्पष्ट नहीं है, जितनी वह मानी जाती है। इसीलिए मैं यह बात बार-बार कहता हूँ कि पश्चिमी समाज कभी-कभी आधुनिक नहीं रहे। पश्चिम के पास एकमात्र उल्लेखनीय चीज़ है साइन्स, जिसमें उसने तरक्की की लेकिन जिम साइंटिस्टों के बलबूते वहाँ आधुनिकता का परचम लहराया जाता है, खुद वे साइंटिस्ट अपने कल्चर में उलझे रहते हैं। उनका यह कल्चर आधुनिकता का झण्डाबरदार है। यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उनके कल्चर पर दूसरी संस्कृतियों और लोकाचारों का असर नहीं हुआ होगा। अगर यह असर हुआ है तो सिर्फ वही आधुनिक क्यों कहा जाए ? लेखक इस गद्यांश में क्या कहना चाहता है?

अभी भी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि आधुनिक कही जाने वाली आज की दुनिया आखिर कैसे संचालित हो रही है। हालाँकि हरेक देश के पास इसकी कोई-न-कोई आधिकारिक व्याख्या ज़रूर है कि वे कैसे और किन सन्दर्भो में आधुनिक हो रहे हैं। लेकिन इस बारे में मेरा कहना है कि आधुनिकता को समझने के लिए जरूरी है कि आप अपने अन्दर झाँक सकें। इससे आपको पता चलेगा कि आधुनिकता की राह पर बढ़ने के लिए समाज को किन चीजों की जरूरत होती है। बेशक, आज हर कोई मॉडर्न होना चाहता है, लेकिन आधुनिकता की राह उतनी स्पष्ट नहीं है, जितनी वह मानी जाती है। इसीलिए मैं यह बात बार-बार कहता हूँ कि पश्चिमी समाज कभी-कभी आधुनिक नहीं रहे। पश्चिम के पास एकमात्र उल्लेखनीय चीज़ है साइन्स, जिसमें उसने तरक्की की लेकिन जिम साइंटिस्टों के बलबूते वहाँ आधुनिकता का परचम लहराया जाता है, खुद वे साइंटिस्ट अपने कल्चर में उलझे रहते हैं। उनका यह कल्चर आधुनिकता का झण्डाबरदार है। यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उनके कल्चर पर दूसरी संस्कृतियों और लोकाचारों का असर नहीं हुआ होगा। अगर यह असर हुआ है तो सिर्फ वही आधुनिक क्यों कहा जाए ? 'साइंटिस्टों' शब्द इस ओर संकेत करता है कि

अभी भी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि आधुनिक कही जाने वाली आज की दुनिया आखिर कैसे संचालित हो रही है। हालाँकि हरेक देश के पास इसकी कोई-न-कोई आधिकारिक व्याख्या ज़रूर है कि वे कैसे और किन सन्दर्भो में आधुनिक हो रहे हैं। लेकिन इस बारे में मेरा कहना है कि आधुनिकता को समझने के लिए जरूरी है कि आप अपने अन्दर झाँक सकें। इससे आपको पता चलेगा कि आधुनिकता की राह पर बढ़ने के लिए समाज को किन चीजों की जरूरत होती है। बेशक, आज हर कोई मॉडर्न होना चाहता है, लेकिन आधुनिकता की राह उतनी स्पष्ट नहीं है, जितनी वह मानी जाती है। इसीलिए मैं यह बात बार-बार कहता हूँ कि पश्चिमी समाज कभी-कभी आधुनिक नहीं रहे। पश्चिम के पास एकमात्र उल्लेखनीय चीज़ है साइन्स, जिसमें उसने तरक्की की लेकिन जिम साइंटिस्टों के बलबूते वहाँ आधुनिकता का परचम लहराया जाता है, खुद वे साइंटिस्ट अपने कल्चर में उलझे रहते हैं। उनका यह कल्चर आधुनिकता का झण्डाबरदार है। यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उनके कल्चर पर दूसरी संस्कृतियों और लोकाचारों का असर नहीं हुआ होगा। अगर यह असर हुआ है तो सिर्फ वही आधुनिक क्यों कहा जाए ? हर देश ने

अभी भी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि आधुनिक कही जाने वाली आज की दुनिया आखिर कैसे संचालित हो रही है। हालाँकि हरेक देश के पास इसकी कोई-न-कोई आधिकारिक व्याख्या ज़रूर है कि वे कैसे और किन सन्दर्भो में आधुनिक हो रहे हैं। लेकिन इस बारे में मेरा कहना है कि आधुनिकता को समझने के लिए जरूरी है कि आप अपने अन्दर झाँक सकें। इससे आपको पता चलेगा कि आधुनिकता की राह पर बढ़ने के लिए समाज को किन चीजों की जरूरत होती है। बेशक, आज हर कोई मॉडर्न होना चाहता है, लेकिन आधुनिकता की राह उतनी स्पष्ट नहीं है, जितनी वह मानी जाती है। इसीलिए मैं यह बात बार-बार कहता हूँ कि पश्चिमी समाज कभी-कभी आधुनिक नहीं रहे। पश्चिम के पास एकमात्र उल्लेखनीय चीज़ है साइन्स, जिसमें उसने तरक्की की लेकिन जिम साइंटिस्टों के बलबूते वहाँ आधुनिकता का परचम लहराया जाता है, खुद वे साइंटिस्ट अपने कल्चर में उलझे रहते हैं। उनका यह कल्चर आधुनिकता का झण्डाबरदार है। यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उनके कल्चर पर दूसरी संस्कृतियों और लोकाचारों का असर नहीं हुआ होगा। अगर यह असर हुआ है तो सिर्फ वही आधुनिक क्यों कहा जाए ? पश्चिमी समाज कभी-कभी आधुनिक नहीं रहे।' लेखक ने ऐसा क्यो कहा होगा?