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12 सेमी वाले त्रिज्यखण्ड का कोण 120° है।...

12 सेमी वाले त्रिज्यखण्ड का कोण 120° है। इस त्रिज्यखण्ड को इस प्रकार मोड़ा गया है कि उसके दो किन...

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The area of square is 200m^2 . A new square is formed in such a way that the length of its diagonal is sqrt2 times of the given square. Then the area of the new square formed is- एक वर्ग का क्षेत्रफल 200 वर्ग मीटर है। एक नया वर्ग इस प्रकार बनाया गया है कि उसके विकर्ण की लंबाई पहले वर्ग के विकर्ण की sqrt2 गुना के बराबर है, नये वर्ग का क्षेत्रफल है-

नीरज 'ड' को 'र' बोलता है। उसकी इस अशुद्धि को किस प्रकार दूर किया जा सकता है ?

Original breadth of a rectangular box is 20cm. The box was then remade in such a way that its length increased by 30% but the breadth decreased by 20% and the area increased by 100 cm^2 . What is the new area of the box? एक आयताकार डिब्बे की वास्तविक चौड़ाई 20 सेमी है | इस डिब्बे का पुनर्निर्माण इस प्रकार किया गया कि इसकी लंबाई 30% बढ़ा दी गयी लेकिन चौड़ाई में 20% की कमी कर दी गयी तथा क्षेत्रफल 100 वर्ग सेमी से बढ़ गया | इस डिब्बे का नया क्षेत्रफल क्या है?

Diameter AB of a circle with centre O is produced to point P such that PO = 16.5 cm. PQR is a secant which intersects the circle at Q and R such that PQ = 12 cm and PR = 19.2 cm. The length of AB (in cm) is: केंद्र O वाले एक वृत्त के व्यास AB को बिंदु P तक इस प्रकार बढ़ाया जाता है कि PO = 16.5 सेमी है | PQR एक छेदक रेखा है जो वृत्त को Q तथा R पर इस प्रकार काटती है कि PQ = 12 सेमी तथा PR = 19.2 सेमी है | AB की लंबाई ( सेमी में ) कितनी है ?

A sector of radius 10.5 cm with the central angle 120^@ is folded to form a cone by joining the two bounding radii of the sector. What is the volume (in cm^3 ) of the cone so formed ? 10.5 सेमी त्रिज्या वाला एक वृत्त खंड है जिसका केंद्रीय कोण 120^@ है | इसे मोड़कर वृत्त खंड की दो सीमांकन त्रिज्याओं को जोड़ कर एक शंकु का निर्माण किया जाता है | इस प्रकार निर्मित शंकु का आयतन ( घन सेमी में) क्या होगा ?

जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह । क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार को इस स्वीकृति को मनुष्यों ही का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया । गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह समर्पण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप न नहीं कर.सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने । के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बन जाता है। इस गद्यांश में "उपक्रम को अर्थ है

जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह । क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार को इस स्वीकृति को मनुष्यों ही का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया । गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह समर्पण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप न नहीं कर.सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने । के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बन जाता है। इस गद्यांश का मुख्य उद्देश्य है ।

जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह । क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार को इस स्वीकृति को मनुष्यों ही का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया । गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह समर्पण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप न नहीं कर.सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने । के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बन जाता है। ''_____ और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है।" वाक्य में निपात है