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कोई विलयनअंडे के पिसे हुए कवच सेअभिक्रिय...

कोई विलयनअंडे के पिसे हुए कवच सेअभिक्रियाकर एकगैस उत्पन्नकरता है जो चुने के पानी को दूधियाकर देत...

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Priya, Dinesh, Mahi, Chetan, Jay, Bravo, Amit and Alok are sitting around a circle facing the centre. Bravo is third to the right of Mahi and second to the left of Alok. Chetan is not an immediate neighbour of Mahi or Alok. Jay is on the immediate right of Priya, who is second to the right of Amit.Who sits to the immediate right of Alok? प्रिया, दिनेश, माहि, चेतन, जय, ब्रावो, अमित और आलोक किसी गोल मेज के चारो तरफ केंद्र की ओर मुख करके बैठे हुए हैं | ब्रावो, माहि के दायें को तीसरा तथा आलोक के बाएं को दूसरा है | चेतन, माहि तथा आलोक का पड़ोसी नहीं है | जय, प्रिया के तुरंत दायें को है, जो अमित के दायें को दूसरी है | आलोक के तुरंत दायें को कौन बैठा/बैठी है ?

जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह । क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार को इस स्वीकृति को मनुष्यों ही का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया । गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह समर्पण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप न नहीं कर.सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने । के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बन जाता है। जब व्यक्ति स्वयं के प्रति किए गए अन्याय, शोषण के विरुद्ध आवाज नहीं उठाता तो

गिरते हुए जीवन उठने का ढोंग रचते हुए अपने मन को उत्थान का विश्वास भले ही दे लें, परंतु वे संसार की दृष्टि में धूल नहीं डाल सकते और उत्थान के व्यापक कार्यक्रम को धोखा नहीं दे सकते। उनके अस्तित्व पर जो अखर अंकित होंगे, आशा और कर्मण्यता की भावनाओं से भरी हुई शिराओं को उनसे कोई विशेष संदेश कदापि न मिलेगा। देश के नाम पर काम किया जाता है, स्वार्थ-त्याग की दुहाइयाँ दी जाती हैं, गिरे हुए लोगों को उठाने की ध्वनि अलापी जाती हैं, अत्याचारियों को कोसा जाता है और निरंकुशों पर दाँत पीसे जाते हैं, परंतु इन खिलाड़ियों के हदय-पट पर विस्मृति एक बड़ा ही मनोहर पट डाल दिया करती है। हल्के रंग के उड़ते ही जब गहरे रंग की बारी आती है, तब खिलाड़ी लोग अपने-अपने नकाबों को उतार डालते हैं। जो सौजन्य और शिष्टता की मूर्ति थे, जो देशभक्ति और त्याग के अवतार और तपस्या के रूप थे, जो प्रभुओं के उपेखक और दासों के दास थे. आँखें आश्चर्य से देखती हैं कि वे अशिष्टता और स्वार्थ के मैदान में सरपट दौड़ लगा रहे हैं। गालियाँ और बुराइयाँ उनके मुँह और कलेजे के भूषण हो जाती हैं। नेक-नियती केवल उन्हीं के पल्ले रहती है और बेईमानी का कलंक दूसरों के माथे पर। खूब दौड़ लगाते हैं। खूब एड़ी और चोटी का पसीना एक कर देते हैं, परंतु देश की किसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए नहीं, अपने को प्रतिष्ठित और शक्तिशाली बनाने के लिए। निरंकुशों को गालियाँ देते हैं. परंतु स्वयं निरंकुशता का दम भरते हैं। 'गालियाँ और बुराइयाँ उनके मुँह और कलेजे के भूषण हो जाती हैं', यह वाक्य किसके लिए कहा गया है?

गिरते हुए जीवन उठने का ढोंग रचते हुए अपने मन को उत्थान का विश्वास भले ही दे लें, परंतु वे संसार की दृष्टि में धूल नहीं डाल सकते और उत्थान के व्यापक कार्यक्रम को धोखा नहीं दे सकते। उनके अस्तित्व पर जो अखर अंकित होंगे, आशा और कर्मण्यता की भावनाओं से भरी हुई शिराओं को उनसे कोई विशेष संदेश कदापि न मिलेगा। देश के नाम पर काम किया जाता है, स्वार्थ-त्याग की दुहाइयाँ दी जाती हैं, गिरे हुए लोगों को उठाने की ध्वनि अलापी जाती हैं, अत्याचारियों को कोसा जाता है और निरंकुशों पर दाँत पीसे जाते हैं, परंतु इन खिलाड़ियों के हदय-पट पर विस्मृति एक बड़ा ही मनोहर पट डाल दिया करती है। हल्के रंग के उड़ते ही जब गहरे रंग की बारी आती है, तब खिलाड़ी लोग अपने-अपने नकाबों को उतार डालते हैं। जो सौजन्य और शिष्टता की मूर्ति थे, जो देशभक्ति और त्याग के अवतार और तपस्या के रूप थे, जो प्रभुओं के उपेखक और दासों के दास थे. आँखें आश्चर्य से देखती हैं कि वे अशिष्टता और स्वार्थ के मैदान में सरपट दौड़ लगा रहे हैं। गालियाँ और बुराइयाँ उनके मुँह और कलेजे के भूषण हो जाती हैं। नेक-नियती केवल उन्हीं के पल्ले रहती है और बेईमानी का कलंक दूसरों के माथे पर। खूब दौड़ लगाते हैं। खूब एड़ी और चोटी का पसीना एक कर देते हैं, परंतु देश की किसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए नहीं, अपने को प्रतिष्ठित और शक्तिशाली बनाने के लिए। निरंकुशों को गालियाँ देते हैं. परंतु स्वयं निरंकुशता का दम भरते हैं। उत्थान का विश्वास अपने मन को कौन देता है?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भाँति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह स्मरण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किंतु कुछ लोग अंधकार को स्वीकार करने से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत् उपक्रम बन जाता है। जब व्यक्ति स्वयं के प्रति किए गए अन्याय, शोषण के विरुद्ध आवाज नहीं उठाता तो ।

गिरते हुए जीवन उठने का ढोंग रचते हुए अपने मन को उत्थान का विश्वास भले ही दे लें, परंतु वे संसार की दृष्टि में धूल नहीं डाल सकते और उत्थान के व्यापक कार्यक्रम को धोखा नहीं दे सकते। उनके अस्तित्व पर जो अखर अंकित होंगे, आशा और कर्मण्यता की भावनाओं से भरी हुई शिराओं को उनसे कोई विशेष संदेश कदापि न मिलेगा। देश के नाम पर काम किया जाता है, स्वार्थ-त्याग की दुहाइयाँ दी जाती हैं, गिरे हुए लोगों को उठाने की ध्वनि अलापी जाती हैं, अत्याचारियों को कोसा जाता है और निरंकुशों पर दाँत पीसे जाते हैं, परंतु इन खिलाड़ियों के हदय-पट पर विस्मृति एक बड़ा ही मनोहर पट डाल दिया करती है। हल्के रंग के उड़ते ही जब गहरे रंग की बारी आती है, तब खिलाड़ी लोग अपने-अपने नकाबों को उतार डालते हैं। जो सौजन्य और शिष्टता की मूर्ति थे, जो देशभक्ति और त्याग के अवतार और तपस्या के रूप थे, जो प्रभुओं के उपेखक और दासों के दास थे. आँखें आश्चर्य से देखती हैं कि वे अशिष्टता और स्वार्थ के मैदान में सरपट दौड़ लगा रहे हैं। गालियाँ और बुराइयाँ उनके मुँह और कलेजे के भूषण हो जाती हैं। नेक-नियती केवल उन्हीं के पल्ले रहती है और बेईमानी का कलंक दूसरों के माथे पर। खूब दौड़ लगाते हैं। खूब एड़ी और चोटी का पसीना एक कर देते हैं, परंतु देश की किसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए नहीं, अपने को प्रतिष्ठित और शक्तिशाली बनाने के लिए। निरंकुशों को गालियाँ देते हैं. परंतु स्वयं निरंकुशता का दम भरते हैं। गद्यांश के अनुसार खिलाड़ी वास्तव में कैसे हैं?