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1000/1331 को आधार 10/11 पर घातीय संकेतन ...

1000/1331 को आधार 10/11 पर घातीय संकेतन में व्यक्त कीजिए । | 7 | घातांक | MATHS | ASHOK PUBLICAT...

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If a shopkeeper sells a mixer at Rs 11,400, then he suffers a loss of 5%. At what price (in Rs) should he sell the mixer to gain 10%? अगर कोई दुकानदार 11,400 रूपये में मिक्सर बेचता है, तो उसे 5% का नुकसान होता है। 10% लाभ हासिल करने के लिए उसे मिक्सर को किस कीमत पर (रूपये में) बेचना चाहिए?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 17 ज्यों निकलकर बादलों की गोद से थी अभी इक बूँद कुछ आगे बढ़ी। सोचने फिर-फिर यही जी में लगी आहा क्यों घर छोड़कर में यों कढ़ी। देव मेरे भाग्य में है क्या बदा? मैं बचूँगी या मिलूँगी धूल में। जल उठूगी गिर अँगारे पर किसी चू पहुँगी या कमल के फूल में। वह पड़ी उस काल इक ऐसी हवा वह समन्दर ओर आई अनमनी। एक सुन्दर सीप का था मुँह खुला वह उसी में जा गिरी मोती बनी। आह! शब्द किस भाव को व्यक्त करता है?

The distribution of fruit consumption in a sample of 73 seventeen-year-old girls is given in the graph below. Study the graph and answer the questions : What percent of these girls ate six or more servings per day? निम्नलिखित ग्राफ में 72 सत्रह - वर्षीय लड़कियों के सैम्पल में फलों की खपत (उपभोग) के विवरण को दर्शाया गया है। ग्राफ का अध्ययन कीजिए और प्रश्नों के आधार पर उत्तर दीजिए: प्रति दिन छह या अधिक आपूर्ति किए गए फलों को खाने वाली इन लड़कियों का प्रतिशत क्या था?

A man bought an article and sold it at a gain of 10%. If he had bought the article at 20% less and sold it for Rs1,000 more, he would have made a profit of 40% .The cost price of the article (in Rs.) is: एक आदमी ने एक वस्तु को खरीदा और उसे 10% की लाभ पर बेचा। यदि उसने 20% कम में वस्तु खरीदा होता और इसे 1,000 रुपये अधिक में बेचा होता, तो उसने 40% का लाभ कमाया होता। वस्तु का क्रय मूल्य (रुपये में) ज्ञात करे।

A man bought an article and sold it at a gain of 10%. If he had bought the article at 20% less and sold it for Rs1,000 more, he would have made a profit of 40%. The earlier selling price of the article (in Rs.) is: एक आदमी ने एक वस्तु को ख़रीदा और उसे 10% की लाभ पर बेचा। यदि उसने 20% कम में वस्तु ख़रीदा होता और इसे 1,000 रुपये अधिक में बेचता, तो उसने 40% का लाभ कमाया होता। वस्तु का आरंभिक विक्रय मूल्य (रुपये में) है:

A book has been co-authored by X and Y. the prices of the book in India and abroad are ₹800 and ₹1000 respectively. The royalties earned on sale in India and abroad are 10% and 16% respectively. the royalty amount is distributed among X and Y in the ratio 5:3. The given bar graph presents the number of copies of the book sold in India (A) and abroad (B) during 2012-16. एक पुस्तक का सह-लेखन X और Yद्वारा किया गया है| भारत में और विदेश में पुस्तक का मूल्य क्रमशः ₹800 और ₹1000 है| भारत और विदेश में बिक्री पर अर्जित स्वत्व शुल्क (रॉयल्टी] क्रमशः 10% और 16% है| स्वत्व शुल्क[ रॉयल्टी] की धनराशि को X और Y के बीच 5:3 के अनुपात में वितरित किया जाता है| दिया गया स्तम्भ आलेख (बार ग्राफ] 2012-16 के दौरान भारत (A) और विदेश (B) में बिक्री पुस्तक की संख्या को दर्शाता है| What is the difference between the royalties earned by X and Y (in ₹) during the years 2014 and 2015 taken together? वर्ष 2014 और 2015 को मिलाकर X तथा Y द्वारा अर्जित स्वत्व शुल्क (रॉयल्टी) में कितना अंतर (₹ में) है?

नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए: समूची स्वार्थी व अहं-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में ऊँचे उद्देश्य नहीं होते, उनमें लोक संग्रह नहीं होता, भव्य आदर्श नहीं होता। दूसरे, भले ही आप अपने सामने एक ऊँचा आदर्श रखें, तो भी आपके कर्म यदि आपके मन के चाहे या अनचाहे से प्रेरित हैं तो वे ह्रासमान ही होंगे, क्योंकि पसंद-नापसंद से किए जाते कार्य वासनाओं को बढ़ाए बिना नहीं रहते। कोई काम आपको महज इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि वह आपको पसंद है। उसी तरह कोई काम करने से आपको महज़ इस आधार पर नहीं कतराना चाहिए कि वह काम आपका मनचाहा नहीं है। कार्य का निर्णय बुद्धि-विवेक के आधार पर होना चाहिए, मनचली भावनाओं, तुनकमिजाजी के आधार पर कतई नहीं। इस एक बात को हमेशा याद रखिए कि पसंद और नापसंद आपके सबसे बड़े शत्रु हैं। आप इन्हें पहचानते तक नहीं। उल्टे आप इन्हें पाल-पोसकर दुलारते हैं। वे तो हर क्षण आपकी हानि व हास करने पर ही तुले हैं। इनसे निबटने का व्यावहारिक मार्ग यह है कि अपनी रुचि और अरुचि का विश्लेषण करें। वे तो हर क्षण आपकी हानि व ह्रास करने पर ही तुले हैं।" वाक्य में 'वे' सर्वनाम किसके लिए आया है?