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पृथ्वी से दूर जाते हुए तारे से निकले हुए...

पृथ्वी से दूर जाते हुए तारे से निकले हुए प्रकाश का आभासी तरंगदैर्घ्य इसके वास्तविक तरंगदैर्घ्य क...

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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 3 वह आता दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता। पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक चल रहा लकुटिया टेक मुट्टी भर दाने को ... भूख मिटाने को मुँह फटी पुरानी झोली का फैलाता दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता। साथ दो बच्चे भी हैं सदा हाथ फैलाए बाएँ से वे मलते हुए पेट को चलते और दाहिना दया दृष्टि पाने की ओर बढ़ाए। भूख से सूख ओंठ जब जाते दाता-भाग्य-विधाता से क्या पाते? घूँट आँसुओं के पीकर रह जाते। चाट रहे जूठी पत्तल वे सभी सड़क पर खड़े हुए और झपट लेने को उनसे कुत्ते भी हैं अड़े हुए। इस पद्यांश का शीर्षक होगा

Introducing a boy, Ritika said, 'This is the son of the only son of my father.' So how is Ritika related to that boy's mother? एक लड़के से परिचय कराते हुए रितिका ने कहा 'यह मेरे पिता के इकलौते पुत्र का पुत्र है|| तो रितिका का उस लड़के की माँ से क्या संबंध है ?

सम्भव है, जो एक निर्बल अधीन राष्ट्र पर शासन करते हैं, उनमें न चाहते हुए भी गलत काम करने की प्रवृत्ति पाई जाती है। उसी तरह ऐसे अध्यापक होते हैं जो बच्चों के ऊपर अपने प्रभुत्व का शिकार हो जाते हैं। जो शासन के अयोग्य होते हैं, उन्हें न केवल कमजोर लोगों पर अन्याय करते हुए कोई अपराध-बोध नहीं होता, बल्कि ऐसा करने में उन्हें एक खास तरह का मजा मिलता है। बच्चे अपनी माँ की गोद में कमजोर, असहाय और अज्ञानी होते हैं। माता के हृदय में स्थित प्रचुर प्यार ही उनकी रक्षा की एकमात्र गारण्टी होता है। इसके बावजूद हमारे घरों में इस बात के उदाहरण कम नहीं कि कैसे हमारे स्वाभाविक प्यार पर धीरज का अभाव और उद्धत प्राधिकार विजय प्राप्त कर लेते हैं और बच्चों को अनुचित कारणों से दण्डित होना पड़ता है। कौन-सा शब्द समूह शेष शब्द समूहों से भिन्न है ?

सम्भव है, जो एक निर्बल अधीन राष्ट्र पर शासन करते हैं, उनमें न चाहते हुए भी गलत काम करने की प्रवृत्ति पाई जाती है। उसी तरह ऐसे अध्यापक होते हैं जो बच्चों के ऊपर अपने प्रभुत्व का शिकार हो जाते हैं। जो शासन के अयोग्य होते हैं, उन्हें न केवल कमजोर लोगों पर अन्याय करते हुए कोई अपराध-बोध नहीं होता, बल्कि ऐसा करने में उन्हें एक खास तरह का मजा मिलता है। बच्चे अपनी माँ की गोद में कमजोर, असहाय और अज्ञानी होते हैं। माता के हृदय में स्थित प्रचुर प्यार ही उनकी रक्षा की एकमात्र गारण्टी होता है। इसके बावजूद हमारे घरों में इस बात के उदाहरण कम नहीं कि कैसे हमारे स्वाभाविक प्यार पर धीरज का अभाव और उद्धत प्राधिकार विजय प्राप्त कर लेते हैं और बच्चों को अनुचित कारणों से दण्डित होना पड़ता है। 'इत' प्रत्यय से बनने वाला शब्द है