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एल्यूमिना से शुद अल्युमिनियम प्राप्त करन...

एल्यूमिना से शुद अल्युमिनियम प्राप्त करने की विधि का सचित्र वर्णन कीजिये इसके दो मूक मिश्र धातुओ...

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Sunita invested Rs. 12,000 on simple interest at the rate of 10% per annum to obtain a total amount of Rs.20,400 after a certain period. For how many years did she invest to obtain the above amount सुनीता ने 10% प्रति वर्ष साधारण ब्याज की दर से एक निश्चित अवधि के बाद कुल 20,400 रुपये का मिश्रधन प्राप्त करने के लिए 12,000 रुपये निवेश किये। उपरोक्त मिश्रधन प्राप्त करने के लिए उसने कितने वर्षों तक निवेश किया था?

Study the given histogram that shows the marks obtained by students in an examination and answer the question that follows: दिए गए हिस्टोग्राम का अध्ययन करें जो एक परीक्षा में छात्रों द्वारा प्राप्त किए गए अंकों को दिखाता है और निम्न प्रश्न का उत्तर दे| The number of students who obtained less than 250 marks is what percent more than the number of student who obtained 400 or more marks ?(correct to one decimal place) 250 से कम अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या 490 या अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र की संख्या से कितने प्रतिशत अधिक है? (एक दशमलव तक)

Study the given histogram that shows the marks obtained by students in an examination and answer the questions that follow दिए गए हिस्टोग्राम का अध्ययन करें जो एक परीक्षा में छात्रों द्वारा प्राप्त किए गए अंकों को दिखाता है और आने वाले प्रश्नों का उत्तर ज्ञात करे| The number of students who obtained less than 350 marks is what percent more than the number of students who obtained 400 or more marks?(correct to one decimal place ) 350 से कम अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या 400 या अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या की तुलना में प्रतिशत अधिक है| (एक दशमलव स्थान तक )

हमारा जीवन जिन मानवीय सिद्धांतों, अनुभवों और सांस्कृतिक संस्कारों के संबल से समस्त सृष्टि के लिए महत्त्वपूर्ण बना है, परोपकार की भावना उन्हीं में एक है। मानव को दूसरे मानव के प्रति वैसा ही संवेदनात्मक उत्तरदायित्व निभाना चाहिए, जैसे वह स्वयं के प्रति निभाता है। जीवन को केवल परोपकार, पर सेवा और निःस्वार्थ प्रेम के लिए ही वास्तविक समझना चाहिए क्योंकि नश्वर शरीर जब नष्ट हो जाएगा तो उसके बाद हमारा कुछ भी इस दुनिया के जीवों की स्मृति में नही रहेगा। हम जग जीवों की स्मृति में सदा-सदा के लिए तभी बने रह सकते हैं, जब हम अपने नश्वर शरीर को वैचारिक, बौद्धिक और आत्मिक चेतना से पूर्ण कर निःस्वार्थ भाव से स्वयं को जीव सेवा में समर्पित करेंगे। हमें स्थिरता से और शांतिपूर्वक यह विचार करते रहना चाहिए कि हमारे जीवन का सर्वश्रेष्ठ उद्देश्य और एकमात्र लक्ष्य हमारे द्वारा किया जाने वाला त्याग है। त्याग योग्य व्यक्तित्व प्राप्त करने के लिए गहन तप की आवश्यकता है। त्याग का भाव किसी मनुष्य में साधारण होते हुए नही जन्म लेता। इसके लिए मनुष्य को जीवन-जगत और इसके जीवों के संबंध में असाधारण वैचारिक रचनात्मकता अपनाकर निरंतर योग, ध्यान, तप व साधना करनी होगी। उसे इस स्थिति से विचरते हुए विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभवों से लैस होना होगा। आवश्यकता होने पर उसे जीवों की वास्तविक सेवा करनी होगी। जब ऐसी विशेष मानवीय परिस्थितियों उत्पन्न होंगी, तब ही मानव में त्याग भाव आकार ग्रहण करेगा। त्याग के योग्य व्यक्तित्व प्राप्त करने के लिए आवश्यक है