Home
Class 14
SANSKRIT
सम्बन्ध संज्ञी(संज्ञा करने वाला सूत्र )|...

सम्बन्ध संज्ञी(संज्ञा करने वाला सूत्र )|स्मरणीय तथ्य |OMR|शब्दरूप निर्माण में प्रयुक्त होने वाले 21 सुप प्रत्यय |धातुरूप निर्माण में प्रयुक्त होने वाले 18 तिड़ प्रत्यय |सारांश

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

ज्यामितीय रचनाओं में प्रयुक्त होने वाले उपकरण|रचना के चरण

ज्यामितीय रचनाओं में प्रयुक्त होने वाले उपकरण|रचना के चरण

लकार परिचय |कर्ता-क्रिया-कर्म का सहसम्बन्ध |कर्ता बोधक तालिका |OMR|Summary|10 लकारों में धातु रूप निर्माण हेतु प्रयुक्त 18 तिड़ प्रत्यय|तडात्मनेपदम सूत्रानुसार 9 आत्मनेपद संज्ञक प्रत्यय

भोजन में रसायन |खाद्य पर्यरक्षक या परिरक्षक |परिरक्षक में प्रयुक्त होने वाले कार्बनिक पदार्थ |कृत्रिम मिठास पैदा करने वाले पदार्थ या कृत्रिम मधुरक |प्रतिऑक्सीकारक |शोधन अभिकर्मक - साबुन तथा डिटर्जेंट |साबुन |साबुन के प्रकार |संश्लेषित अपमार्जक या डिटर्जें

आयनिक बंध |आयनिक बंधन के लिए शर्त|आयनिक बंध के निर्माण में प्रयुक्त ऊर्जा |आयनिक यौगिकों के गुणधर्म |जालक ऊर्जा |OMR|सारांश

अरबी, उर्दू और फारसी के उपसर्ग|अंग्रेजी के उपसर्ग|उपसर्ग के समान प्रयुक्त होने वाले संस्कृत के अव्यय शब्द|स्मरणीय तथ्य|उपसर्ग के अन्य अर्थ|प्रश्न|OMR

दोहरान |खनिजों के कमी से होने वाले रोग |रुक्षांस |जल |जल के शरीर में कार्य |संतुलित आहार |OMR|सारांश

इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है 'अनायास' में प्रयुक्त उपसर्ग है

Recommended Questions
  1. सम्बन्ध संज्ञी(संज्ञा करने वाला सूत्र )|स्मरणीय तथ्य |OMR|शब्दरूप निर्...

    Text Solution

    |

  2. आप किस आधार पर यह कह सकते हैं की स्केंडियम (Sc = 21) एक संक्रमण तत्व ह...

    Text Solution

    |

  3. 12.5 xx 10^(18) इलेक्ट्रॉनों के आवेश की गणना कीजिए ।

    Text Solution

    |

  4. धारामापी , अमीटर एवं वोल्टमीटर में से किसका प्रतिरोध अधिकतम तथा किसका ...

    Text Solution

    |

  5. एक भिन्न इस प्रकार है कि यदि इसके अंश को 3 से गुणा किया जाए और हर से 3...

    Text Solution

    |

  6. समस्याओ में रेखिक समीकरण युग्म बनाइए और उनके हल प्रतिस्थापन विधि द्...

    Text Solution

    |

  7. समस्याओ में रेखिक समीकरणों के युग्म बनाइए और उनके हल (यदि उनका ...

    Text Solution

    |

  8. अनंत तनुता (infinite dilution) तथा 18^(@)C पर Ag^(+) व NO(3)^(-) के...

    Text Solution

    |

  9. 18^(@)C व अनत तनुता पर H^(+) तथा CH(3)COO^(-) की तुल्यांक चालकताएँ क्...

    Text Solution

    |