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निम्नलिखित कथन तो सत्य/ असत्य लिखिय: दो ...

निम्नलिखित कथन तो सत्य/ असत्य लिखिय: दो त्रिभुज समरूप होंगें यदि उनकी संगत भुजाएं समानुपाती हों|...

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Two statements are given followed by two conclusions I and II. You have to consider the two statements to be true even if they seem to be at variance with commonly known facts. You have to decide which of the given conclusions, if any, follows from the given statements : Statements : Some birds are parrots. Crow is a bird. Conclusions : I. Some parrots are birds. II. Crow is not a parrot. निम्नलिखित प्रश्न में दो कथन के आगे दो निष्कर्ष दिये गये हैं। आप सामान्यतः ज्ञात तथ्यों में अंतर होने पर भी कथनों की पड़ताल सत्य समझकर करें। आप तय करें कि दिये गये निष्कर्षों में से कौन-सा, यदि कोई हो, दिये गये कथन से निकलते हैं : कथन : कुछ चिड़ियाँ तोते हैं। कौआ एक चिड़िया है। निष्कर्ष : I कुछ तोते चिड़ियाँ हैं। II. कौआ एक तोता नहीं है।

In the following question, two statements are given each followed by two conclusions I and IL You have to consider the statements to be true even if they seem to be at variance from commonly known facts. You have to decide which of the given conclusions, if any, follows from the given statements. Statement : I. We are going back again to our ancestors and finding out the importance of Yoga and Pranayam. II. People in west have already opted it. It does not require any external equipment but only body and soul. , Conclusions : I. Ancient science is treasure of many cures and natural remedies of various diseases. II. Technology has overshadowed these ancient sources and introduced new concepts of fitness called gym. / निम्नलिखित प्रश्न में, दो कथन दिए गए हैं जिनके आगे दो निष्कर्ष I और II निकाले गए हैं। आपको मानना है कि कथन सत्य है चाहे वे सामान्यतः ज्ञात तथ्यों से भिन्न प्रतीत होते हों। आपको निर्णय करना है कि दिए गए निष्कर्षों में से कौन-सा निश्चित रूप से कथनों द्वारा सही निकाला जा सकता है/सकते हैं, यदि कोई हो। कथनः I. हम फिर से अपने पूर्वजों की ओर लौट रहे हैं और योग तथा प्राणायाम के महत्व को समझ रहे हैं। II. पश्चिम के लोगों ने इसे पहले से ही अपना रखा है। इसके लिए किसी बाहरी उपकरण की जरूरत नहीं है, केवल आत्मा और शरीर चाहिए। निष्कर्ष : I. प्राचीन विज्ञान कई इलाजों का खजाना और विभिन्न रोगों का प्राकृतिक उपचार है। II. प्रौद्योगिकी ने इन प्राचीन स्रोतों को दबा दिया है और स्वस्थ रहने के लिए नई अवधारणा को जन्म दिया है जिसे जिम कहते हैं।

निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। स्थूल एवं बाह्य पदार्थ सूक्ष्म एवं मानसिक पदार्थों एवं भावों की अपेक्षा अधिक महत्त्व के विषय नहीं हैं। जो व्यक्ति रचनात्मक कार्य करने में समर्थ है, उसे भौतिक स्कूल लाभ अथवा प्रलोभन न तो लुभाते हैं और न ही प्रोत्साहित करते हैं। विश्व में विचारक दस में से एक ही व्यक्ति होता है। उसमें भौतिक महत्त्वकांक्षाएँ अत्यल्प होती हैं। 'पूँजी' का रचयिता कार्ल मार्क्स जीवनभर निर्धनता से जूझता रहा। राज्याधिकारियों ने सुकरात को मरवा डाला, पर वह जीवन के अन्तिम क्षणों में भी शांत था, क्योंकि वह अपने जीवन के लक्ष्य का भली-भांति निर्वाह कर चुका था। यदि उसे पुरस्कृत किया जाता, प्रतिष्ठा के अंबारों से लाद दिया जाता, परन्तु अपना काम न करने दिया जाता तो निश्चय ही वह अनुभव करता कि उसे कठोर रूप में दंडित किया गया है। ऐसे अनेक अवसर आते हैं जब हमें बाहरी सुख-सुविधाएँ आकर्षित करती हैं, वे अच्छे जीवन के लिए अनिवार्य लगने लगती हैं किन्तु महत्त्वपूर्ण यह है कि क्या हमने जीवन का उद्देश्य प्राप्त कर दिया? यदि इसका उत्तर 'हाँ' है तो बाह्य वस्तुओं का अभाव नहीं खलेगा और यदि 'नहीं' है तो हमें अपने को भटकने से बचाना होगा और लक्ष्य की ओर बढ़ना होगा। 'पूँजी' का रचयिता कार्ल मार्क्स कथन से संकेत मिलता है कि 'यूँजी' का अर्थ है:

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। स्थूल एवं बाह्य पदार्थ सूक्ष्म एवं मानसिक पदार्थों एवं भावों की अपेक्षा अधिक महत्त्व के विषय नहीं हैं। जो व्यक्ति रचनात्मक कार्य करने में समर्थ है, उसे भौतिक स्कूली लाभ अथवा प्रलोभन न तो लुभाते हैं और न ही प्रोत्साहित करते हैं। विश्व में विचारक दस में से एक ही व्यक्ति होता है। उसमें भौतिक महत्त्वकांक्षाएँ अत्यल्प होती हैं। 'पूँजी' का रचयिता कार्ल मार्क्स जीवनभर निर्धनता से जूझता रहा। राज्याधिकारियों ने सुकरात को मरवा डाला, पर वह जीवन के अन्तिम क्षणों में भी शांत था, क्योंकि वह अपने जीवन के लक्ष्य का भली-भांति निर्वाह कर चुका था। यदि उसे पुरस्कृत किया जाता, प्रतिष्ठा के अंबारों से लाद दिया जाता, परन्तु अपना काम न करने दिया जाता तो निश्चय ही वह अनुभव करता कि उसे कठोर रूप में दंडित किया गया है। ऐसे अनेक अवसर आते हैं जब हमें बाहरी सुख-सुविधाएँ आकर्षित करती हैं, वे अच्छे जीवन के लिए अनिवार्य लगने लगती हैं किन्तु महत्त्वपूर्ण यह है कि क्या हमने जीवन का उद्देश्य प्राप्त कर दिया? यदि इसका उत्तर 'हाँ' है तो बाह्य वस्तुओं का अभाव नहीं खलेगा और यदि नहीं है तो हमें अपने को भटकने से बचाना होगा और लक्ष्य की ओर बढ़ना होगा। 'पूँजी' का रचयिता कार्ल मार्क्स कथन से संकेत मिलता है कि 'पूँजी' का अर्थ है: