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भोजन को लेकर पौधे व जन्तु आपस में किस प्...

भोजन को लेकर पौधे व जन्तु आपस में किस प्रकार संबंधित हैं? | 10 | जैविक प्रिक्रियाएँ पोषण , परिवह...

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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये लेखक ने बताया है कि कितना अच्छा होता, यदि नाक होती ही नहीं। नाक के कारण मनुष्य चिंता में पड़कर परेशान रहता है। नाक बचाने के लिए मुकदमेबाजी में पड़ता है। ऋण लेकर बड़े-बड़े उत्सव करता है। दूसरों के मुकाबले में खड़ा होने के लिए महँगी किश्तों में टी.वी., फ्रिज और कूलर खरीदता है। बच्चों को महँगे स्कूलों में पढ़ाता है। कहने का अर्थ यह है कि वह हर छोटी-से-छोटी बात को नाक का प्रश्न बना लेता है। व्यापार करने वाले लोग पुलिस, आयकर अधिकारियों तथा अन्य अनेक लोगों को रिश्वत देते हैं। बुरा समय आने पर यही व्यक्ति दूसरों के समाने अपनी नाक को रगड़ने लगता है। लेखक ने नाक की अच्छाइयाँ भी बताई हैं। नाक का हमारे मुख पर बड़ा महत्त्व है। मुख पर सुंदर लंबी नाक शोभा बढ़ाती है। अतः कुछ लोग नाक न होने पर नाक लगाते हैं। अतः नाक हमारे लिए बहुत आवश्यक है। चाहे वह लंबी, छोटी, चपटी किसी भी प्रकार की हो। नाक के बिना मुनष्य का मुख ऐसा लगता है जैसे बिना छज्जे के मकान का सामने का हिस्सा। यदि नाक सुंदर है, तो बहुत अच्छी बात है। कवियों ने सुंदर नाक का वर्णन बहुत अधिक किया है। उन्होंने नायिकाओं के नाक की अनेकानेक उपमाएँ दी हैं। इन उपमानों में तोते की नाक की उपमा तो बड़ी विचित्र है।नाक हमारे शरीर का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अंग है। यह बहुत ऊँचा अंग है। मुख पर किसी भी अंग की कमी या विकृति को छिपाया जा सकता है परंतु कटी नाक को किसी प्रकार से नहीं छिपाया जा सकता। नाक न रहने पर व्यक्ति कुरूपता का शिकार हो जाता है। 'चाहे व लम्बी, छोटी, चपटी किसी भी प्रकार की हो। वाक्य मेंकिस विशेषण का प्रयोग किया गया है?

निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। समूची स्वार्थी व अहं-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में ऊँचे उद्देश्य नहीं होते, उनमें लोक-संग्रह नहीं होता, भव्य आदर्श नहीं होते। दूसरे, भले ही आपके सामने एक ऊँचा आदर्श रखें, तो भी आपके कर्म यदि आपके मन के चाहे या अनचाहे से प्रेरित हैं तो वे ह्रासमान ही होंगे, क्योंकि पसंद-नापसंद से किए जाते कार्य वासनाओं को बढ़ाए बिना नहीं रहते। कोई काम आपको महज इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि वह आपको पसंद है। उसी तरह कोई काम करने से आपको महज इस आधार पर नहीं कतराना चाहिए कि वह काम आपका मनचाहा नहीं है। कार्य का निर्णय बुद्धि-विवेक के आधार पर होना चाहिए, मनचली भावनाओं, तुनकमिजाजी के आधार पर कतई नहीं। इस एक बात को हमेशा याद रखिए कि पसंद और नापसंद आपके सबसे बड़े शत्रु हैं। आप इन्हें पहचानते तक नहीं। उल्टे आप इन्हें पाल-पोसकर दुलारते हैं। वे तो हर क्षण आपकी हानि व ह्रास करने पर ही तुले हैं। इनसे निबटने का व्यावहारिक मार्ग यह है कि अपनी रुचि और अरुचि का विश्लेषण करें। इस गद्यांश में किस प्रकार के कार्यों का समर्थन किया गया है ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। समूची स्वार्थी व अहं-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में ऊँचे उद्देश्य नहीं होते, उनमे लोक-संग्रह नहीं होता, भव्य आदर्श नहीं होते। दूसरे, भले ही आप अपने सामने एक ऊँचा आदर्श रखें, तो भी आपके कर्म यदि आपके मन के चाहे या अनचाहे से प्रेरित हैं तो वे ह्रासमान ही होंगे, क्योंकि पसंद-नापसंद से किए जाते कार्य वासनाओं को बढ़ाए बिना नहीं रहते। कोई काम आपको महज इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि वह आपको पसंद है। उसी तरह कोई काम करने से आपको महज इस आधार पर नहीं कतराना चाहिए कि वह काम आपका मनचाहा नहीं है। कार्य का निर्णय बुद्धि-विवेक के आधार पर होना चाहिए, मनचली भावनाओं, तुनकमिजाजी के आधार पर कतई नहीं। इस एक बात को हमेशा याद रखिए कि पसंद और नापसंद आपके सबसे बड़े शत्रु हैं। आप इन्हें पहचानते तक नहीं। उल्टे आप इन्हें पाल-पोसकर दुलारते हैं। वे तो हर क्षण आपकी हानि व ह्रास करने पर ही तुले हैं। इनसे निबटने का व्यावहारिक मार्ग यह है कि अपनी रुचि और अरुचि का विश्लेषण करें। इस गद्यांश में किस प्रकार के कार्यों का समर्थन किया गया है?

निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। हरा-भरा हो जीवन अपना स्वस्थ रहे संसार, नदियाँ, पर्वत, हवा, पेड से आती है बहार। बचपन, कोमल तन-मन लेकर, आए अनुपम जीवन लेकर, जग से तुम और तुमसे है ये प्यारा संसार, हरा-भरा हो जीवन अपना स्वस्थ रहे संसार, वृंद-लताएँ, पौधे, डाली चारों ओर भरे हरियाली मन में जगे उमंग यही है सृष्टि का उपहार, हरा-भरा हो जीवन अपना स्वस्थ रहे संसार, मुश्किल से मिलता है जीवन, हम सब इसे बनाएँ चंदन पर्यावरण सुरक्षित न हो तो है सब बेकार हरा-भरा हो जीवन अपना स्वस्थ रहे संसार कौन-सी चीजें बहार लेकर आती हैं ?

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