ओलंपिक खेल, 2004 कहाँ आयोजित हुए थे? | कक्षा 12 | करेंट अफेयर्स | सामान्य ज्ञान | डू...
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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पूछना ही क्या। कभी चारदीवारी पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ थे? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।म जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साइब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें। इसमें कौन सी क्रिया है
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पूछना ही क्या। कभी चारदीवारी पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ थे? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।म जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साइब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें। लेखक हॉस्टल की दीवारों को क्यों पार करते थे?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पूछना ही क्या। कभी चारदीवारी पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ थे? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।म जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साइब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें। बड़े भईया के सवाल पर प्रेमचंद मौन क्यों रहते थे?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पुछना ही क्या। कभी चारदीवारी __ पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ थे ? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।न जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साहब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें।बड़े भईया के सवाल पर प्रेमचंद मौन क्यों रहते थे?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पुछना ही क्या। कभी चारदीवारी __ पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ थे? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।न जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साहब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें।लेखक हॉस्टल की दीवारों को क्यों पार करते थे?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पूछना ही क्या। कभी चारदीवारी पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ थे? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।म जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साइब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें। प्रेमचंद की भाषा कैसी थी?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पूछना ही क्या। कभी चारदीवारी पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ थे? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।म जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साइब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें। रुद्र-रूप' का प्रयोग किसके लिए हुआ है?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पुछना ही क्या। कभी चारदीवारी __ पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ थे? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।न जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साहब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें। प्रेमचंद की भाषा कैसी थी?
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