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समझाइये, क्यों- ऐल्किल हैलाइड ध्रुवीय होते हुए भी जल में अमिश्रणीय है? | 12 | हैलोऐल्केन्स तथा ...

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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये पाश्चात्य सभ्यता एवं संस्कृति में बहुत-सी अच्छी बातें होते हुए भी वह मूलतः अधिकार प्रधान, भोग प्रधान है, उसमें अपने सुख की प्रवृत्ति प्रधान है। इसलिए यहाँ प्रधान शरीर-सुख-भोग तथा उसके निमित्त अगणित साधन जुटाने को और है जबकि भारतीय संस्कृति अनेक बुराइयों के होते हुए भी मुख्यतः धर्म प्रधान, कर्तव्य प्रधान, त्याग और तपस्या प्रवृत्ति-मूलक संस्कृति है। विश्व-मानव या विश्व-मानवता एवं संस्कृति का निर्माण तभी सम्भव है जब मनुष्य अपने शरीर का विचार इस सीमा तक न करे कि उस प्रयत्न में वह आत्मा, वह प्राण ज्योति ही तिरोहित हो जाए जिससे मानव, मानव है। स्पष्टतः भारतीय संस्कृति में, अहिंसक जीवन निर्माण की, दूसरों के लिए जीने की सम्भावनाएँ अधिक होने से गाँधी जी को श्रद्धा थी कि भारतीय संस्कृति ही हमारे जीवन का दीप है और वही विश्व-संस्कृति या विश्व-मानवता की आध रिशिला बन सकती है। पाश्चात्य संस्कृति के सम्बन्ध में सत्य है