चलते समय हाथ क्यों हिलते हैं | जीवविज्ञान तथ्य | संशय | #निकर
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A student takes 1.25 hours to travel from home to school at a speed of 4 km/h. By what percentage should he increase his speed to reduce the time by 25% to cover the same distance from school to home? एक छात्र को 4 किमी/घंटा की चाल से चलते हुए घर से विद्यालय पहुँचने में 1.25 घंटे लगते हैं | विद्यालय से घर तक इतनी ही दूरी तय करने के दौरान समय में 25% कटौती करने के लिए उसे अपनी चाल में कितने प्रतिशत की वृद्धि करनी चाहिए ?
जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। मानव जीवन की रीढ़ की हड्डी विद्यार्थी जीवन को क्यों माना जाता है?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नीव दृढ बन जाती है तो जीवन सुदृढ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही जो सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। मानव जीवन की रीढ की हड्डी विद्यार्थी जीवन को क्यों माना जाता है?
निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं. जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। मानव जीवन की रीढ़ की हड्डी विद्यार्थी जीवन को क्यों माना जाता है?
निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेशः मैंने चाँटा मारा था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ : लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समय है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश : माँ, पढूँगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आउँगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश : अब रहने दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाउँगा। कोई आएं तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो - "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में...." माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। मीना और रमेश हैं, परस्पर
कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेश: मैंने चाँटा मारा था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ : लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समय है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश : माँ, पढूंगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आऊंगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश : अब रहने दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाऊंगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो – “अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में...." माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। मीना और रमेश हैं, परस्पर
माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेशः मैंने चाँटा मारा, था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समया है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है * या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश: माँ, पढूँगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आउँगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा-होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश-: अब रहने-दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाउँगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो - "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में....'' माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। मीना और रमेश हैं, परस्पर