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मिट्टी किससे बनी होती है? | कक्षा 11 | म...

मिट्टी किससे बनी होती है? | कक्षा 11 | मिट्टी | भूगोल | संशय

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कक्षा 11th की अहमियत कितनी है

कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। सदियों की ठंडी-बुझी राख सुगबुगा उठी मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है, दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो सिहासन खाली करो कि जनता आती है। जनता, हाँ, मिट्टी की अबोध मूरतें वहीं, जाड़े-पाले की कसक सदा सहने वाली जब अंग-अंग में लगे साँप हों चूस रहे, तब भी न कभी मुँह खोल दर्द कहने वाली। 'साँप' किसकी ओर संकेत करता है?

कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। सदियों की ठंडी-बुझी राख सुगबुगा उठी मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है, दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो सिहासन खाली करो कि जनता आती है। जनता, हाँ, मिट्टी की अबोध मूरतें वहीं, जाड़े-पाले की कसक सदा सहने वाली जब अंग-अंग में लगे साँप हों चूस रहे, तब भी न कभी मुँह खोल दर्द कहने वाली। "सिहासन खाली करो कि जनता आती है।" पंक्ति का भाव है-

कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। सदियों की ठंडी-बुझी राख सुगबुगा उठी मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है, दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो सिहासन खाली करो कि जनता आती है। जनता, हाँ, मिट्टी की अबोध मूरतें वहीं, जाड़े-पाले की कसक सदा सहने वाली जब अंग-अंग में लगे साँप हों चूस रहे, तब भी न कभी मुँह खोल दर्द कहने वाली। वाक्य में किस जनता की ओर संकेत किया गया है?

कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। सदियों की ठंडी-बुझी राख सुगबुगा उठी मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है, दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो सिहासन खाली करो कि जनता आती है। जनता, हाँ, मिट्टी की अबोध मूरतें वहीं, जाड़े-पाले की कसक सदा सहने वाली जब अंग-अंग में लगे साँप हों चूस रहे, तब भी न कभी मुँह खोल दर्द कहने वाली। सामान्य जनता ने अब तक बहुत कष्ट सहे हैं- इस भाव को व्यक्त करने वाली पंक्ति है