Revision|विकास एवं वर्गीकरण |विकासीय सम्बन्ध खोजन |समजात अंग |समरूप अंग |जीवाश्म |जीवाश्म कितने पुराने है |विकास के चरण |OMR
Revision|विकास एवं वर्गीकरण |विकासीय सम्बन्ध खोजन |समजात अंग |समरूप अंग |जीवाश्म |जीवाश्म कितने पुराने है |विकास के चरण |OMR
Similar Questions
Explore conceptually related problems
Revision|अनुवांशिक, मेंडल के नियम, जेव विकास और जाती उद्भव, जीवाश्म |दीर्घ प्रश्न|लघु प्रश्न|वस्तुनिष्ठ, सही मिलान, खाली स्थान, एक वाक्य |OMR
जीवन की उत्तपत्ति एवं मिलर का प्रयोग |विकास के प्रमाण |शारीरिकी व आकारिकी के आधार पर समजात अंग |समरूप अंग |OMR
परिचय |आवर्त सारणी का विकास |मेंडलिफ़ की आवर्त सारणी के दोष |आधुनिक आवर्त सारणी |आधुनिक आवर्त नियम |आवर्तों का विवरण |तत्वों का वर्गीकरण |विकर्ण संबंध |आवर्तिता |परिरक्षण प्रभाव एवं नाभिकीय आवेश |OMR|सारांश
सभ्यता के पुराने दस्तावेज के रूप में खण्डहरों व भूमिगत सामग्रियों को देखा जाता है। जब व्यक्ति अपने आपको सामाजिक जीवन में ढालने लगा, तब से वह समय एकता में प्रदर्शित होता है। इस प्रदर्शन की सीमा को हड़प्पा व मोहनजोदडो से प्राप्त वस्तुओं से जान सकते हैं उनकी अभिव्यक्ति रहन-सहन, मोहरों, सिक्कों एवं बने-बनाए पक्के व अधपके खिलौनों से जान सकते हैं। उनकी धार्मिक भावना के रूप में कुण्ड की प्राप्ति हुई है, जिससे उनकी धार्मिक संवेदनाओं को जान सकते हैं। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं में ढहती सभ्यताओं की कहानी, जमीन में धंसे समय के काल को खोद कर देख सकते हैं। इससे इतिहास की टूटी कड़ियों का पता चलता है। इससे यह भी पता चलता है कि कैसे नगरीय सभ्यता के स्थान पर ग्रामीण सभ्यता का विकास होता है। यह वैदिक युग में हुआ और इसी सभ्यता में भाषा की उपलब्धि हासिल हुई, जिसको संस्कृत के रूप में जाना जाता है। वैदिक युग में मानव ने जंगल से निकल ग्रामीण संस्कृति का निर्माण किया तथा समाज ने प्राकृतिक रूपों को ही अपने इष्ट के रूप में स्वीकारा, जिसकी अभिव्यक्ति ऋग्वेद के रूप में मिलती है। भाषा की यह वृत्ति केवल भारतभूमि पर ही सम्भव नहीं हुई, बल्कि विश्व के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलती है। संस्कृत भाषा की प्राथमिक जीवित रचना के रूप में ऋग्वेद का शास्त्रीय संस्कृत भाषा का सम्बन्ध है। संस्कृत भाषा अपनी समस्त स्थितियों में प्रयुक्त बहुल भाषा है, परन्तु वेदों में जो रूप प्रयुक्त हुए हैं, उनमें बाद के दिनों से अन्तर है। यही कारण है कि वैदिक भाषा का प्रभाव बाद के दिनों में अन्य भाषाओं में देखने को मिलता है, क्योंकि संस्कृत ही इन भाषाओं की जननी है। वर्तमान में भारतीय संविधान में संगृहीत सभी भाषाओं का प्रभाव देखा जाता है। प्राथमिक शब्द है
सभ्यता के पुराने दस्तावेज के रूप में खण्डहरों व भूमिगत सामग्रियों को देखा जाता है। जब व्यक्ति अपने आपको सामाजिक जीवन में ढालने लगा, तब से वह समय एकता में प्रदर्शित होता है। इस प्रदर्शन की सीमा को हड़प्पा व मोहनजोदडो से प्राप्त वस्तुओं से जान सकते हैं उनकी अभिव्यक्ति रहन-सहन, मोहरों, सिक्कों एवं बने-बनाए पक्के व अधपके खिलौनों से जान सकते हैं। उनकी धार्मिक भावना के रूप में कुण्ड की प्राप्ति हुई है, जिससे उनकी धार्मिक संवेदनाओं को जान सकते हैं। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं में ढहती सभ्यताओं की कहानी, जमीन में धंसे समय के काल को खोद कर देख सकते हैं। इससे इतिहास की टूटी कड़ियों का पता चलता है। इससे यह भी पता चलता है कि कैसे नगरीय सभ्यता के स्थान पर ग्रामीण सभ्यता का विकास होता है। यह वैदिक युग में हुआ और इसी सभ्यता में भाषा की उपलब्धि हासिल हुई, जिसको संस्कृत के रूप में जाना जाता है। वैदिक युग में मानव ने जंगल से निकल ग्रामीण संस्कृति का निर्माण किया तथा समाज ने प्राकृतिक रूपों को ही अपने इष्ट के रूप में स्वीकारा, जिसकी अभिव्यक्ति ऋग्वेद के रूप में मिलती है। भाषा की यह वृत्ति केवल भारतभूमि पर ही सम्भव नहीं हुई, बल्कि विश्व के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलती है। संस्कृत भाषा की प्राथमिक जीवित रचना के रूप में ऋग्वेद का शास्त्रीय संस्कृत भाषा का सम्बन्ध है। संस्कृत भाषा अपनी समस्त स्थितियों में प्रयुक्त बहुल भाषा है, परन्तु वेदों में जो रूप प्रयुक्त हुए हैं, उनमें बाद के दिनों से अन्तर है। यही कारण है कि वैदिक भाषा का प्रभाव बाद के दिनों में अन्य भाषाओं में देखने को मिलता है, क्योंकि संस्कृत ही इन भाषाओं की जननी है। वर्तमान में भारतीय संविधान में संगृहीत सभी भाषाओं का प्रभाव देखा जाता है। किस युग में मानव ने ग्रामीण संस्कृति का निर्माण किया?
सभ्यता के पुराने दस्तावेज के रूप में खण्डहरों व भूमिगत सामग्रियों को देखा जाता है। जब व्यक्ति अपने आपको सामाजिक जीवन में ढालने लगा, तब से वह समय एकता में प्रदर्शित होता है। इस प्रदर्शन की सीमा को हड़प्पा व मोहनजोदडो से प्राप्त वस्तुओं से जान सकते हैं उनकी अभिव्यक्ति रहन-सहन, मोहरों, सिक्कों एवं बने-बनाए पक्के व अधपके खिलौनों से जान सकते हैं। उनकी धार्मिक भावना के रूप में कुण्ड की प्राप्ति हुई है, जिससे उनकी धार्मिक संवेदनाओं को जान सकते हैं। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं में ढहती सभ्यताओं की कहानी, जमीन में धंसे समय के काल को खोद कर देख सकते हैं। इससे इतिहास की टूटी कड़ियों का पता चलता है। इससे यह भी पता चलता है कि कैसे नगरीय सभ्यता के स्थान पर ग्रामीण सभ्यता का विकास होता है। यह वैदिक युग में हुआ और इसी सभ्यता में भाषा की उपलब्धि हासिल हुई, जिसको संस्कृत के रूप में जाना जाता है। वैदिक युग में मानव ने जंगल से निकल ग्रामीण संस्कृति का निर्माण किया तथा समाज ने प्राकृतिक रूपों को ही अपने इष्ट के रूप में स्वीकारा, जिसकी अभिव्यक्ति ऋग्वेद के रूप में मिलती है। भाषा की यह वृत्ति केवल भारतभूमि पर ही सम्भव नहीं हुई, बल्कि विश्व के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलती है। संस्कृत भाषा की प्राथमिक जीवित रचना के रूप में ऋग्वेद का शास्त्रीय संस्कृत भाषा का सम्बन्ध है। संस्कृत भाषा अपनी समस्त स्थितियों में प्रयुक्त बहुल भाषा है, परन्तु वेदों में जो रूप प्रयुक्त हुए हैं, उनमें बाद के दिनों से अन्तर है। यही कारण है कि वैदिक भाषा का प्रभाव बाद के दिनों में अन्य भाषाओं में देखने को मिलता है, क्योंकि संस्कृत ही इन भाषाओं की जननी है। वर्तमान में भारतीय संविधान में संगृहीत सभी भाषाओं का प्रभाव देखा जाता है। कौन-सी सभ्यता पहले विद्यमान थी?
सभ्यता के पुराने दस्तावेज के रूप में खण्डहरों व भूमिगत सामग्रियों को देखा जाता है। जब व्यक्ति अपने आपको सामाजिक जीवन में ढालने लगा, तब से वह समय एकता में प्रदर्शित होता है। इस प्रदर्शन की सीमा को हड़प्पा व मोहनजोदडो से प्राप्त वस्तुओं से जान सकते हैं उनकी अभिव्यक्ति रहन-सहन, मोहरों, सिक्कों एवं बने-बनाए पक्के व अधपके खिलौनों से जान सकते हैं। उनकी धार्मिक भावना के रूप में कुण्ड की प्राप्ति हुई है, जिससे उनकी धार्मिक संवेदनाओं को जान सकते हैं। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं में ढहती सभ्यताओं की कहानी, जमीन में धंसे समय के काल को खोद कर देख सकते हैं। इससे इतिहास की टूटी कड़ियों का पता चलता है। इससे यह भी पता चलता है कि कैसे नगरीय सभ्यता के स्थान पर ग्रामीण सभ्यता का विकास होता है। यह वैदिक युग में हुआ और इसी सभ्यता में भाषा की उपलब्धि हासिल हुई, जिसको संस्कृत के रूप में जाना जाता है। वैदिक युग में मानव ने जंगल से निकल ग्रामीण संस्कृति का निर्माण किया तथा समाज ने प्राकृतिक रूपों को ही अपने इष्ट के रूप में स्वीकारा, जिसकी अभिव्यक्ति ऋग्वेद के रूप में मिलती है। भाषा की यह वृत्ति केवल भारतभूमि पर ही सम्भव नहीं हुई, बल्कि विश्व के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलती है। संस्कृत भाषा की प्राथमिक जीवित रचना के रूप में ऋग्वेद का शास्त्रीय संस्कृत भाषा का सम्बन्ध है। संस्कृत भाषा अपनी समस्त स्थितियों में प्रयुक्त बहुल भाषा है, परन्तु वेदों में जो रूप प्रयुक्त हुए हैं, उनमें बाद के दिनों से अन्तर है। यही कारण है कि वैदिक भाषा का प्रभाव बाद के दिनों में अन्य भाषाओं में देखने को मिलता है, क्योंकि संस्कृत ही इन भाषाओं की जननी है। वर्तमान में भारतीय संविधान में संगृहीत सभी भाषाओं का प्रभाव देखा जाता है। निम्नलिखित में से कौन-सी विश्व की पहली साहित्यिक रचमा मानी जाती है
सभ्यता के पुराने दस्तावेज के रूप में खण्डहरों व भूमिगत सामग्रियों को देखा जाता है। जब व्यक्ति अपने आपको सामाजिक जीवन में ढालने लगा, तब से वह समय एकता में प्रदर्शित होता है। इस प्रदर्शन की सीमा को हड़प्पा व मोहनजोदडो से प्राप्त वस्तुओं से जान सकते हैं उनकी अभिव्यक्ति रहन-सहन, मोहरों, सिक्कों एवं बने-बनाए पक्के व अधपके खिलौनों से जान सकते हैं। उनकी धार्मिक भावना के रूप में कुण्ड की प्राप्ति हुई है, जिससे उनकी धार्मिक संवेदनाओं को जान सकते हैं। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं में ढहती सभ्यताओं की कहानी, जमीन में धंसे समय के काल को खोद कर देख सकते हैं। इससे इतिहास की टूटी कड़ियों का पता चलता है। इससे यह भी पता चलता है कि कैसे नगरीय सभ्यता के स्थान पर ग्रामीण सभ्यता का विकास होता है। यह वैदिक युग में हुआ और इसी सभ्यता में भाषा की उपलब्धि हासिल हुई, जिसको संस्कृत के रूप में जाना जाता है। वैदिक युग में मानव ने जंगल से निकल ग्रामीण संस्कृति का निर्माण किया तथा समाज ने प्राकृतिक रूपों को ही अपने इष्ट के रूप में स्वीकारा, जिसकी अभिव्यक्ति ऋग्वेद के रूप में मिलती है। भाषा की यह वृत्ति केवल भारतभूमि पर ही सम्भव नहीं हुई, बल्कि विश्व के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलती है। संस्कृत भाषा की प्राथमिक जीवित रचना के रूप में ऋग्वेद का शास्त्रीय संस्कृत भाषा का सम्बन्ध है। संस्कृत भाषा अपनी समस्त स्थितियों में प्रयुक्त बहुल भाषा है, परन्तु वेदों में जो रूप प्रयुक्त हुए हैं, उनमें बाद के दिनों से अन्तर है। यही कारण है कि वैदिक भाषा का प्रभाव बाद के दिनों में अन्य भाषाओं में देखने को मिलता है, क्योंकि संस्कृत ही इन भाषाओं की जननी है। वर्तमान में भारतीय संविधान में संगृहीत सभी भाषाओं का प्रभाव देखा जाता है। संस्कृत को किन भाषाओं की जननी बताया गया है?
Recommended Questions
- Revision|विकास एवं वर्गीकरण |विकासीय सम्बन्ध खोजन |समजात अंग |समरूप अं...
Text Solution
|
- किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक 0.3xx10^(-4)" ...
Text Solution
|
- (dy)/(dx)=1+x+y+xy" का हल है "
Text Solution
|
- यदि vec(2i)+vecj+veck,vec(6i)-vecj+2veck" एवं "14veci-5vecj+4veck क्रम...
Text Solution
|
- वक्र x^(2)+y^(2)=a^(2)" के बिन्दु "(x(1),y(1)) पर स्पर्श रेखा का समीकर...
Text Solution
|
- CH(3)COOH के एक 0*001 mol L^(-1), विलयन की छलकता 3*905 xx 10^(-5) Sc...
Text Solution
|
- SO(2) की विरंजक क्रिया का कारण इसकी ............प्रकृति है।
Text Solution
|