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से दूरी r पर किसी पिंड की गुरुत्वाकर्षण ...

से दूरी `r` पर किसी पिंड की गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा का परिमाण

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गतिज ऊर्जा व रेखीय संवेग में संबंद |विराम आने से पूर्व तय की गयी दूरी |स्थितिज ऊर्जा |ऊर्जा संरक्षण का नियम

Recap|गुरुत्वाकर्षण बल के कारण स्थितिज ऊर्जा |स्प्रिंग मे संचित होने वाली स्थितिज ऊर्जा व गतिज ऊर्जा मे ग्राफ |प्रश्न |शक्ति |OMR|Summary

द्विध्रुवीय पर आघूर्ण | एक द्विध्रुवीय की स्थितिज ऊर्जा | बिंदु आवेश द्विध्रुवीय परिचय | द्विध्रुवीय द्विध्रुवीय अंतःक्रिया

Recap|प्रश्न|स्थितिज ऊर्जा|यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण का नियम|स्प्रिंग बल के कारण कार्य व स्थितिज ऊर्जा|OMR|Summary

एक संस्कृत व्यक्ति किसी चीज़ की खोज करता है, किन्तु उसकी संतान को वह अपने पूर्वजों से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी संतान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भांति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकती। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नही कह सकते। 'न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण बल की खोज की वाक्य को कर्मवाच्य में बदलिए!

Recap|एक बिन्दु आवेश की स्थिति ऊर्जा |दो आवेशों की निकाय की स्थितिज ऊर्जा |वैधुत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा |OMR|Summary

एक बोर कक्षा में एक इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा की गणना |प्रश्न |OMR