जल की एकसमान आवेशित 64 बूंदें मिलकर एक बड़ी बूँद बनाती हैं। यदि प्रत्येक छोटी बूँद पर आवेश 2.0 न...
जल की एकसमान आवेशित 64 बूंदें मिलकर एक बड़ी बूँद बनाती हैं। यदि प्रत्येक छोटी बूँद पर आवेश 2.0 न...
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In a circle two equal and parallel chords are 6 cm apart and lie on the opposite sides of the centre of the circle.If the length of each chord is 8 cm, than the radius of the circle is: एक वृत्त में दो बराबर और समान्तर जीवाएँ 6 cm के दुरी पर हैं और वृत्त के केंद्र के विपरीत भाग पर स्थित हैं। यदि प्रत्येक जीवाएँ की लंबाई 8 सेमी है, तो वृत्त की त्रिज्या है:
सुप्रसिद्ध गीतकार गोपालदास 'नीरज' ने अपनी एक रचना में कहा है: जैसे हो आघात रे वैसा बजे सितार तेरी ही आवाज़ की प्रतिध्वनि है संसार हम वाद्ययंत्रों पर जैसा आघात करते हैं वैसी ही ध्वनि उनसे निकलती है। यदि कठोरता से आघात करते हैं तो कठोर ध्वनि उत्पन्न होती है, लेकिन यदि कोमलता से आघात करते हैं तो कर्णप्रिय कोमल ध्वनि उत्पन्न होती है। यदि हम किसी वाद्ययंत्र को नियमपूर्वक ठीक से बजाते हैं तो सही राग उत्पन्न होता है, अन्यथा सही राग उत्पन्न होने का प्रश्न ही नहीं उठता है | सही राग उत्पन्न न होने के स्थिति में गुणीजन हमारे गायन अथवा वादन की ओर आकर्षित ही नहीं होंगे। हमारे जीवन रूपी सितार की भी यही स्थिति होती है। यदि हम अनुशासन में रहते हुए प्रत्येक कार्य नियमानुसार करते हैं तो जीवन रूपी सितार से उत्पन्न होने वाला प्रत्येक राग रूपी कार्य हमें सार्थकता और आनंद ही प्रदान करेगा। इस संसार में हम जो कुछ सोचते, कहते अथवा करते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। न कम, न अधिका जब हम किसी खंडहर अथवा यादी में कोई अच्छा शब्द या वाक्य बोलते हैं तो कुछ देर बाद वही अच्छा शब्द या वाक्य गूंजता हुआ हमें सुनाई पड़ता है और यदि हम कोई बुरा, अपमानजनक अथवा घृणास्पद शब्द या वाक्य बोलते हैं तो कुछ देर बाद वही बुर, अपमानजनक अथवा घृणास्पद शब्द या वाक्य हमें सुनाई पड़ता है। यदि हम सुरीली आवाज निकालते हैं तो वैसी ही सुरीली आवाज लौटकर हमारे पास आती है, लेकिन यदि हम डरावनी आवाज निकालते हैं तो वैसी ही डरावनी आवाज लौटकर आती है। हम जैसा एक बार बोलते हैं वैसा ही कई बार सुनने को अभिशप्त होते हैं। पर यह बात अनुभव करते हुए भी इसका आशय हम समझते नहीं। चूंकि आवाज के लौटकर आने में थोड़ा वक्त लगता है, इसलिए हम उसे स्वतंत्र घटना मान लेते हैं। यह अहसास नहीं कर पाते कि हमारे ही किए हुए काज, हमारे ही सोचे हुए भाव अलग दिशा में हमारे पास आते दिख रहे हैं। 'यदि कोई अच्छा शब्द या वाक्य बोलते हैं तो...' की कर्मवाच्य में रचना होगी
Two successive discounts, each of x% on the marked price of the article, are equal to a single discount of Rs. 331.20. If the marked price of the article is Rs. 920, then the value of x is: वस्तु के अंकित मूल्य पर x% प्रत्येक की दो क्रमिक छूटें 331.20 रुपये की एकल छूट के बराबर हैं। यदि वस्तु का अंकित मूल्य 920 रुपये है, तो x का मान कितना होगा?
The length of the two, parallel sides of a trapezium are 28 cm and 40 cm. If the length of each of its other two sides be 12 cm,then the area (in cm^2 ) of the trapezium is- एक समलंब की दो समांतर भुजाओं की लंबाई 28 सेमी और 40 सेमी हैं। यदि इसकी अन्य दो भुजाओं में प्रत्येक की लंबाई 12 सेमी हो, तो समलंब का क्षेत्रफल ( सेमी^2 में) क्या होगा?
सुप्रसिद्ध गीतकार गोपालदास 'नीरज' ने अपनी एक रचना में कहा है। जैसा हो आघात रे वैसा बजे सितार, तेरी ही आवाज को प्रतिध्वनि है संसारा हम वाद्ययंत्रों पर जैसा आघात करते हैं वैसी ही ध्वनि उनसे निकलती है। यदि कठोरता से आघात करते हैं तो कठोर ध्वनिः उत्पन्न होती है, लेकिन यदि कोमलता से आघात करते हैं तो कर्णप्रिय कोमल ध्वनि उत्पन्न होती है। यदि हम किसी वाद्ययंत्र को । नियमपूर्वक ठीक से बजाते हैं तो सही राग उत्पन्न होता है, अन्यथा सही राग उत्पन्न होने का प्रश्न ही नहीं उठता। सही राग उत्पन्न न होने की स्थिति में गुणीजन हमारे गायन अथवा वादन की ओर आकर्षित ही नहीं होंगे। हमारे जीवन रूपी सितार की भी यही स्थिति - होती है। यदि हम अनुशासन में रहते हुए प्रत्येक कार्य नियमानुसार करते हैं तो जीवन रूपी सितार से उत्पन्न होने वाला प्रत्येक राग रूपी कार्य हमें सार्थकता और आनंद ही प्रदान करेगा। इस संसार में हम जो कुछ सोचते, की '' है " वहीं हमारे पास लौटकर आता है। न कम, न अधिक। जब हम किसी खंडहर अथवा वादी में कोई अच्छा शब्द या वाक्य बोलते हैं तो कुछ देर बाद वही अच्छा शब्द या वाक्य गँजता हुआ हमें सुनाई पड़ता है। और यदि हम कोई बुरा, अपमानजनक अथवा घृणास्पद शब्द या वाक्य बोलते हैं तो कुछ देर बाद वही बुरा, अपमानजनक नि अथवा घृणास्पद शब्द या वाक्य हमें सुनाई पड़ता है। यदि हम उ सुरीली आवाज निकालते हैं तो वैसी ही सुरीली आवाज लौटकर हा हमारे पास आती है, लेकिन यदि हम डरावनी आवाज निकालते हैं सं तो वैसी ही डरावनी आवाज लौटकर आती है। हम जैसा एक बार बोलते हैं। वैसा ही कई बार सुनने को अभिशप्त होते हैं। पर यह बात अनुभव करते हुए भी इसका आशय हम समझते नहीं। चूँकि आवाज के लौटकर आने में थोड़ा वक्त लगता है, इसलिए हम उसे स्वतंत्र घटना मान लेते हैं। यह अहसास नहीं कर पाते कि हमारे ही किए हुए काज, हमारे ही सोचे हुए भाव अलग दिशा से हमारे पास आते दिख रहे हैं। यदि कोई अच्छी शब्द या वाक्य बोलते हैं तो..' की कर्मवाच्य में रचना होगी -
सुप्रसिद्ध गीतकार गोपालदास 'नीरज' ने अपनी एक रचना में कहा है: जैसे हो आघात रे वैसा बजे सितार तेरी ही आवाज़ की प्रतिध्वनि है संसार हम वाद्ययंत्रों पर जैसा आघात करते हैं वैसी ही ध्वनि उनसे निकलती है। यदि कठोरता से आघात करते हैं तो कठोर ध्वनि उत्पन्न होती है, लेकिन यदि कोमलता से आघात करते हैं तो कर्णप्रिय कोमल ध्वनि उत्पन्न होती है। यदि हम किसी वाद्ययंत्र को नियमपूर्वक ठीक से बजाते हैं तो सही राग उत्पन्न होता है, अन्यथा सही राग उत्पन्न होने का प्रश्न ही नहीं उठता है | सही राग उत्पन्न न होने के स्थिति में गुणीजन हमारे गायन अथवा वादन की ओर आकर्षित ही नहीं होंगे। हमारे जीवन रूपी सितार की भी यही स्थिति होती है। यदि हम अनुशासन में रहते हुए प्रत्येक कार्य नियमानुसार करते हैं तो जीवन रूपी सितार से उत्पन्न होने वाला प्रत्येक राग रूपी कार्य हमें सार्थकता और आनंद ही प्रदान करेगा। इस संसार में हम जो कुछ सोचते, कहते अथवा करते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। न कम, न अधिका जब हम किसी खंडहर अथवा यादी में कोई अच्छा शब्द या वाक्य बोलते हैं तो कुछ देर बाद वही अच्छा शब्द या वाक्य गूंजता हुआ हमें सुनाई पड़ता है और यदि हम कोई बुरा, अपमानजनक अथवा घृणास्पद शब्द या वाक्य बोलते हैं तो कुछ देर बाद वही बुर, अपमानजनक अथवा घृणास्पद शब्द या वाक्य हमें सुनाई पड़ता है। यदि हम सुरीली आवाज निकालते हैं तो वैसी ही सुरीली आवाज लौटकर हमारे पास आती है, लेकिन यदि हम डरावनी आवाज निकालते हैं तो वैसी ही डरावनी आवाज लौटकर आती है। हम जैसा एक बार बोलते हैं वैसा ही कई बार सुनने को अभिशप्त होते हैं। पर यह बात अनुभव करते हुए भी इसका आशय हम समझते नहीं। चूंकि आवाज के लौटकर आने में थोड़ा वक्त लगता है, इसलिए हम उसे स्वतंत्र घटना मान लेते हैं। यह अहसास नहीं कर पाते कि हमारे ही किए हुए काज, हमारे ही सोचे हुए भाव अलग दिशा में हमारे पास आते दिख रहे हैं। प्रत्यय की दृष्टि से उस शब्द को पहचानिए जो शेष शब्दों से भिन्न हो।
0.1 percent of 1.728 xx 10^6 spherical droplets of water, each of diameter 2 mm, coalesce to form a spherical bubble. What is the diameter (in cm ) of the bubble ?/ 1.728 xx 10^6 पानी की 1.728 xx 10^6 गोलाकार बून्दें, जिनमें से प्रत्येक का व्यास 2 मिमी है, उन का 0.1 प्रतिशत, एक साथ मिलकर एक गोलाकार बुलबुला बनाते हैं। इस बुलबुले का व्यास (सेमी में) क्या है? 1.728 xx 10^6
"A solid cube has side 8 cm. It is cut along diagonals) of top face to get 4 equal parts.What is the total surface area (in cm^2 ) of each part? एक ठोस घन की भुजा 8 से.मी. हैं वह ऊपर सतह के विकर्णों पर 4 समान भागों में काय जाता है। प्रत्येक भाग का कूल पृष्ठीय क्षेत्रफल ( से.मी.^2 में) क्या है?
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