8 पुरुषों और 7 महिलाओं के एक समूह में से, कितने प्रकार से 6 पुरुषों और 4 महिलाओं का चयन किया जा ...
8 पुरुषों और 7 महिलाओं के एक समूह में से, कितने प्रकार से 6 पुरुषों और 4 महिलाओं का चयन किया जा ...
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4 men and 5 women can complete a work in 15 days, whereas 9 men and 6 women can do it in 10 days. To complete the same work in 7 days, how many women should assist 4 men? 4 पुरुष और 5 महिलाएं किसी कार्य को 15 दिनों में समाप्त कर सकती हैं जबकि 9 पुरुष और 6 महिलाएं इसी कार्य को 10 दिनों में कर सकती हैं | इसी कार्य को 7 दिनों में पूरा करने के लिए, कितनी महिलाओं को 4 पुरुषों की सहायता करनी चाहिए ?
The ratio of the number of males and females in a group is 6:7. Fifteen females leave the group. As a result, this ratio becomes 12:11. Now, if 6 males join the group, then what will be the ratio of the number of males and females in the group? एक समूह में पुरुषों और महिलाओं की संख्या का अनुपात 6 : 7 है | पंद्रह महिलाएं समूह से निकल जाती हैं | परिणामस्वरूप, यह अनुपात 12 : 11 हो जाता है | अब, यदि 6 पुरुष समूह में शामिल हो जाते हैं, तो समूह में पुरुषों और महिलाओं की संख्या का अनुपात क्या होगा ?
5 men and 8 women can complete a task in 34 days, whereas 4 men and 18 women can complete the same task in 28 days. In how many days can the same task can be completed by 3 men and 5 women? 5 पुरुष तथा 8 महिलाएं किसी कार्य को 34 दिनों में पूरा कर सकते हैं। जबकि 4 पुरुष और 18 महिलाएं इसी कार्य को 28 दिनों में पूरा कर सकते हैं। कितने दिनों में यही कार्य 3 पुरुषों तथा 5 महिलाओं के द्वारा किया जा सकता है?
निर्देश: गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। "किसी को देखने के लिए आँख की नहीं, दृष्टि की आवश्यकता होती है" ... स्वामी विवेकानंद का यह कथन इस महिला के जीवन का दर्शन बन गया है। इसी जीवन दर्शन के सहारे उन्होंने एक ओर कठिनाइयों का सामना किया तो दूसरी ओर सफलता का मार्ग ढूँढ़ा और उस पर निर्भयता से बढ़ चली। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं मुंबई की रेवती रॉय की। रेवती रॉय वह महिला हैं जिन्होंने महिलाओं की कठिनाइयों को ध्यान में रख केवल उन्हीं की सुविधा के लिए 'फॉरशी' नामक से कैब-सेवा प्रारंभ की। उद्देश्य स्पष्ट था- कामकाजी और जरूरतमंद महिलाओं को अपने शहर में सुरक्षित सफर का भरोसा देना। यह सेवा उन महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई जिन्हें महानगरों में मुँह बाए बैठे अपराधी तत्त्वों या परपीड़ा में आनंद लेने वालों से प्रायः रोज ही जाना पड़ता है। खतरों और आशंकाओं से भी सड़क परिवहन की जिंदगी में कदम रखने का निर्णय लेना रेवती के लिए सरल नहीं था। लेकिन कभी-कभी विवशता भी प्रेरणा देती है। ऐसे ही अवसरों पर 'आँख नहीं, दृष्टि' वाला दर्शन प्रेरक होता है! गंभीर बीमारी से जूझ रहे पति के इलाज में सारी जमापूँजी चुक जाने के बाद रेवती को अपने अस्तित्व के लिए कुछ-न-कुछ करना था। सो उन्होंने एकदम नया रास्ता चुना - कैब के द्वारा महिलाओं को सुरक्षित यात्रा का आश्वासन। किस जिंदगी को खतरों और आशंकाओं से भरा माना गया है ?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। "किसी को देखने के लिए आँख की नहीं, दृष्टि की आवश्यकता होती है" - स्वामी विवेकानंद का यह कथन इस महिला के जीवन का दर्शन बन गया है। इसी जीवन दर्शन के सहारे उन्होंने एक ओर कठिनाइयों का सामना किया तो दूसरी ओर सफलता का मार्ग ढूँढा और उस पर निर्भयता से बढ़ चली। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं मुबई की रेवती रॉय की। रेवती रॉय वह महिला हैं जिन्होंने महिलाओं की कठिनाइयों को ध्यान में रख केवल उन्हीं की सुविधा के लिए 'फॉरशी' नामक से कैब-सेवा प्रारंभ की। उद्देश्य स्पष्ट था- कामकाजी और जरूरतमंद महिलाओं को अपने शहर में सुरक्षित सफर का भरोसा देना। यह सेवा उन महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई जिन्हें महानगरों में मुँह बाए बैठे अपराधी तत्त्वों या परपीड़ा में आनंद लेने वालों से प्रायः रोज ही जुझना पड़ता है। खतरों और आशंकाओं से भी सड़क-परिवहन की जिंदगी में कदम रखने का निर्णय लेना रेवती के लिए सरल नहीं था। लेकिन कभी-कभी विवशता भी प्रेरणा देती है। ऐसे ही अवसरों पर 'आँख नहीं, दृष्टि' वाला दर्शन प्रेरक होता है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे पति के इलाज में सारी जमापूँजी चुक जाने के बाद रेवती को अपने अस्तित्व के लिए कुछ-न-कुछ करना था। सो उन्होंने एकदम नया रास्ता चुना-कैब के द्वारा महिलाओं को सुरक्षित यात्रा का आश्वासन। किस जिंदगी को खतरों और आशंकाओं से भरा माना गया है?
निर्देश: गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। "किसी को देखने के लिए आँख की नहीं, दृष्टि की आवश्यकता होती है" ... स्वामी विवेकानंद का यह कथन इस महिला के जीवन का दर्शन बन गया है। इसी जीवन दर्शन के सहारे उन्होंने एक ओर कठिनाइयों का सामना किया तो दूसरी ओर सफलता का मार्ग ढूँढ़ा और उस पर निर्भयता से बढ़ चली। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं मुंबई की रेवती रॉय की। रेवती रॉय वह महिला हैं जिन्होंने महिलाओं की कठिनाइयों को ध्यान में रख केवल उन्हीं की सुविधा के लिए 'फॉरशी' नामक से कैब-सेवा प्रारंभ की। उद्देश्य स्पष्ट था- कामकाजी और जरूरतमंद महिलाओं को अपने शहर में सुरक्षित सफर का भरोसा देना। यह सेवा उन महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई जिन्हें महानगरों में मुँह बाए बैठे अपराधी तत्त्वों या परपीड़ा में आनंद लेने वालों से प्रायः रोज ही जाना पड़ता है। खतरों और आशंकाओं से भी सड़क परिवहन की जिंदगी में कदम रखने का निर्णय लेना रेवती के लिए सरल नहीं था। लेकिन कभी-कभी विवशता भी प्रेरणा देती है। ऐसे ही अवसरों पर 'आँख नहीं, दृष्टि' वाला दर्शन प्रेरक होता है! गंभीर बीमारी से जूझ रहे पति के इलाज में सारी जमापूँजी चुक जाने के बाद रेवती को अपने अस्तित्व के लिए कुछ-न-कुछ करना था। सो उन्होंने एकदम नया रास्ता चुना - कैब के द्वारा महिलाओं को सुरक्षित यात्रा का आश्वासन। कामकाजी महिलाओं को प्रायः नित्य ही जूझना पड़ता
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। "किसी को देखने के लिए आँख की नहीं, दृष्टि की आवश्यकता होती है" - स्वामी विवेकानंद का यह कथन इस महिला के जीवन का दर्शन बन गया है। इसी जीवन दर्शन के सहारे उन्होंने एक ओर कठिनाइयों का सामना किया तो दूसरी ओर सफलता का मार्ग ढूँढा और उस पर निर्भयता से बढ़ चली। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं मुबई की रेवती रॉय की। रेवती रॉय वह महिला हैं जिन्होंने महिलाओं की कठिनाइयों को ध्यान में रख केवल उन्हीं की सुविधा के लिए 'फॉरशी' नामक से कैब-सेवा प्रारंभ की। उद्देश्य स्पष्ट था- कामकाजी और जरूरतमंद महिलाओं को अपने शहर में सुरक्षित सफर का भरोसा देना। यह सेवा उन महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई जिन्हें महानगरों में मुँह बाए बैठे अपराधी तत्त्वों या परपीड़ा में आनंद लेने वालों से प्रायः रोज ही जुझना पड़ता है। खतरों और आशंकाओं से भी सड़क-परिवहन की जिंदगी में कदम रखने का निर्णय लेना रेवती के लिए सरल नहीं था। लेकिन कभी-कभी विवशता भी प्रेरणा देती है। ऐसे ही अवसरों पर 'आँख नहीं, दृष्टि' वाला दर्शन प्रेरक होता है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे पति के इलाज में सारी जमापूँजी चुक जाने के बाद रेवती को अपने अस्तित्व के लिए कुछ-न-कुछ करना था। सो उन्होंने एकदम नया रास्ता चुना-कैब के द्वारा महिलाओं को सुरक्षित यात्रा का आश्वासन। कामकाजी महिलाओं को प्रायः नित्य ही जूझना पड़ता है-
निर्देश: गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। "किसी को देखने के लिए आँख की नहीं, दृष्टि की आवश्यकता होती है" ... स्वामी विवेकानंद का यह कथन इस महिला के जीवन का दर्शन बन गया है। इसी जीवन दर्शन के सहारे उन्होंने एक ओर कठिनाइयों का सामना किया तो दूसरी ओर सफलता का मार्ग ढूँढ़ा और उस पर निर्भयता से बढ़ चली। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं मुंबई की रेवती रॉय की। रेवती रॉय वह महिला हैं जिन्होंने महिलाओं की कठिनाइयों को ध्यान में रख केवल उन्हीं की सुविधा के लिए 'फॉरशी' नामक से कैब-सेवा प्रारंभ की। उद्देश्य स्पष्ट था- कामकाजी और जरूरतमंद महिलाओं को अपने शहर में सुरक्षित सफर का भरोसा देना। यह सेवा उन महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई जिन्हें महानगरों में मुँह बाए बैठे अपराधी तत्त्वों या परपीड़ा में आनंद लेने वालों से प्रायः रोज ही जाना पड़ता है। खतरों और आशंकाओं से भी सड़क परिवहन की जिंदगी में कदम रखने का निर्णय लेना रेवती के लिए सरल नहीं था। लेकिन कभी-कभी विवशता भी प्रेरणा देती है। ऐसे ही अवसरों पर 'आँख नहीं, दृष्टि' वाला दर्शन प्रेरक होता है! गंभीर बीमारी से जूझ रहे पति के इलाज में सारी जमापूँजी चुक जाने के बाद रेवती को अपने अस्तित्व के लिए कुछ-न-कुछ करना था। सो उन्होंने एकदम नया रास्ता चुना - कैब के द्वारा महिलाओं को सुरक्षित यात्रा का आश्वासन। किस शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों हैं ?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। "किसी को देखने के लिए आँख की नहीं, दृष्टि की आवश्यकता होती है" - स्वामी विवेकानंद का यह कथन इस महिला के जीवन का दर्शन बन गया है। इसी जीवन दर्शन के सहारे उन्होंने एक ओर कठिनाइयों का सामना किया तो दूसरी ओर सफलता का मार्ग ढूँढा और उस पर निर्भयता से बढ़ चली। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं मुबई की रेवती रॉय की। रेवती रॉय वह महिला हैं जिन्होंने महिलाओं की कठिनाइयों को ध्यान में रख केवल उन्हीं की सुविधा के लिए 'फॉरशी' नामक से कैब-सेवा प्रारंभ की। उद्देश्य स्पष्ट था- कामकाजी और जरूरतमंद महिलाओं को अपने शहर में सुरक्षित सफर का भरोसा देना। यह सेवा उन महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई जिन्हें महानगरों में मुँह बाए बैठे अपराधी तत्त्वों या परपीड़ा में आनंद लेने वालों से प्रायः रोज ही जुझना पड़ता है। खतरों और आशंकाओं से भी सड़क-परिवहन की जिंदगी में कदम रखने का निर्णय लेना रेवती के लिए सरल नहीं था। लेकिन कभी-कभी विवशता भी प्रेरणा देती है। ऐसे ही अवसरों पर 'आँख नहीं, दृष्टि' वाला दर्शन प्रेरक होता है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे पति के इलाज में सारी जमापूँजी चुक जाने के बाद रेवती को अपने अस्तित्व के लिए कुछ-न-कुछ करना था। सो उन्होंने एकदम नया रास्ता चुना-कैब के द्वारा महिलाओं को सुरक्षित यात्रा का आश्वासन। किस शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों हैं?
निर्देश: गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। "किसी को देखने के लिए आँख की नहीं, दृष्टि की आवश्यकता होती है" ... स्वामी विवेकानंद का यह कथन इस महिला के जीवन का दर्शन बन गया है। इसी जीवन दर्शन के सहारे उन्होंने एक ओर कठिनाइयों का सामना किया तो दूसरी ओर सफलता का मार्ग ढूँढ़ा और उस पर निर्भयता से बढ़ चली। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं मुंबई की रेवती रॉय की। रेवती रॉय वह महिला हैं जिन्होंने महिलाओं की कठिनाइयों को ध्यान में रख केवल उन्हीं की सुविधा के लिए 'फॉरशी' नामक से कैब-सेवा प्रारंभ की। उद्देश्य स्पष्ट था- कामकाजी और जरूरतमंद महिलाओं को अपने शहर में सुरक्षित सफर का भरोसा देना। यह सेवा उन महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई जिन्हें महानगरों में मुँह बाए बैठे अपराधी तत्त्वों या परपीड़ा में आनंद लेने वालों से प्रायः रोज ही जाना पड़ता है। खतरों और आशंकाओं से भी सड़क परिवहन की जिंदगी में कदम रखने का निर्णय लेना रेवती के लिए सरल नहीं था। लेकिन कभी-कभी विवशता भी प्रेरणा देती है। ऐसे ही अवसरों पर 'आँख नहीं, दृष्टि' वाला दर्शन प्रेरक होता है! गंभीर बीमारी से जूझ रहे पति के इलाज में सारी जमापूँजी चुक जाने के बाद रेवती को अपने अस्तित्व के लिए कुछ-न-कुछ करना था। सो उन्होंने एकदम नया रास्ता चुना - कैब के द्वारा महिलाओं को सुरक्षित यात्रा का आश्वासन। 'परपीड़ा' शब्द का गद्यांश में प्रयोग के अनुसार अर्थ है-
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