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सिद्ध कीजिए कि दो रेखाएँ जो कि दोनों एक ...

सिद्ध कीजिए कि दो रेखाएँ जो कि दोनों एक समान रेखा के समान्तर है परस्पर समान्तर होंगी | | 9 | र...

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ABCD is a trapezium. Sides AB and CD. are parallel to each other.AB=6 cm, CD=18cm, BC=8cm and AD=12cm. A line parallel to AB divides the trapezium in two parts of equal perimeter. This line cuts BC at E and AD at F. If BE/EC = AF/FD, than what is the value of BE/EC? ABCD एक सम्लम्ब चतुर्भज है। भुजाएँ AB तथा CD एक दूसरे के समान्तर है। AB=6 सेमी. CD=18 सेमी. BC=8 सेमी. तथा AD= 12 सेमी. है। AB के समान्तर एक रेखा सम्लम्ब को दी बराबर परिमाप वाले हिस्से में काटता है। यह रेखा भुजा BC को E पर तथा AD को F पर काटती है। यदि BE/EC=AF/FD है, तो BE/EC का मान क्या है?

In a circle with centre O, PQR is a tangent at the point Q on it. AB is a chord in the circle parallel to the tangent such that angle BQR= 70^@ . What is the measure of angle AQB ? केंद्र O वाले एक वत्त में, PQR इस पर स्थित बिंदु Q पर एक स्पर्श रेखा है | AB वृत्त में एक जीवा है जो स्पर्श रेखा से इस प्रकार समानांतर है कि angle BQR= 70^@ है | angle AQB का मान ज्ञात करें |

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। लेखक का मानना है कि यह एक गम्भीर गलती है

आज जब भी कोई गाँव का नाम लेता है तो एक अलग ही छवि उभरती है। वह छवि कहती है कि वहाँ गरीबी है। वहाँ अशिक्षा और अज्ञान है। वहाँ अंध-विश्वास है। गंदगी है। बीमारी है। हमें विचार करना है कि सच क्या है? क्या हमारे गाँव ऐसे ही थे जैसे आज हैं? आज जो गाँवों का दुर्दशा हुई है उसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों की पड़ताल करते हुए हमें नई समझ बनानी है तथा गाँवों के सही स्वरूप की पहचान करनी है। वैसे यह खुदा का शुक्र है कि गाँवों पर कई तरह के आक्रामक दुष्प्रभावों के बावजूद उनका मूल स्वरूप नहीं बदलता है। जो दूरस्थ गाँव हैं-- शहर के पड़ोस से दूर उनकी निजता तो खासी बची हुई है। ऐसी स्थिति में हमारा दायित्व, एक शिक्षित समाज का दायित्व क्या बनता है? हमें विचार करना है। मंगर ऐसा कोई भी विचार गाँवों को आँखों से देखे बिना, स्वयं देख कर समझे बिना नहीं किया जा सकता! तो हमें अपनी फर्स्ट हैंड समझ बनाने के लिए गाँव चलना है। अपने मूल स्वरूप में गाँव एक वेधशाला है। एक विद्याशाला है। गाँच वेधशाला इसलिए है कि ज्ञान को रोज वहाँ कर्म की कसौटी पर कसा जाता है। आजमाया जाता है। जो ज्ञान कर्म की कसौटी पर खरा न उतरे तो उसे खारिज कर दिया जाता है। हर ज्ञान के होने की शर्त यह है वह सृजन और उत्पादन की शान पर तराशा जाए। अनुच्छेद के आधार पर कहा जा सकता है कि