प्रिंसेप और amp; पियादस्सी | 12 | राजा, किसान और कस्बे | इतिहास | सूक्ष्म अवधारणाएं | संशय
प्रिंसेप और amp; पियादस्सी | 12 | राजा, किसान और कस्बे | इतिहास | सूक्ष्म अवधारणाएं | संशय
Similar Questions
Explore conceptually related problems
किसान और काश्तकार|OMR
किसान और काश्तकार|OMR
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये थकान के कारण राजा को नींद आने लगी। इतने में किसी की कर्कश ध्वनि से उसकी नींद टूट गई। राजा को वहाँ कोई दिखाई न दिया। तभी उसे उसी कर्कश वाणी में सुनाई दिया,"पकड़ो, पकड़ो यह व्यक्ति जो सोया है, राजा है इसके गले में मोतियों की माला है। इसके पास अनेक आभूषण-अलंकार हैं लूट लो, सब लूट लो। इसे मारकर झाड़ी में डाल दो।" राजा यह सुनकर हड़बड़ा गया। उसने उठकर देखा कि सामने पेड़ की डाल पर एक तोता बैठा था। वही कड़वी वाणी में यह सब बोल रहा था। राजा आश्चर्य और भय से भर गया। जैसे ही वह घोड़े पर सवार होकर वहाँ से चलने लगा तो तोता फिर बोल पड़ा, "राजा जाग गया। देखो, देखो वह भागा जा रहा है। पकड़ो इसे पकड़ लो राजा गया। राजा उस स्थान से दूर निकल कर एक पर्वत की तलहटी में जा पहुंचा। उसे एक मधुर वाणी सुनाई दी, "आइए राजन, आइए। ऋषियों के इस पावन आश्रम में आपका स्वागत है।" राजा ने आश्चर्य से भरकर सामने वृक्ष की डाल पर बैठे एक तोते को देखा। उसे सरोवर के किनारे मिले तोते और इस तोते के रूप, रंग और आकार-प्रकार में काफी समानता लगी। राजा के मन में उठी शंका का निवारण करते हुए तोते ने कहा कि वह उसका जुड़वा भाई सुपंखी हैं और वह स्वयं सुकंठी है। समय के फेर ने दोनों को अलग कर दिया। वह चोरों की बस्ती में पला-बढ़ा है, तभी उसका आचरण उस परिवेश के समान ही कटु है। वह ऋषियों के आश्रम में पलने-बढ़ने के कारण इतना विनम्र है। वह चाहता है कि सुपंखी भी यहाँ आकर रहे, परन्तु अब उसके संस्कार इतने गहरे हो गए हैं कि आश्रम का वातावरण उसे बाँध नहीं पाता। राजा ने तोते की बात को सुना और वह समझ गया कि दोनों के व्यवहार में इतना अंतर क्यों है। सुकंठी तथा सुपंखी के स्वभाव में भिन्नता क्यों है?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये थकान के कारण राजा को नींद आने लगी। इतने में किसी की कर्कश ध्वनि से उसकी नींद टूट गई। राजा को वहाँ कोई दिखाई न दिया। तभी उसे उसी कर्कश वाणी में सुनाई दिया,"पकड़ो, पकड़ो यह व्यक्ति जो सोया है, राजा है इसके गले में मोतियों की माला है। इसके पास अनेक आभूषण-अलंकार हैं लूट लो, सब लूट लो। इसे मारकर झाड़ी में डाल दो।" राजा यह सुनकर हड़बड़ा गया। उसने उठकर देखा कि सामने पेड़ की डाल पर एक तोता बैठा था। वही कड़वी वाणी में यह सब बोल रहा था। राजा आश्चर्य और भय से भर गया। जैसे ही वह घोड़े पर सवार होकर वहाँ से चलने लगा तो तोता फिर बोल पड़ा, "राजा जाग गया। देखो, देखो वह भागा जा रहा है। पकड़ो इसे पकड़ लो राजा गया। राजा उस स्थान से दूर निकल कर एक पर्वत की तलहटी में जा पहुंचा। उसे एक मधुर वाणी सुनाई दी, "आइए राजन, आइए। ऋषियों के इस पावन आश्रम में आपका स्वागत है।" राजा ने आश्चर्य से भरकर सामने वृक्ष की डाल पर बैठे एक तोते को देखा। उसे सरोवर के किनारे मिले तोते और इस तोते के रूप, रंग और आकार-प्रकार में काफी समानता लगी। राजा के मन में उठी शंका का निवारण करते हुए तोते ने कहा कि वह उसका जुड़वा भाई सुपंखी हैं और वह स्वयं सुकंठी है। समय के फेर ने दोनों को अलग कर दिया। वह चोरों की बस्ती में पला-बढ़ा है, तभी उसका आचरण उस परिवेश के समान ही कटु है। वह ऋषियों के आश्रम में पलने-बढ़ने के कारण इतना विनम्र है। वह चाहता है कि सुपंखी भी यहाँ आकर रहे, परन्तु अब उसके संस्कार इतने गहरे हो गए हैं कि आश्रम का वातावरण उसे बाँध नहीं पाता। राजा ने तोते की बात को सुना और वह समझ गया कि दोनों के व्यवहार में इतना अंतर क्यों है। इस गद्यांश से लेखक किस बात की पुष्टि कर रहा है?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये थकान के कारण राजा को नींद आने लगी। इतने में किसी की कर्कश ध्वनि से उसकी नींद टूट गई। राजा को वहाँ कोई दिखाई न दिया। तभी उसे उसी कर्कश वाणी में सुनाई दिया,"पकड़ो, पकड़ो यह व्यक्ति जो सोया है, राजा है इसके गले में मोतियों की माला है। इसके पास अनेक आभूषण-अलंकार हैं लूट लो, सब लूट लो। इसे मारकर झाड़ी में डाल दो।" राजा यह सुनकर हड़बड़ा गया। उसने उठकर देखा कि सामने पेड़ की डाल पर एक तोता बैठा था। वही कड़वी वाणी में यह सब बोल रहा था। राजा आश्चर्य और भय से भर गया। जैसे ही वह घोड़े पर सवार होकर वहाँ से चलने लगा तो तोता फिर बोल पड़ा, "राजा जाग गया। देखो, देखो वह भागा जा रहा है। पकड़ो इसे पकड़ लो राजा गया। राजा उस स्थान से दूर निकल कर एक पर्वत की तलहटी में जा पहुंचा। उसे एक मधुर वाणी सुनाई दी, "आइए राजन, आइए। ऋषियों के इस पावन आश्रम में आपका स्वागत है।" राजा ने आश्चर्य से भरकर सामने वृक्ष की डाल पर बैठे एक तोते को देखा। उसे सरोवर के किनारे मिले तोते और इस तोते के रूप, रंग और आकार-प्रकार में काफी समानता लगी। राजा के मन में उठी शंका का निवारण करते हुए तोते ने कहा कि वह उसका जुड़वा भाई सुपंखी हैं और वह स्वयं सुकंठी है। समय के फेर ने दोनों को अलग कर दिया। वह चोरों की बस्ती में पला-बढ़ा है, तभी उसका आचरण उस परिवेश के समान ही कटु है। वह ऋषियों के आश्रम में पलने-बढ़ने के कारण इतना विनम्र है। वह चाहता है कि सुपंखी भी यहाँ आकर रहे, परन्तु अब उसके संस्कार इतने गहरे हो गए हैं कि आश्रम का वातावरण उसे बाँध नहीं पाता। राजा ने तोते की बात को सुना और वह समझ गया कि दोनों के व्यवहार में इतना अंतर क्यों है। प्रस्तुत कथा तोतों के बच्चों को आधार बनाकर लिखी गई एक
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये थकान के कारण राजा को नींद आने लगी। इतने में किसी की कर्कश ध्वनि से उसकी नींद टूट गई। राजा को वहाँ कोई दिखाई न दिया। तभी उसे उसी कर्कश वाणी में सुनाई दिया,"पकड़ो, पकड़ो यह व्यक्ति जो सोया है, राजा है इसके गले में मोतियों की माला है। इसके पास अनेक आभूषण-अलंकार हैं लूट लो, सब लूट लो। इसे मारकर झाड़ी में डाल दो।" राजा यह सुनकर हड़बड़ा गया। उसने उठकर देखा कि सामने पेड़ की डाल पर एक तोता बैठा था। वही कड़वी वाणी में यह सब बोल रहा था। राजा आश्चर्य और भय से भर गया। जैसे ही वह घोड़े पर सवार होकर वहाँ से चलने लगा तो तोता फिर बोल पड़ा, "राजा जाग गया। देखो, देखो वह भागा जा रहा है। पकड़ो इसे पकड़ लो राजा गया। राजा उस स्थान से दूर निकल कर एक पर्वत की तलहटी में जा पहुंचा। उसे एक मधुर वाणी सुनाई दी, "आइए राजन, आइए। ऋषियों के इस पावन आश्रम में आपका स्वागत है।" राजा ने आश्चर्य से भरकर सामने वृक्ष की डाल पर बैठे एक तोते को देखा। उसे सरोवर के किनारे मिले तोते और इस तोते के रूप, रंग और आकार-प्रकार में काफी समानता लगी। राजा के मन में उठी शंका का निवारण करते हुए तोते ने कहा कि वह उसका जुड़वा भाई सुपंखी हैं और वह स्वयं सुकंठी है। समय के फेर ने दोनों को अलग कर दिया। वह चोरों की बस्ती में पला-बढ़ा है, तभी उसका आचरण उस परिवेश के समान ही कटु है। वह ऋषियों के आश्रम में पलने-बढ़ने के कारण इतना विनम्र है। वह चाहता है कि सुपंखी भी यहाँ आकर रहे, परन्तु अब उसके संस्कार इतने गहरे हो गए हैं कि आश्रम का वातावरण उसे बाँध नहीं पाता। राजा ने तोते की बात को सुना और वह समझ गया कि दोनों के व्यवहार में इतना अंतर क्यों है। लेखक इस गद्यांश में कहना चाहता है कि
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये थकान के कारण राजा को नींद आने लगी। इतने में किसी की कर्कश ध्वनि से उसकी नींद टूट गई। राजा को वहाँ कोई दिखाई न दिया। तभी उसे उसी कर्कश वाणी में सुनाई दिया,"पकड़ो, पकड़ो यह व्यक्ति जो सोया है, राजा है इसके गले में मोतियों की माला है। इसके पास अनेक आभूषण-अलंकार हैं लूट लो, सब लूट लो। इसे मारकर झाड़ी में डाल दो।" राजा यह सुनकर हड़बड़ा गया। उसने उठकर देखा कि सामने पेड़ की डाल पर एक तोता बैठा था। वही कड़वी वाणी में यह सब बोल रहा था। राजा आश्चर्य और भय से भर गया। जैसे ही वह घोड़े पर सवार होकर वहाँ से चलने लगा तो तोता फिर बोल पड़ा, "राजा जाग गया। देखो, देखो वह भागा जा रहा है। पकड़ो इसे पकड़ लो राजा गया। राजा उस स्थान से दूर निकल कर एक पर्वत की तलहटी में जा पहुंचा। उसे एक मधुर वाणी सुनाई दी, "आइए राजन, आइए। ऋषियों के इस पावन आश्रम में आपका स्वागत है।" राजा ने आश्चर्य से भरकर सामने वृक्ष की डाल पर बैठे एक तोते को देखा। उसे सरोवर के किनारे मिले तोते और इस तोते के रूप, रंग और आकार-प्रकार में काफी समानता लगी। राजा के मन में उठी शंका का निवारण करते हुए तोते ने कहा कि वह उसका जुड़वा भाई सुपंखी हैं और वह स्वयं सुकंठी है। समय के फेर ने दोनों को अलग कर दिया। वह चोरों की बस्ती में पला-बढ़ा है, तभी उसका आचरण उस परिवेश के समान ही कटु है। वह ऋषियों के आश्रम में पलने-बढ़ने के कारण इतना विनम्र है। वह चाहता है कि सुपंखी भी यहाँ आकर रहे, परन्तु अब उसके संस्कार इतने गहरे हो गए हैं कि आश्रम का वातावरण उसे बाँध नहीं पाता। राजा ने तोते की बात को सुना और वह समझ गया कि दोनों के व्यवहार में इतना अंतर क्यों है। प्रस्तुत गद्यांश का उपर्युक्त शीर्षक बताइये।
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये थकान के कारण राजा को नींद आने लगी। इतने में किसी की कर्कश ध्वनि से उसकी नींद टूट गई। राजा को वहाँ कोई दिखाई न दिया। तभी उसे उसी कर्कश वाणी में सुनाई दिया, "पकड़ो, पकड़ो यह व्यक्ति जो सोया है, राजा है इसके गले में मोतियों की माला है। इसके पास अनेक आभूषण-अलंकार हैं लूट लो, सब लूट लो। इसे मारकर झाड़ी में डाल दो।" राजा यह सुनकर हड़बड़ा गया। उसने उठकर देखा कि सामने पेड़ की डाल पर एक तोता बैठा था। वही कड़वी वाणी में यह सब बोल रहा था। राजा आश्चर्य और भय से भर गया। जैसे ही वह घोड़े पर सवार होकर वहाँ से चलने लगा तो तोता फिर बोल पड़ा, "राजा जाग गया। देखो, देखो वह भागा जा रहा है। पकड़ो इसे पकड़ लो राजा गया। राजा उस स्थान से दूर निकल कर एक पर्वत की तलहटी में जा पहुंचा। उसे एक मधुर वाणी सुनाई दी, "आइए राजन, आइए। ऋषियों के इस पावन आश्रम में आपका स्वागत है।" राजा ने आश्चर्य से भरकर सामने वृक्ष की डाल पर बैठे एक तोते को देखा। उसे सरोवर के किनारे मिले तोते और इस तोते के रूप, रंग और आकार-प्रकार में काफी समानता लगी।राजा के मन में उठी शंका का निवारण करते हुए तोते ने कहा कि वह उसका जुड़वा भाई सुपंखी हैं और वह स्वयं सुकंठी है। समय के फेर ने दोनों को अलग कर दिया। वह चोरों की बस्ती में पला-बढ़ा है, तभी उसका आचरण उस परिवेश के समान ही कटु है। वह ऋषियों के आश्रम में पलने-बढ़ने के कारण इतना विनम्र है। वह चाहता है कि सुपंखी भी यहाँ आकर रहे, परन्तु अब उसके संस्कार इतने गहरे हो गए हैं कि आश्रम का वातावरण उसे बाँध नहीं पाता। राजा ने तोते की बात को सुना और वह समझ गया कि दोनों के व्यवहार में इतना अंतर क्यों है। सुकंठी तथा सुपंखी के स्वभाव में भिन्नता क्यों है?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये थकान के कारण राजा को नींद आने लगी। इतने में किसी की कर्कश ध्वनि से उसकी नींद टूट गई। राजा को वहाँ कोई दिखाई न दिया। तभी उसे उसी कर्कश वाणी में सुनाई दिया, "पकड़ो, पकड़ो यह व्यक्ति जो सोया है, राजा है इसके गले में मोतियों की माला है। इसके पास अनेक आभूषण-अलंकार हैं लूट लो, सब लूट लो। इसे मारकर झाड़ी में डाल दो।" राजा यह सुनकर हड़बड़ा गया। उसने उठकर देखा कि सामने पेड़ की डाल पर एक तोता बैठा था। वही कड़वी वाणी में यह सब बोल रहा था। राजा आश्चर्य और भय से भर गया। जैसे ही वह घोड़े पर सवार होकर वहाँ से चलने लगा तो तोता फिर बोल पड़ा, "राजा जाग गया। देखो, देखो वह भागा जा रहा है। पकड़ो इसे पकड़ लो राजा गया। राजा उस स्थान से दूर निकल कर एक पर्वत की तलहटी में जा पहुंचा। उसे एक मधुर वाणी सुनाई दी, "आइए राजन, आइए। ऋषियों के इस पावन आश्रम में आपका स्वागत है।" राजा ने आश्चर्य से भरकर सामने वृक्ष की डाल पर बैठे एक तोते को देखा। उसे सरोवर के किनारे मिले तोते और इस तोते के रूप, रंग और आकार-प्रकार में काफी समानता लगी।राजा के मन में उठी शंका का निवारण करते हुए तोते ने कहा कि वह उसका जुड़वा भाई सुपंखी हैं और वह स्वयं सुकंठी है। समय के फेर ने दोनों को अलग कर दिया। वह चोरों की बस्ती में पला-बढ़ा है, तभी उसका आचरण उस परिवेश के समान ही कटु है। वह ऋषियों के आश्रम में पलने-बढ़ने के कारण इतना विनम्र है। वह चाहता है कि सुपंखी भी यहाँ आकर रहे, परन्तु अब उसके संस्कार इतने गहरे हो गए हैं कि आश्रम का वातावरण उसे बाँध नहीं पाता। राजा ने तोते की बात को सुना और वह समझ गया कि दोनों के व्यवहार में इतना अंतर क्यों है। इस गद्यांश से लेखक किस बात की पुष्टि कर रहा है?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये थकान के कारण राजा को नींद आने लगी। इतने में किसी की कर्कश ध्वनि से उसकी नींद टूट गई। राजा को वहाँ कोई दिखाई न दिया। तभी उसे उसी कर्कश वाणी में सुनाई दिया, "पकड़ो, पकड़ो यह व्यक्ति जो सोया है, राजा है इसके गले में मोतियों की माला है। इसके पास अनेक आभूषण-अलंकार हैं लूट लो, सब लूट लो। इसे मारकर झाड़ी में डाल दो।" राजा यह सुनकर हड़बड़ा गया। उसने उठकर देखा कि सामने पेड़ की डाल पर एक तोता बैठा था। वही कड़वी वाणी में यह सब बोल रहा था। राजा आश्चर्य और भय से भर गया। जैसे ही वह घोड़े पर सवार होकर वहाँ से चलने लगा तो तोता फिर बोल पड़ा, "राजा जाग गया। देखो, देखो वह भागा जा रहा है। पकड़ो इसे पकड़ लो राजा गया। राजा उस स्थान से दूर निकल कर एक पर्वत की तलहटी में जा पहुंचा। उसे एक मधुर वाणी सुनाई दी, "आइए राजन, आइए। ऋषियों के इस पावन आश्रम में आपका स्वागत है।" राजा ने आश्चर्य से भरकर सामने वृक्ष की डाल पर बैठे एक तोते को देखा। उसे सरोवर के किनारे मिले तोते और इस तोते के रूप, रंग और आकार-प्रकार में काफी समानता लगी।राजा के मन में उठी शंका का निवारण करते हुए तोते ने कहा कि वह उसका जुड़वा भाई सुपंखी हैं और वह स्वयं सुकंठी है। समय के फेर ने दोनों को अलग कर दिया। वह चोरों की बस्ती में पला-बढ़ा है, तभी उसका आचरण उस परिवेश के समान ही कटु है। वह ऋषियों के आश्रम में पलने-बढ़ने के कारण इतना विनम्र है। वह चाहता है कि सुपंखी भी यहाँ आकर रहे, परन्तु अब उसके संस्कार इतने गहरे हो गए हैं कि आश्रम का वातावरण उसे बाँध नहीं पाता। राजा ने तोते की बात को सुना और वह समझ गया कि दोनों के व्यवहार में इतना अंतर क्यों है। प्रस्तुत कथा तोतों के बच्चों को आधार बनाकर लिखी गई एक
Recommended Questions
- प्रिंसेप और amp; पियादस्सी | 12 | राजा, किसान और कस्बे | इतिहास | सूक्...
Text Solution
|
- अभाज्य गुणनखंडन विधि द्वारा निन्मलिखित पूर्णांकों के H.C.F. और L.C.M. ...
Text Solution
|
- मंत्री कैसा राजा ढूँढना चाहता था और क्यों?
Text Solution
|
- नमक सत्याग्रह | पृश्ठभूमि, कारण , परिणाम | किसान , मजदुर और जन - जातिय...
Text Solution
|
- नमक सत्याग्रह | किसान मजदूर और जनजातियों का विद्रोह
Text Solution
|
- CBSE | इतिहास और परिवर्तन
Text Solution
|
- भारत की खोज - सिंधु घाटी सभ्यता | लेख | महाकाव्य ,इतिहास ,परंपरा और मि...
Text Solution
|
- दूरी और विस्थापन |चाल और वेग
Text Solution
|
- जीव और पर्यावरण|जैव विविधता और संरक्षण
Text Solution
|