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बेकिंग सोडा( baking soda ) का रासायनिक न...

बेकिंग सोडा( baking soda ) का रासायनिक नाम तथा सूत्र बनानेकी विधिलिखिए । | 10 | अम्ल, क्षार एवं...

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पिछली कक्षा का विवरण|धात्विक ऑक्साइड की अम्ल के साथ अभिक्रिया|अधात्विक ऑक्साइड और क्षार|अम्ल एवं क्षारक परस्पर कैसे अभिक्रिया करते हैं|अम्ल तथा क्षारकों में समानताए|जलीय विलयन में अम्ल या क्षारक का क्या होता हैं|जल के साथ अम्लों तथा क्षारकों का व्यवहार

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रासायनिक तुल्यता का नियम|अम्ल-क्षार अनुमापन|रेडॉक्स अनुमापन- प्रश्न|OMR

ऑस्टवाल्ड का तनुता नियम|अम्ल व क्षार का आयनन या वियोजन|आयनन की मात्रा|क्षार को जल में वियोजन|अम्ल व क्षारों के प्रबलता|बहु-प्रोटोनिक अम्ल व बहु-प्रोटोनिक क्षारक|जल का आयनन या जल का आयनिक गुणनफल|pH मान की अवधारणा|pH स्केल|pH, pOH तथा pK_w में सम्बन्ध|लवणों का जल-अपघटन और विलयन का pH|OMR|Summary

क्षार की धातु के साथ अभिक्रिया|धातु के कार्बोनेट एवं बाइकार्बोनेटसे अम्लों की अभिक्रिया|चुने के पानी में कार्बन डाई ऑक्साइड प्रवाहित करवाना|उदासिनीकरण अभिक्रिया|धातु के ऑक्साइड की अम्ल से अभिक्रिया|अधातु के ऑक्साइड की क्षार से अभिक्रिया|सभी अम्लों एवं क्षारों में क्या समानता है?|ग्लूकोस एवं एल्कोहॉल विद्युत का चालन नहीं करते है|सारांश

दोहरान |विरंजक चूर्ण|विरंजक चूर्ण का उपयोग|विरंजक चूर्ण की कार्बन डाइऑक्साइड से अभिक्रिया |विरंजक चूर्ण की सल्फ्युरिक अम्ल से अभिक्रिया |बेकिंग सोडा |बेकिंग सोडा बनाने की विधि |बेकिंग सोडा का उपयोग|सारांश

विटामिन |कुछ महत्वपूर्ण विटामिंस के लक्षण, स्त्रोत तथा उनकी कमी से उत्पन्न होने वाली बीमारियाँ |हॉर्मोन्स |न्यूक्लिक अम्ल |न्यूक्लिक अम्लों का रासायनिक संघटन |न्यूक्लिक अम्ल के प्रकार |DNA की आण्विक संरचना |RNA की आण्विक संरचना |न्यूक्लिक अम्लों के जैविक

निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मानव के लिए विचार तथा अनुभव में जो कुछ भी श्रेष्ठ है, उदात्त है व इसका अथवा उसका नहीं है जातिगत अथवा देशगत नहीं है, वह सबका है, सारे विश्व का है। समस्त ज्ञान, विज्ञान और सभ्यता, सारी मानवता की विरासत है। पूर्व और पश्चिम, उत्तर और दक्षिण के भेद, अक्षांश और देशान्तर का भेद तथा जलवायु और भौगोलिक सीमा के भेद सर्वथा निराधार हैं। सम्प्रदाय, समुदाय और जाति के नाम पर आदशौं, मूल्यों की स्थापना करना, संकीर्णता के वातावरण में मानवता के दम घोंटना-सा है। जो कुछ भी उपलब्धि है, वह चाहे जिस भू-भाग की उपज हो। महापुरुष विरोधी नहीं होते, एक-दूसरे के पूरक होते हैं। महापुरुष में अपने देश की विशेषता होती है। विवेकशील मनुष्य नम्रतापूर्वक महापुरुषों से शिक्षा ग्रहरण कर अपने जीवन को प्रकाशित करने का प्रयत्न करता है। समस्त मानवता उसके प्रति कृतज्ञ है। किन्तु अब हमें उनसे आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि ज्ञान की इतिश्री नहीं होती। संसार एक खुली पाठशाला है, जीवन एक खुली पुस्तक है, विकास की क्रिया के मूल में मानव की पूर्ण बनने की अपनी प्रेरणा है। विकास के लिए समन्वय का भाव होना परम आवश्यक है। यदि हम विभिन्न विचारधाराओं एवं उनके जन्मदाता महापुरुषों का पूर्ण खण्डन करें तो विकास अवरुद्ध हो जायेगा। किसी धर्म विशेष या मान्यता के खूटे के साथ संकीर्ण भाव से बंधकर तथा परम्पराओं और रूढ़ियों से जकड़े हुए हम आगे नहीं बढ़ सकते। मानव को मानव रूप में सम्मानित करके ही हम जातीयता, प्रान्तीयता, क्षुद्र राष्ट्रीयता और अन्तर्राष्ट्रीयता के भेद को तोड़ सकते हैं। आज मानव, मानव से दूर हटता जा रहा है। वह भूल चुका है कि देश, धर्म और जाति के भिन्न होते हुए भी हम सर्वप्रथम मानव हैं और समान हैं तथा सभी की भावनाएं और लक्ष्य एक ही हैं। सत्ताधारी मनुष्य दूसरों को कुचलकर सुख- सुवध ाओं पर एकाधिकार कर लेना चाहता है लेकिन एक आकाश के नीचे रहने वाले इन्सान तो सब एक हैं भले ही कोई कुदाल लेकर श्रमिका का कार्य करता हो, कोई कलम लेकर दफ्तर का, किन्तु लक्ष्य एक है- समाज का अभ्युदय। मानव का नाता श्रेष्ठ नाता है। नौकर कहकर पुकारना मानो मानव का अपमान है। सहयोगी, सहायक अथवा सस्नेह उसके नाम से सम्बोधित करना मधुर है। जेल और फांसी का विध र मानवता का कलंक है। एक सीमा एक दण्ड भी आवश्यक होता है, लेकिन दण्ड का आतंक समाज को पंगु बना देता है। हमें अपराध वृत्ति का शमन करके अपराधी को शिष्ट एवं सभ्य मानव बनाना चाहिए। दया मानवता का सार है। दया छोड़कर सत्य भी सत्य नहीं है। दया प्रेरित असत्य भी व्यावहारिक सत्य नहीं है। दया धर्म मानवधर्म हैं। . प्रस्तुत गद्यांश मुख्यतः किस भावना से ओतप्रोत है?