Home
Class
GUIDANCE
द्विघात समीकरण 3x^(2)-5x+2=0 का विविक्तक...

द्विघात समीकरण 3x^(2)-5x+2=0 का विविक्तकर, मूलों की प्रकृति तथा द्विघाती सूत्र का उपयोग कर मूल ज...

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

द्विघात - सूत्र द्वारा द्विघात समीकरण के हल |NCERT प्रश्नावली |द्विघात समीकरण के मूलों की प्रकृति|अभ्यास कार्य |सारांश

द्विघात समीकरण का पूर्ण वर्ग बनाकर हल|द्विघाती सूत्र|अभ्यास प्रश्न|OMR|Summary

Polynomial (बहुपद)|Quadratic Equations (द्विघात समीकरण)|Roots Of A Quadratic Equation|Questions (प्रश्न)|Nature Of A Roots Of Quadratic Equation (द्विघात समीकरण के मूलों की प्रकृति)|R/B Roots & Coefficients (मूलों तथा गुणांकों में संबंध)|Formation Of A Qu

If alpha and beta are the roots of the equation x^2 + x-1=0 , then what is the equation whose roots are alpha^5 and beta^5 ? यदि alpha तथा beta समीकरण x^2 + x-1=0 के मूल है, तो वह समीकरण क्या है जिसके मूल alpha^5 तथा beta^5 है?

सम्मिश्र संख्याएँ|मूलों की प्रकृति|Complex Number|उदाहरण प्रश्न|i की घात|सम्मिश्र संख्याओं का योग तथा अंतर|सम्मिश्र संख्याओं का गुणन तथा भागफल

Symmetric Function Of Root Of A Quadratic Equation (द्विघात समीकरण के मूल का सम्मित रूप)|Maximum & Minimum Value Of Quadratic Equation (द्विघात समीकरण के उच्चतम तथा निम्नतम मान)|P.Y.Q's (प्रश्न)|Summary

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की शस्यश्यामला भूमि में जो निसर्ग-सिद्ध सुषमा है, उस पर भारतीय कवियों का चिरकाल से अनुराग रहा है। यों तो प्रकृति की साधारण वस्तुएँभी मनुष्यमात्र के लिए आकर्षक होती हैं, परन्तु उसकी सुन्दरतम विभूतियों __ में मानव वृत्तियाँ विशेष प्रकार से रमती हैं। हुए किसी साधारण से झरने अथवा ताड़ के लंबे-लंबे पेड़ों में ही सौन्दर्य का अनुभव कर लेते हैं तथा ऊँटों की चाल में ही सुन्दरता की कल्पना कर लेते हैं, परन्तु जिन्होंने भारत की हिमाच्छादित शैलमाला पर संध्या की सुनहली किरणों की सुषमा देखी हैं अथवा जिन्हें घनी अमराइयों की छाया में कल-कल ध्वनि से बहती हुई निर्झरिणी तथा उसकी समीपवर्तिनी लताओं की वसन्तश्री देखने का अवसर मिला है, साथ ही जो यहाँ के विशालकाय हाथियों की मतवाली चाल देख चुके हैं, उन्हें अरब की उपर्युक्त वस्तुओं में सौन्दर्य तो क्या, उलटे नीरसता, शुष्कता और भद्दापन ही मिलेगा। भारतीय कवियों को प्रकृति की सुन्दर गोद में क्रीड़ा करने का सौभाग्य प्राप्त है। ये हरे-हरे उपवनों तथा सुन्दर जलाशयों के तटों पर विचरण करते तथा प्रकृति के नाना मनोहारी रूपों से परिचित होते हैं। यही कारण है कि भारतीय कवि प्रकृति के संश्लिष्ट तथा सजीव चित्र जितनी मार्मिकता, उत्तमता तथा अधिकता से अंकित कर सकते हैं तथा उपमा-उत्प्रेक्षाओं के लिए जैसी सुन्दर वस्तुओं का उपयोग कर सकते हैं, वैसा रूखे-सूखे देश के निवासी कवि नहीं कर सकते। यह भारत-भूमि की ही विशेषता है कि यहाँ के कवियों का प्राकृतिक-वर्णन तथा तत्संभव सौन्दर्य-ज्ञान उच्च कोटि का होता है। प्रकृति के रम्य रूपों में तल्लीनता की जो अनुभूति होती है उसका उपयोग कविगण कभी-कभी रहस्यमयी भावनाओं के संचार में भी करते हैं। यह अखंड भूमण्डल तथा असंख्य ग्रह, उपग्रह, रवि-शशि अथवा जल, वायु, अग्नि, आकाश कितने रहस्यमय तथा अज्ञेय हैं? इनके सृष्टि-संचालन आदि के सम्बन्ध में दार्शनिकों अथवा वैज्ञानिकों ने इन तत्वों का निरूपण किया है। भारतीय कवियों को चिरकाल से किससे अनुराग रहा है?