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प्रतिच्छेदी रेखाओं के युग्म की गणना करें...

प्रतिच्छेदी रेखाओं के युग्म की गणना करें। | कक्षा 6 | बुनियादी ज्यामितीय विचार | गणित | संशय

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कोणों के प्रकार |कोणों का रेखिक युग्म |प्रतिच्छेदी तथा अप्रतिच्छेदी रेखाएं |कोणों के युग्म से संबंधित अभिक्रियाएँ |प्रमेय 6.1|सारांश

कोणों के प्रकार |कोणों का रेखिक युग्म |प्रतिच्छेदी तथा अप्रतिच्छेदी रेखाएं |प्रमेय 6.1|NCERT प्रश्नावली |समांतर रेखाएं ओर तिर्यक रेखा |बाह्य: कोण |अंत: कोण |संगत कोण |एकांतर अंत: कोण |एकांतर बाह्य: कोण |तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंत: कोण |सारांश

The volume of a right circular cylinder is 3 times the volume of a right circular cone. The radius of the cone and the cylinder are 3cm and 6cm respectively. If the height of the cylinder is 1cm, then what is the slant height of the cone? किसी लम्ब वृत्तीय बेलन का आयतन एक लम्ब वृत्तीय शंकु के आयतन से तीन गुना है | शंकु तथा बेलन की त्रिज्या क्रमशः 3 सेमी और 6 सेमी है | यदि बेलन की ऊंचाई 1 सेमी है, तो शंकु की तिर्यक ऊंचाई ज्ञात करें |

A sum of Rs. 10,000 was borrowed at a rate of simple interest. After four months, Rs.6000 more was borrowed and rate of interest on the total principal was doubled than that of the previous rate. At the end of the year, 2800 was paid as the interest. Find the rate that was applicable in the initial. 10000 रुपये की राशि साधारण ब्याज के किसी दर पर उधार ली गई। चार महीनों बाद, 6000 रुपय्ये और उधार लिए गए और कुल मूल धन पर ब्याज की दर को पिछली दर के मुकाबले दोगुना कर दिया गया | साल के अंत में, ब्याज के रूप में 2800 का भुगतान किया गया, प्रारंभ में लागू की गयी ब्याज दर की गणना करें।

The ratio of boys to girls in a class is 2 : 3 and the average score of all the students in the class in maths is 54. The average score of boys is 50% more than that of girls. What is the average score of girls ? एक कक्षा में लड़के और लड़कियों की संख्या का अनुपात 2 : 3 है और कक्षा में सभी छात्रों के गणित में औसत प्राप्तांक 54 है | लड़कों का औसत प्राप्तांक लड़कियों के औसत प्राप्तंक से 50% अधिक है | लड़कियों का औसत प्राप्तांक कितना है ?

In a class of 80 students, the ratio of the urban to the rural is 5 : 3. In a test, the average score of the rural students is 40% more than that of the urban students. If the average score of all the students is 69, then what is the average score of the rural students? 80 छात्रों की एक कक्षा में, शहरी और ग्रामीण का अनुपात 5 : 3 है | किसी परीक्षा में, ग्रामीण छात्रों के औसत अंक शहरी छात्रों के औसत अंक से 40% अधिक थे | यदि सभी छात्रों के औसत अंक 69 हैं, तो ग्रामीण छात्रों के औसत अंक ज्ञात करें |

36 persons working 8 hours a day can do 3 units of work in 12 days. How many persons are required to do 5 units of that work in 16 days, if they work for 6 hours a day? प्रतिदिन 8 घंटे कार्य करके 36 लोग किसी कार्य की 3 इकाई 12 दिनों में कर सकते हैं| यदि वे एक दिन में 6 घंटे कार्य करें तो 16 दिन में इस कार्य की 5 इकाई समाप्त करने के लिए कितने लोगों की आवश्यकता होगी ?

निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मानव के लिए विचार तथा अनुभव में जो कुछ भी श्रेष्ठ है, उदात्त है व इसका अथवा उसका नहीं है जातिगत अथवा देशगत नहीं है, वह सबका है, सारे विश्व का है। समस्त ज्ञान, विज्ञान और सभ्यता, सारी मानवता की विरासत है। पूर्व और पश्चिम, उत्तर और दक्षिण के भेद, अक्षांश और देशान्तर का भेद तथा जलवायु और भौगोलिक सीमा के भेद सर्वथा निराधार हैं। सम्प्रदाय, समुदाय और जाति के नाम पर आदशौं, मूल्यों की स्थापना करना, संकीर्णता के वातावरण में मानवता के दम घोंटना-सा है। जो कुछ भी उपलब्धि है, वह चाहे जिस भू-भाग की उपज हो। महापुरुष विरोधी नहीं होते, एक-दूसरे के पूरक होते हैं। महापुरुष में अपने देश की विशेषता होती है। विवेकशील मनुष्य नम्रतापूर्वक महापुरुषों से शिक्षा ग्रहरण कर अपने जीवन को प्रकाशित करने का प्रयत्न करता है। समस्त मानवता उसके प्रति कृतज्ञ है। किन्तु अब हमें उनसे आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि ज्ञान की इतिश्री नहीं होती। संसार एक खुली पाठशाला है, जीवन एक खुली पुस्तक है, विकास की क्रिया के मूल में मानव की पूर्ण बनने की अपनी प्रेरणा है। विकास के लिए समन्वय का भाव होना परम आवश्यक है। यदि हम विभिन्न विचारधाराओं एवं उनके जन्मदाता महापुरुषों का पूर्ण खण्डन करें तो विकास अवरुद्ध हो जायेगा। किसी धर्म विशेष या मान्यता के खूटे के साथ संकीर्ण भाव से बंधकर तथा परम्पराओं और रूढ़ियों से जकड़े हुए हम आगे नहीं बढ़ सकते। मानव को मानव रूप में सम्मानित करके ही हम जातीयता, प्रान्तीयता, क्षुद्र राष्ट्रीयता और अन्तर्राष्ट्रीयता के भेद को तोड़ सकते हैं। आज मानव, मानव से दूर हटता जा रहा है। वह भूल चुका है कि देश, धर्म और जाति के भिन्न होते हुए भी हम सर्वप्रथम मानव हैं और समान हैं तथा सभी की भावनाएं और लक्ष्य एक ही हैं। सत्ताधारी मनुष्य दूसरों को कुचलकर सुख- सुवध ाओं पर एकाधिकार कर लेना चाहता है लेकिन एक आकाश के नीचे रहने वाले इन्सान तो सब एक हैं भले ही कोई कुदाल लेकर श्रमिका का कार्य करता हो, कोई कलम लेकर दफ्तर का, किन्तु लक्ष्य एक है- समाज का अभ्युदय। मानव का नाता श्रेष्ठ नाता है। नौकर कहकर पुकारना मानो मानव का अपमान है। सहयोगी, सहायक अथवा सस्नेह उसके नाम से सम्बोधित करना मधुर है। जेल और फांसी का विध र मानवता का कलंक है। एक सीमा एक दण्ड भी आवश्यक होता है, लेकिन दण्ड का आतंक समाज को पंगु बना देता है। हमें अपराध वृत्ति का शमन करके अपराधी को शिष्ट एवं सभ्य मानव बनाना चाहिए। दया मानवता का सार है। दया छोड़कर सत्य भी सत्य नहीं है। दया प्रेरित असत्य भी व्यावहारिक सत्य नहीं है। दया धर्म मानवधर्म हैं।विकास के लिए क्या आवश्यक है?