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रेनॉल्ड संख्या क्या है ? उसका महत्व बताइ...

रेनॉल्ड संख्या क्या है ? उसका महत्व बताइये । | 12 | तरलो के यांत्रिक गुण- II | PHYSICS | NAVBODH...

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In a school 4/9 of the number of students are girls and the rest are boys 3/5 of the number of boys are below 12 years of age and 5/12 of the number of girls are 12 years or above 12 years of age. If the number of students below 12 years of age is 480, then 5/18 of the total number of students in the school will be equal to: एक विद्यालय में, छात्रो कौ कुल संख्या का 4/9 लडकियाँ और बाकी लडके है। लडको की कुल संख्या का 3/5 , 12 साल से कम है, और लडकियो की संख्या का 5/12 ,12 साल या उससे अधिक है। यदि 12 साल, से कम आयु के छात्रो की संख्या 480 है, तो स्कूल में छात्रो की कुल संख्या का 5/18 निम्न में से किसके बराबर है?

The following table shows the number of students of 7 college participating in extra curricular activities: निम्न सारणी उन कॉलेजों के छात्रों की संख्या दर्शाती है, जो पाठ्येत्तर क्रियाकलापों में भाग लेते हैं। Read the table and answer the following question. तालिका पढ़ें और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। Percentage of the number of students in activity II to that of IV is क्रियाकलाप II में छात्रों की संख्या का क्रियाकलाप IV में छात्रों की संख्या के साथ प्रतिशत है-

The sum of the squares of 3 natural numbers is 1029, and they are in the proportion 1:2:4. The difference between greatest number and the smallest number is: 3 प्राकृतिक संख्याओं के वर्गों का जोड़ 1029 है तथा वे 1: 2 : 4 के अनुपात में हैं | सबसे बड़ी संख्या तथा सबसे छोटी संख्या के बीच क्या अंतर है ?

जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। गद्यांश के आधार पर कहा जा सकता है कि

जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। गद्यांश में आदर्श विद्यार्थी के किन गुणों की चर्चा की गई है?

The following table shows the number of students of 7 college participating in extra curricular activities: निम्न सारणी उन कॉलेजों के छात्रों की संख्या दर्शाती है, जो पाठ्येत्तर क्रियाकलापों में भाग लेते हैं। Read the table and answer the following question. तालिका पढ़ें और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। The ratio of total number of students in II and I is क्रियाकलाप II तथा I में छात्रों की कुल संख्या का अनुपात है-

जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। मानव जीवन की रीढ़ की हड्डी विद्यार्थी जीवन को क्यों माना जाता है?

जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। गद्यांश में 'वृक्ष किसे कहा गया है?