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9 व्यक्तियों को एक गोल मेज के चारों ओर इ...

9 व्यक्तियों को एक गोल मेज के चारों ओर इस प्रकार बैठाये जाने के तरीकों की संख्या, कि किसी भी 2 व...

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Jassi, Akash, Garima, Nitin, Vaishali and Kailash are sitting around a round table facing the centre. Kailash is to the left of Garima, who is opposite Akash, Vaishali is between Akash and Jassi. Who is to the left of Nitin? जस्सी, आकाश, गरिमा, नितिन, वैशाली और कैलाश केंद्र की ओर मुख करके एक गोल मेज के चारो तरफ बैठे हुए हैं | कैलाश, गरिमा के बाएं को है, जो आकाश के सामने है | वैशाली, आकाश और जस्सी के बीच है | नितिन के बाएं को कौन है ?

A study was made for the number of persons of different age groups visited in a library in a week which is shown in the histogram. Study the histogram and answer the questions given below. What percentage of the total number of persons visiting the library in the week was the number of persons of age group 25-30 years? एक सप्ताह में एक पुस्तकालय में जाने वाले विभिन्न आयु समूहों के व्यक्तियों की संख्या के लिए एक अध्ययन किया गया था जो हिस्टोग्राम में दिखाया गया है। हिस्टोग्राम का अध्ययन करें और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें सप्ताह में पुस्तकालय जाने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या का कितना प्रतिशत 25-30 वर्ष आयु वर्ग के व्यक्तियों की संख्या थी

The bar graph given below presents the number of books sold by a bookseller during different months of a year. नीचे दिया गया दंड आरेख एक पुस्तक विक्रेता के द्वारा किसी वर्ष के अलग-अलग महीनों में बेची गयी पुस्तकों की संख्या को दर्शाता है | What is the total number of books sold by the bookseller in the year? वर्ष में इस पुस्तक विक्रेता के द्वारा बेची गयी पुस्तकों की संख्या कुल कितनी है ?

A certain number of persons can complete a work in 34 days working 9 hours a day. If the number of persons is decreased by 40%, then how many hours a day should the remaining persons work to complete the work in 51 days ? कुछ व्यक्ति किसी कार्य को एक दिन में 9 घंटे कार्य करते हुए 34 दिनों में पूरा कर सकते हैं | यदि व्यक्तियों की संख्या 40% से कम कर दी जाए, तो शेष व्यक्तियों को इस कार्य को 51 दिनों में पूरा करने के लिए दिन में कितने घंटे कार्य करना पड़ेगा ?

निर्देशः गद्यांश को-पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। लघु उद्योग उन उद्योगों को कहा जाता है जिनके समारम्भ एवं आयोजन के लिए भारी-भरकम साधनों की आवश्यकता नहीं पड़ती। वे थोड़े-से स्थान पर, थोड़ी पूँजी और अल्प साधनों से ही आरम्भ किए जा सकते हैं। फिर भी उनसे सुनियोजित ढंग से अधिकाधिक लाभ प्राप्त करके देश की निर्धनता, गरीबी और विषमताओं से एक सीमा तक लड़ा जा सकता है। अपने आकार-प्रकार तथा साधनों की लघुता व अल्पता के कारण ही इस प्रकार के उद्योग-धंधों को कुटीर उद्योग भी कहा जाता है। इस प्रकार के उद्योग-धंधे अपने घर में भी आरम्भ किए जा सकते हैं और अपने सीमित साधनों का सदुपयोग करके आर्थिक लाभ कमाया जा सकता है आर सुखी-समृद्ध बना जा सकता है। भारत जैसे देश के लिए तो इस प्रकार के लघु उद्योगों का महत्त्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ युवाओं की एक बहुत बड़ी संख्या बेरोजगार है। इसी कारण महात्मा गांधी ने मशीनीकरण का विरोध किया था। उनकी यह स्पष्ट धारणा थी कि लघु उद्योगों को प्रश्रय देने से लोग स्वावलम्बी बनेंगे, मजदूर-किसान फसलों की बुआई-कटाई से फुर्सत पाकर अपने खाली समय का सदुपयोग भी करेंगे। इस प्रकार आर्थिक समृद्धि तो बढ़ेगी ही, साथ ही लोगों को अपने घर के पास रोजगार मिल सकेगा। लघु उद्योगों को प्रश्रय देने के संदर्भ में गांधीजी की क्या धारणा थी ?

लघु उद्योग उन उद्योगों को कहा जाता है जिनके समारम्भ एवं आयोजन के लिए भारी-भरकम साधनों की आवश्यकता नहीं पड़ती। वे थोड़े-से स्थान पर, थोड़ी पूँजी और अल्प साधनों से ही आरम्भ किए जा सकते हैं। फिर भी उनसे सुनियोजित ढंग से अधिकाधिक लाभ प्राप्त करके देश की निर्धनता, गरीबी और विषमताओं से एक सीमा तक लड़ा जा सकता है। अपने आकार-प्रकार तथा साधनों की लघुता व अल्पता के कारण ही इस प्रकार के उद्योग-धंधों को कुटीर उद्योग भी कहा जाता है। इस प्रकार के उद्योग-धंधे अपने घर में भी आरम्भ किए जा सकते हैं और अपने सीमित साधनों का सदुपयोग करके आर्थिक लाभ कमाया जा सकता है आर सुखी-समृद्ध बना जा सकता है। भारत जैसे देश के लिए तो इस प्रकार के लघु उद्योगों का महत्त्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ युवाओं की एक बहुत बड़ी संख्या बेरोजगार है। इसी कारण महात्मा गांधी ने मशीनीकरण का विरोध किया था। उनकी यह स्पष्ट धारणा थी कि लघु उद्योगों को प्रश्रय देने से लोग स्वावलम्बी बनेंगे, मजदूर किसान फसलों की बुआई कटाई से फुर्सत पाकर अपने खाली समय का ति । सदुपयोग भी करेंगे। इस प्रकार आर्थिक समृद्धि तो बढ़ेगी ही, साथ ही लोगों को अपने घर के पास रोजगार मिल सकेगा। लघु उद्योगों को प्रश्रय देने के संदर्भ में गांधीजी की क्या धारणा थी?

निर्देशः गद्यांश को-पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। लघु उद्योग उन उद्योगों को कहा जाता है जिनके समारम्भ एवं आयोजन के लिए भारी-भरकम साधनों की आवश्यकता नहीं पड़ती। वे थोड़े-से स्थान पर, थोड़ी पूँजी और अल्प साधनों से ही आरम्भ किए जा सकते हैं। फिर भी उनसे सुनियोजित ढंग से अधिकाधिक लाभ प्राप्त करके देश की निर्धनता, गरीबी और विषमताओं से एक सीमा तक लड़ा जा सकता है। अपने आकार-प्रकार तथा साधनों की लघुता व अल्पता के कारण ही इस प्रकार के उद्योग-धंधों को कुटीर उद्योग भी कहा जाता है। इस प्रकार के उद्योग-धंधे अपने घर में भी आरम्भ किए जा सकते हैं और अपने सीमित साधनों का सदुपयोग करके आर्थिक लाभ कमाया जा सकता है आर सुखी-समृद्ध बना जा सकता है। भारत जैसे देश के लिए तो इस प्रकार के लघु उद्योगों का महत्त्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ युवाओं की एक बहुत बड़ी संख्या बेरोजगार है। इसी कारण महात्मा गांधी ने मशीनीकरण का विरोध किया था। उनकी यह स्पष्ट धारणा थी कि लघु उद्योगों को प्रश्रय देने से लोग स्वावलम्बी बनेंगे, मजदूर-किसान फसलों की बुआई-कटाई से फुर्सत पाकर अपने खाली समय का सदुपयोग भी करेंगे। इस प्रकार आर्थिक समृद्धि तो बढ़ेगी ही, साथ ही लोगों को अपने घर के पास रोजगार मिल सकेगा। भारत जैसे देश के लिए लघु उद्योग-धंधों का महत्त्व क्यों बढ़ जाता है ?

निर्देशः गद्यांश को-पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। लघु उद्योग उन उद्योगों को कहा जाता है जिनके समारम्भ एवं आयोजन के लिए भारी-भरकम साधनों की आवश्यकता नहीं पड़ती। वे थोड़े-से स्थान पर, थोड़ी पूँजी और अल्प साधनों से ही आरम्भ किए जा सकते हैं। फिर भी उनसे सुनियोजित ढंग से अधिकाधिक लाभ प्राप्त करके देश की निर्धनता, गरीबी और विषमताओं से एक सीमा तक लड़ा जा सकता है। अपने आकार-प्रकार तथा साधनों की लघुता व अल्पता के कारण ही इस प्रकार के उद्योग-धंधों को कुटीर उद्योग भी कहा जाता है। इस प्रकार के उद्योग-धंधे अपने घर में भी आरम्भ किए जा सकते हैं और अपने सीमित साधनों का सदुपयोग करके आर्थिक लाभ कमाया जा सकता है आर सुखी-समृद्ध बना जा सकता है। भारत जैसे देश के लिए तो इस प्रकार के लघु उद्योगों का महत्त्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ युवाओं की एक बहुत बड़ी संख्या बेरोजगार है। इसी कारण महात्मा गांधी ने मशीनीकरण का विरोध किया था। उनकी यह स्पष्ट धारणा थी कि लघु उद्योगों को प्रश्रय देने से लोग स्वावलम्बी बनेंगे, मजदूर-किसान फसलों की बुआई-कटाई से फुर्सत पाकर अपने खाली समय का सदुपयोग भी करेंगे। इस प्रकार आर्थिक समृद्धि तो बढ़ेगी ही, साथ ही लोगों को अपने घर के पास रोजगार मिल सकेगा। गद्यांश के अनुसार 'प्रश्रय' शब्द का भाव है: