Home
Class
ENGLISH GRAMMAR
पानी काँच के तल को भिगोता है, परंतु पारा...

पानी काँच के तल को भिगोता है, परंतु पारा नहीं , क्यों ? | 11 | पृष्ठ - तनाव | PHYSICS | DAS GUP...

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

दोहरान |घनत्व क्या होता है?|ठोस, द्रव तथा गैस के घनत्व की तुलना |निष्कर्ष |वस्तु पानी पर कब तैरती है ?|बर्फ पानी पर क्यों तैरती है?|क्या पदार्थ अपनी अवस्था को बलत सकता है |अवस्था परिवर्तन |अवस्था परिवर्तन से संबंधित कुछ परिभाषाएं |सारांश

दोहरान |घनत्व क्या होता है?|ठोस, द्रव तथा गैस के घनत्व की तुलना |निष्कर्ष |वस्तु पानी पर कब तैरती है ?|बर्फ पानी पर क्यों तैरती है?|क्या पदार्थ अपनी अवस्था को बलत सकता है |अवस्था परिवर्तन |अवस्था परिवर्तन से संबंधित कुछ परिभाषाएं |सारांश

गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। आसमान में मुक्का मारना कोई बुद्धिमानी का काम नहीं समझा जाता। बिना लक्ष्य के तर्क करना भी बुद्धिमानी नहीं है। हमें भली-भाँति समझ लेने की आवश्यकता है, कि हमारा लक्ष्य क्या है? हम जो कुछ प्रयत्न करने जा रहे हैं वह किसके लिए हैं? साहित्य हम किसके लिए रचते हैं, इतिहास और दर्शन क्यों लिखते और पढ़ते हैं? राजनीतिक,आन्दोलन किस महान् उद्देश्य की सिद्धि के लिए करते हैं? मनुष्य ही वह बड़ी चीज़ है जिसके लिए यह सब किया करते हैं। हमारे सब प्रयत्नों का एक लक्ष्य है, मनुष्य वर्तमान दुर्गति के पंक से उद्धार पाए और भविष्य में सुख और शांति से रह सके। यह शास्त्र, ग्रंथ, कला, नृत्य, राजनीति, समाज-सुधार जंजाल-मात्र हैं, जिससे मनुष्य का भला नहीं होता। मनुष्य आज हाहाकार के भीतर त्राहि-त्राहि पुकार रहा है। हमारे राजनीतिक और समाजिक सुधार से अन्न-वस्त्र की समस्या सुलझ सकती है फिर भी मनुष्य सुखी नहीं बनेगा। उसे सिर्फ अन्न-वस्त्र से ही संतोष नहीं होगा। इसके बाद भी उसका मनुष्य बनना बाकी रह जाता है। साहित्य वही काम करता है। मनुष्य नामक प्राणी पशुओं में ही एक विकसित प्रजाति है और यदि मनुष्यता के गुण और मूल्य उसमें नही हैं तो वह मनुष्य नामक पशु ही है, मनुष्य नहीं। भोजन करना, सोना और वंश-वृद्धि जैसे काम प्रकृति के द्वारा तय है, सच्चा मानव बनने के लिए उसे जो दृष्टि चाहिए, उसे पाने में साहित्य सहायक हो सकता है। मनुष्य के लिए प्रकृति द्वारा तय कामों में नहीं है

घनत्व क्या होता है?|ठोस, द्रव तथा गैस के घनत्व की तुलना |दोहरान |वस्तु पानी पर कब तैरती है ?|निष्कर्ष |बर्फ पानी पर क्यों तैरती है?|क्या पदार्थ अपनी अवस्था को बलत सकता है |अवस्था परिवर्तन |अवस्था परिवर्तन से संबंधित कुछ परिभाषाएं |सारांश

घनत्व क्या होता है?|ठोस, द्रव तथा गैस के घनत्व की तुलना |दोहरान |वस्तु पानी पर कब तैरती है ?|निष्कर्ष |बर्फ पानी पर क्यों तैरती है?|क्या पदार्थ अपनी अवस्था को बलत सकता है |अवस्था परिवर्तन |अवस्था परिवर्तन से संबंधित कुछ परिभाषाएं |सारांश

गिरते हुए जीवन उठने का ढोंग रचते हुए अपने मन को उत्थान का विश्वास भले ही दे लें, परंतु वे संसार की दृष्टि में धूल नहीं डाल सकते और उत्थान के व्यापक कार्यक्रम को धोखा नहीं दे सकते। उनके अस्तित्व पर जो अखर अंकित होंगे, आशा और कर्मण्यता की भावनाओं से भरी हुई शिराओं को उनसे कोई विशेष संदेश कदापि न मिलेगा। देश के नाम पर काम किया जाता है, स्वार्थ-त्याग की दुहाइयाँ दी जाती हैं, गिरे हुए लोगों को उठाने की ध्वनि अलापी जाती हैं, अत्याचारियों को कोसा जाता है और निरंकुशों पर दाँत पीसे जाते हैं, परंतु इन खिलाड़ियों के हदय-पट पर विस्मृति एक बड़ा ही मनोहर पट डाल दिया करती है। हल्के रंग के उड़ते ही जब गहरे रंग की बारी आती है, तब खिलाड़ी लोग अपने-अपने नकाबों को उतार डालते हैं। जो सौजन्य और शिष्टता की मूर्ति थे, जो देशभक्ति और त्याग के अवतार और तपस्या के रूप थे, जो प्रभुओं के उपेखक और दासों के दास थे. आँखें आश्चर्य से देखती हैं कि वे अशिष्टता और स्वार्थ के मैदान में सरपट दौड़ लगा रहे हैं। गालियाँ और बुराइयाँ उनके मुँह और कलेजे के भूषण हो जाती हैं। नेक-नियती केवल उन्हीं के पल्ले रहती है और बेईमानी का कलंक दूसरों के माथे पर। खूब दौड़ लगाते हैं। खूब एड़ी और चोटी का पसीना एक कर देते हैं, परंतु देश की किसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए नहीं, अपने को प्रतिष्ठित और शक्तिशाली बनाने के लिए। निरंकुशों को गालियाँ देते हैं. परंतु स्वयं निरंकुशता का दम भरते हैं। लेखक के अनुसार खिलाड़ी अत्यधिक परिश्रम क्यों करते थे?

गिरते हुए जीवन उठने का ढोंग रचते हुए अपने मन को उत्थान का विश्वास भले ही दे लें, परंतु वे संसार की दृष्टि में धूल नहीं डाल सकते और उत्थान के व्यापक कार्यक्रम को धोखा नहीं दे सकते। उनके अस्तित्व पर जो अखर अंकित होंगे, आशा और कर्मण्यता की भावनाओं से भरी हुई शिराओं को उनसे कोई विशेष संदेश कदापि न मिलेगा। देश के नाम पर काम किया जाता है, स्वार्थ-त्याग की दुहाइयाँ दी जाती हैं, गिरे हुए लोगों को उठाने की ध्वनि अलापी जाती हैं, अत्याचारियों को कोसा जाता है और निरंकुशों पर दाँत पीसे जाते हैं, परंतु इन खिलाड़ियों के हदय-पट पर विस्मृति एक बड़ा ही मनोहर पट डाल दिया करती है। हल्के रंग के उड़ते ही जब गहरे रंग की बारी आती है, तब खिलाड़ी लोग अपने-अपने नकाबों को उतार डालते हैं। जो सौजन्य और शिष्टता की मूर्ति थे, जो देशभक्ति और त्याग के अवतार और तपस्या के रूप थे, जो प्रभुओं के उपेखक और दासों के दास थे. आँखें आश्चर्य से देखती हैं कि वे अशिष्टता और स्वार्थ के मैदान में सरपट दौड़ लगा रहे हैं। गालियाँ और बुराइयाँ उनके मुँह और कलेजे के भूषण हो जाती हैं। नेक-नियती केवल उन्हीं के पल्ले रहती है और बेईमानी का कलंक दूसरों के माथे पर। खूब दौड़ लगाते हैं। खूब एड़ी और चोटी का पसीना एक कर देते हैं, परंतु देश की किसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए नहीं, अपने को प्रतिष्ठित और शक्तिशाली बनाने के लिए। निरंकुशों को गालियाँ देते हैं. परंतु स्वयं निरंकुशता का दम भरते हैं। उत्थान का विश्वास अपने मन को कौन देता है?