परिचय|खाद्यान्न फसलें|व्यावसायिक फसलें|कृषि की समस्याएँ|जल संसाधन
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खाद्य फसले|अखाद्य फसलें|तकनीकी और संस्थागत सुधार|भूदान|खाद्य सुरक्षा|कृषि पर वैश्वीकरण का प्रभाव
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आर्थिक क्रिया के प्रकार |कृषि के प्रकार |मुख्य फसलें |कृषि का विकास |OMR
Revision|परिचय|प्राकृतिक संसाधन|हमें संसाधनों के प्रबंधन की आवश्यकता क्यों पड़ती है??|OMR
परिचय|क्षार धातुओं के साथ समानताएँ|हैलोजन के साथ समानताएँ|हाइड्रोजन के समस्थानिक|उपलब्धता|बनाने की विधियाँ|प्रयोगशाला विधि|जल से|धातुओं पर जल की क्रिया द्वारा|धातु हाइड्राईडो की जल के साथ क्रिया द्वारा|जल के विद्युत अपघटन द्वारा|धातुओं पर क्षारों की क्रिया द्वारा|बॉस की विधि द्वारा|भौतिक गुण|OMR|Summary
दोहरान |मृदा में अन्तः स्त्रवण दर |मृदा में नमी |मृदा द्वारा जल का अवशोषण |मृदा एवं फसलें |सारांश
चेन्नई में आई बाढ़ अब उतार पर है। इस त्रासदी से निबटने में इस शहर ने जिस साहस का परिचय दिया, जिस तरह से सोशल मीडिया ने एक बार फिर बचाव के काम में अहम् किरदार निभाया, बल्कि कुछ मामलों में तो जान बचाने में भी उसकी भूमिका रही, इसे देखते हुए उसकी जितनी तारीफ की जाए, वह कम है। इन तमाम अच्छी बातों के बावजूद इस वास्तविकता को भी नहीं झुठलाया जा सकता कि इस त्रसादी से बचा जा सकता था। चेन्नई में आई बाढ़ की असली वजह थी अडयार नदी-बेसिन का नए हवाई अड्डे के लिए अतिक्रमण। ठीक उसी तरह, जैसे दूसरे नदी विस्तारों का आवासीय निर्माण के लिए प्रयोग कर लिया गया है। नदी के कुदरती रास्तों को अवरुद्ध किए जाने से इसका जल आस-पास के इलाकों में उमड़ गया। जब तक प्रकृति अपना क्रोध नहीं दिखाती, हमारे योजनाकार हर जोखिम को नजरअन्दाज करते रहते हैं और उस चीज की तलाश में रहते हैं, जिसे वे ले सकते हैं। हमने इसी तरह का विध्वंसक सैलाब मुम्बई में भी देखा। कुछ ही समय पहले श्रीनगर में भी ऐसी ही बरबादी देखी। हर जगह मुख्य वजह मिली-अनियोजित शहरीकरण और बुनियादी नियमों की अनदेखी। फिर भी हर बार त्रासदी की गम्भीरता लोगों की यादों में धुंधली पड़ जाती है। चेन्नई की तरह दिल्ली में भी ऐसे सैलाब की सम्भावना है। इसलिए हमें यमुना नदी के बेसिन से छेड़छाड़ करने की 'बुद्धिमानी' से बचना होगा। "अपनी 'बुद्धिमानी' का परिचय देते हुए"-यहाँ 'बुद्धिमानी' से लेखक का मन्तव्य है
चेन्नई में आई बाढ़ अब उतार पर है। इस त्रासदी से निबटने में इस शहर ने जिस साहस का परिचय दिया, जिस तरह से सोशल मीडिया ने एक बार फिर बचाव के काम में अहम किरदार निभाया, बल्कि कुछ मामलों में तो जान बचाने में भी उसकी भूमिका रही, इसे देखते हुए उसकी जितनी तारीफ की जाए, वह कम है। इन तमाम अच्छी बातों के बावजूद इस वास्तविकता को भी नहीं झूठलाया जा सकता कि इस त्रासदी से बचा जा सकता था। चेन्नई में आई बाढ़ की असली वजह थी अडयार नदी-बेसिन का नए हवाई अड्डे के लिए अतिक्रमण। ठीक उसी तरह, जैसे दूसरे नदी विस्तारों का आवासीय निर्माण के लिए इस्तेमाल कर लिया गया है। नदी के कुदरती रास्तों को अवरूद्ध किए जाने से इसका जल आसपास के इलाकों में उमड़ गया। जब तक प्रकृति अपना क्रोध नहीं दिखाती, हमारे योजनाकार हर जोखिम को नजरअंदाज़ करते रहते हैं और उस चीज की तलाश में रहते हैं, जिसे वे ले सकते हैं। हमने इसी तरह का विध्वंसक सैलाब मुंबई में भी देखा। कुछ समय पहले श्रीनगर में भी ऐसी ही बर्बादी देखी। हर जगह मुख्य वजह मिली। अनियोजित शहरीकरण और बुनियादी नियमों की अनदेखीं। फिर भी हर बार त्रासदी की गंभीरता लोगों की यादों में धुंधली पड़ जाती है। चेनई की तरह दिल्ली में भी ऐसे सैलाब की संभावना है। इसलिए हमें यमुना नदी के बेसिन से छेड़छाड़ करने की 'बुद्धिमानी' से बचना होगा। "अपनी 'बुद्धिमानी' का परिचय देते हुए"- यहाँ 'बुद्धिमानी' से लेखक का मंतव्य है
इतिहास भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन |भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण केंद्र |भूगोल जल संसाधन बाँध |कृषि चावल एवं गेहूँ के प्रमुख क्षेत्र |बड़े उत्पादक राज्य
जल संसाधन |जल दुर्लभता एवं उसके कारण |जल की गुणवत्ता में कमी |बाँधबहुउदेशिय परियोजना |बाँध से नुक़सान |वर्षा जल संग्रहण |बास ड्रिप सिंचाई