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आप समतल दर्पण में अपना प्रतिबिम्ब देखते ...

आप समतल दर्पण में अपना प्रतिबिम्ब देखते हैं। इस प्रकार बने प्रतिबिम्ब की दो विशेषताएँ बताइए। | कक्षा ...

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गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। लोक कथाएँ आम जीवन में सदियों से रची-बसी हैं। इन में हम भूमिका निभाते हैं। अगर हम अपनी पढ़ी हुई लोक कथाओं को याद करें तो सहजता से हमें इनके कई उदाहरण मिल जाते हैं। जब हम कहानी सुना रहे होते हैं तो बच्चों से हमारी यह अपेक्षा रहती है कि वे पहली घटी घटनाओं को जरूर दोहराएँ। बच्चे भी घटना को याद रखते हुए साथ-साथ मजे से दोहराते हैं। इस तरह कथा सुनाने की इस प्रक्रिया में बच्चे इन घटनाओं को एक क्रम में रख कर देखते हैं। इन क्रमिक घटनाओं में एक तर्क होता है जो बच्चों के मनोभावों से मिलता-जुलता है। लोक कथाओं में किस परिवेश की महक की बात की गई है?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। लोक कथाएँ आम जीवन में सदियों से रची-बसी हैं। इन में हम भूमिका निभाते हैं। अगर हम अपनी पढ़ी हुई लोक कथाओं को याद करें तो सहजता से हमें इनके कई उदाहरण मिल जाते हैं। जब हम कहानी सुना रहे होते हैं तो बच्चों से हमारी यह अपेक्षा रहती है कि वे पहली घटी घटनाओं को जरूर दोहराएँ। बच्चे भी घटना को याद रखते हुए साथ-साथ मजे से दोहराते हैं। इस तरह कथा सुनाने की इस प्रक्रिया में बच्चे इन घटनाओं को एक क्रम में रख कर देखते हैं। इन क्रमिक घटनाओं में एक तर्क होता है जो बच्चों के मनोभावों से मिलता-जुलता है। 'कहानी की क्रमिक घटनाओं में एक तर्क होता है जो बच्चों के मनोभावों से मिलता-जुलता है।' वाक्य किस ओर संकेत करता है?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। लोक कथाएँ आम जीवन में सदियों से रची-बसी हैं। इन में हम भूमिका निभाते हैं। अगर हम अपनी पढ़ी हुई लोक कथाओं को याद करें तो सहजता से हमें इनके कई उदाहरण मिल जाते हैं। जब हम कहानी सुना रहे होते हैं तो बच्चों से हमारी यह अपेक्षा रहती है कि वे पहली घटी घटनाओं को जरूर दोहराएँ। बच्चे भी घटना को याद रखते हुए साथ-साथ मजे से दोहराते हैं। इस तरह कथा सुनाने की इस प्रक्रिया में बच्चे इन घटनाओं को एक क्रम में रख कर देखते हैं। इन क्रमिक घटनाओं में एक तर्क होता है जो बच्चों के मनोभावों से मिलता-जुलता है। लोक कथाओं में शामिल है

हरलीन कौर चौथी कक्षा की छात्रा है। उसकी मातृभाषा पंजाबी है। इस कारणवश वह हिन्दी भाषा के प्रयोग में गलतियाँ करती है। इस अशुद्धि को किस प्रकार दूर किया जा सकता है?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। एक धनी युवक संत के पास यह पूछने के लिए गया कि उसे अपने जीवन में क्या करना चाहिए। संत उसे कमरे की खिड़की तक ले गए और उससे पूछा, "तुम्हें काँच के परे क्या दिख रहा है?" "सड़क पर लोग आ-जा रहे हैं और एक-बेचारा गरीब व्यक्ति भीख मांग रहा है। इसके बाद संत ने उसे एक बड़ा दर्पण दिखाया और पूछा, "अब इस दर्पण में देखकर बताओ कि तुम क्या देखते हो।" "इसमें मैं स्वयं को देख रहा हूँ" "ठीक है, दर्पण से तुम दूसरों को नहीं देख सकते। तुम जानते हो कि खिड़की में लगा काँच और यह दर्पण एक ही मूल पदार्थ से बने हैं। तुम स्वंय की तुलना काँच के इस दोनों रूपों से करके देखो। जब यह साधारण है तो तुम्हें सभी दिखते हैं और उन्हें देखकर तुम्हारे भीतर करूणा जागती है और जब इस काँच पर चाँदी का लेप हो जाता है, तो तुम केवल स्वयं को देखने लगते हो" "तुम्हारा जीवन भी तभी महत्त्वपूर्ण बनेगा जब तुम अपनी आँखों पर लगी चाँदी की परत को उतार दो आप अपनी आँखों पर लगी चाँदी की परत को उतार दो।" इस वाक्य का निहितार्थ है

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। एक धनी युवक संत के पास यह पूछने के लिए गया कि उसे अपने जीवन में क्या करना चाहिए। संत उसे कमरे की खिड़की तक ले गए और उससे पूछा, "तुम्हें काँच के परे क्या दिख रहा है?" "सड़क पर लोग आ-जा रहे हैं और एक-बेचारा गरीब व्यक्ति भीख मांग रहा है। इसके बाद संत ने उसे एक बड़ा दर्पण दिखाया और पूछा, "अब इस दर्पण में देखकर बताओ कि तुम क्या देखते हो।" "इसमें मैं स्वयं को देख रहा हूँ" "ठीक है, दर्पण से तुम दूसरों को नहीं देख सकते। तुम जानते हो कि खिड़की में लगा काँच और यह दर्पण एक ही मूल पदार्थ से बने हैं। तुम स्वंय की तुलना काँच के इस दोनों रूपों से करके देखो। जब यह साधारण है तो तुम्हें सभी दिखते हैं और उन्हें देखकर तुम्हारे भीतर करूणा जागती है और जब इस काँच पर चाँदी का लेप हो जाता है, तो तुम केवल स्वयं को देखने लगते हो" "तुम्हारा जीवन भी तभी महत्त्वपूर्ण बनेगा जब तुम अपनी आँखों पर लगी चाँदी की परत को उतार दो अब इस दर्पण में देखकर बताओ कि तुम क्या देखते हो।" यह वाक्य है

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। एक धनी युवक संत के पास यह पूछने के लिए गया कि उसे अपने जीवन में क्या करना चाहिए। संत उसे कमरे की खिड़की तक ले गए और उससे पूछा, "तुम्हें काँच के परे क्या दिख रहा है?" "सड़क पर लोग आ-जा रहे हैं और एक-बेचारा गरीब व्यक्ति भीख मांग रहा है। इसके बाद संत ने उसे एक बड़ा दर्पण दिखाया और पूछा, "अब इस दर्पण में देखकर बताओ कि तुम क्या देखते हो।" "इसमें मैं स्वयं को देख रहा हूँ" "ठीक है, दर्पण से तुम दूसरों को नहीं देख सकते। तुम जानते हो कि खिड़की में लगा काँच और यह दर्पण एक ही मूल पदार्थ से बने हैं। तुम स्वंय की तुलना काँच के इस दोनों रूपों से करके देखो। जब यह साधारण है तो तुम्हें सभी दिखते हैं और उन्हें देखकर तुम्हारे भीतर करूणा जागती है और जब इस काँच पर चाँदी का लेप हो जाता है, तो तुम केवल स्वयं को देखने लगते हो" "तुम्हारा जीवन भी तभी महत्त्वपूर्ण बनेगा जब तुम अपनी आँखों पर लगी चाँदी की परत को उतार दो दर्पण में हम दूसरों को नहीं देख सकते।" इस वाक्य का निहितार्थ हैं