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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 14 साक्षी है इतिहास हमी पहले जागे है जाग्रत सब हो रहे हमारे ही आगे हैं। शत्रु हमारे कहाँ नहीं भय से भागे हैं? कायरता से कहाँ प्राण हमने त्यागे हैं। हैं हमीं प्रकम्पित कर चुके, सुरपति तक का भी हृदया फिर एक बार हे विश्व तुम, गाओ भारत की विजय ।। कहाँ प्रकाशित नहीं रहा है तेज हमारा दलित कर चुके शत्रु सदा हम पैरों द्वारा। बताओ तुम कौन नहीं जो हमसे हारा पर शरणागत हुआ कहाँ, कब हमें न प्यारा बस युद्ध मात्र को छोड़कर, कहाँ नहीं हैं हम सदय फिर एक बार हे विश्व! तुम गाओ भारत की विजय 'हैं हमीं प्रकम्पित कर चुके, सुरपति तक का हृदय' से हमारी किस विशेषता का बोध होता है?

In each of the following questions, two equations are given. You have to solve them and give answer(निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न में दो समीकरण दिए गए हैं। आपको उन्हें हल करना है और उत्तर देना है I. 7x +10y =34 II. 11x + 13y =48 .

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 14 साक्षी है इतिहास हमी पहले जागे है जाग्रत सब हो रहे हमारे ही आगे हैं। शत्रु हमारे कहाँ नहीं भय से भागे हैं? कायरता से कहाँ प्राण हमने त्यागे हैं। हैं हमीं प्रकम्पित कर चुके, सुरपति तक का भी हृदया फिर एक बार हे विश्व तुम, गाओ भारत की विजय ।। कहाँ प्रकाशित नहीं रहा है तेज हमारा दलित कर चुके शत्रु सदा हम पैरों द्वारा। बताओ तुम कौन नहीं जो हमसे हारा पर शरणागत हुआ कहाँ, कब हमें न प्यारा बस युद्ध मात्र को छोड़कर, कहाँ नहीं हैं हम सदय फिर एक बार हे विश्व! तुम गाओ भारत की विजय 'पहले जागे हैं' का भाव है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 14 साक्षी है इतिहास हमी पहले जागे है जाग्रत सब हो रहे हमारे ही आगे हैं। शत्रु हमारे कहाँ नहीं भय से भागे हैं? कायरता से कहाँ प्राण हमने त्यागे हैं। हैं हमीं प्रकम्पित कर चुके, सुरपति तक का भी हृदया फिर एक बार हे विश्व तुम, गाओ भारत की विजय ।। कहाँ प्रकाशित नहीं रहा है तेज हमारा दलित कर चुके शत्रु सदा हम पैरों द्वारा। बताओ तुम कौन नहीं जो हमसे हारा पर शरणागत हुआ कहाँ, कब हमें न प्यारा बस युद्ध मात्र को छोड़कर, कहाँ नहीं हैं हम सदय फिर एक बार हे विश्व! तुम गाओ भारत की विजय हमारी दयालुता प्रकट होती है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 14 साक्षी है इतिहास हमी पहले जागे है जाग्रत सब हो रहे हमारे ही आगे हैं। शत्रु हमारे कहाँ नहीं भय से भागे हैं? कायरता से कहाँ प्राण हमने त्यागे हैं। हैं हमीं प्रकम्पित कर चुके, सुरपति तक का भी हृदया फिर एक बार हे विश्व तुम, गाओ भारत की विजय ।। कहाँ प्रकाशित नहीं रहा है तेज हमारा दलित कर चुके शत्रु सदा हम पैरों द्वारा। बताओ तुम कौन नहीं जो हमसे हारा पर शरणागत हुआ कहाँ, कब हमें न प्यारा बस युद्ध मात्र को छोड़कर, कहाँ नहीं हैं हम सदय फिर एक बार हे विश्व! तुम गाओ भारत की विजय 'हमारे आगे सबका जाग्रत होना' का भाव है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 14 साक्षी है इतिहास हमी पहले जागे है जाग्रत सब हो रहे हमारे ही आगे हैं। शत्रु हमारे कहाँ नहीं भय से भागे हैं? कायरता से कहाँ प्राण हमने त्यागे हैं। हैं हमीं प्रकम्पित कर चुके, सुरपति तक का भी हृदया फिर एक बार हे विश्व तुम, गाओ भारत की विजय ।। कहाँ प्रकाशित नहीं रहा है तेज हमारा दलित कर चुके शत्रु सदा हम पैरों द्वारा। बताओ तुम कौन नहीं जो हमसे हारा पर शरणागत हुआ कहाँ, कब हमें न प्यारा बस युद्ध मात्र को छोड़कर, कहाँ नहीं हैं हम सदय फिर एक बार हे विश्व! तुम गाओ भारत की विजय कवि किसे भारत की जय-जयकार करने को कह रहा है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 14 साक्षी है इतिहास हमी पहले जागे है जाग्रत सब हो रहे हमारे ही आगे हैं। शत्रु हमारे कहाँ नहीं भय से भागे हैं? कायरता से कहाँ प्राण हमने त्यागे हैं। हैं हमीं प्रकम्पित कर चुके, सुरपति तक का भी हृदया फिर एक बार हे विश्व तुम, गाओ भारत की विजय ।। कहाँ प्रकाशित नहीं रहा है तेज हमारा दलित कर चुके शत्रु सदा हम पैरों द्वारा। बताओ तुम कौन नहीं जो हमसे हारा पर शरणागत हुआ कहाँ, कब हमें न प्यारा बस युद्ध मात्र को छोड़कर, कहाँ नहीं हैं हम सदय फिर एक बार हे विश्व! तुम गाओ भारत की विजय 'शत्रु' शब्द का विपरीतार्थक है

निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर उत्तर दीजिए: युद्ध, निरंतर युद्ध विश्व है, 1 युद्धों की ही एक कहानी 2 शान्तिा कहाँ है शान्ति? 3 यहाँ तो नित रिपुओं से लड़ना है 4 नित्य उलझना समरांगण में 5 सीना ताने अड़ना है 6 भोले-भाले सीधे-सादे 7 नहीं यहाँ पर जीने पाते 8 जो लड़ते, आगे बढ़ते हैं। वे ही जीवन-गाना गाए 10 नहीं मिली यह शान्त बैठने 11 को हमको अनमोल जवानी 12 युद्ध, निरंतर युद्ध विश्व है 13युद्धों की ही एक कहानी 14'शान्ति! कहाँ हैं' - में कवि का भाव है

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