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अपने चारों तरफ वायु प्रदूषण कम करने के आप क्‍या सुझाव देंगे ? | 8 | वायु तथा जल का प्रदूषण | CHE...

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निर्देश :निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये गद्यांश वायु प्रदूषण आज की प्रमुख समस्या है। जंगलों के कटने तथा खनिज ईंधन के जलने से वायु में कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा दिनों-दिन बढ़ रही है। 'विश्व पर्यावरण विकास आयोग' के अनुसारऔद्योगीकरण के पूर्व वायु के प्रति 10 लाख में 280 कार्बन डाई-ऑक्साइड' थी। यह घनत्व अस्सी केदशक में 340 पहुंच गया तथा इक्कीसवीं शताब्दी के मध्य से अन्त तक यह 560 तक पहुंच जाएगा।वातावरण में छोड़ा जाने वाला धुआं अब सामान्य लकड़ी का धुआं न होकर अब उसमें कार्बन-ऑक्साइड के साथ-ही-साथ नाइट्रसऑक्साइड, धूल जैसे पदार्थों का आधिक्य भी हो रहा है। धातु कणों में सीसा, पारा, निकल, क्रोमियम, तांबा, आदिहोते हैं। सीसे के जहर से मानव मस्तिष्क के तन्तु नष्ट हो जाते हैं। निकल, क्रोमियम से श्वास लेने में कष्ट होता है।फोम, रबर, रेफ्रिजरेशन, एयरोसोल कारखानों से वातावरण में घुलती गैस से प्राणवायु के स्रोत 'ओजन परत' के टूटने का खतरा 1986 में विदित हुआ है। अन्तरिक्ष में विभिन्न उपग्रहों को स्थापित करते समय वायुमण्डल की ओजोनप्रभावित होती है। विषभरी गैसें भवनों को भी प्रभावित करती हैं। वृक्ष वातावरण को शुद्ध करते हैं। एक औसत श्रेणी का वृक्ष 50 वर्षों में 50 हजार किलोग्राम ऑक्सीजन देता है। इन्हें काटकर मनुष्य वातावरण के सन्तुलन को बिगाड़ रहे हैं और वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। जंगलों के कटने से क्या हो रहा है?

निर्देश :निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये गद्यांश वायु प्रदूषण आज की प्रमुख समस्या है। जंगलों के कटने तथा खनिज ईंधन के जलने से वायु में कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा दिनों-दिन बढ़ रही है। 'विश्व पर्यावरण विकास आयोग' के अनुसारऔद्योगीकरण के पूर्व वायु के प्रति 10 लाख में 280 कार्बन डाई-ऑक्साइड' थी। यह घनत्व अस्सी केदशक में 340 पहुंच गया तथा इक्कीसवीं शताब्दी के मध्य से अन्त तक यह 560 तक पहुंच जाएगा।वातावरण में छोड़ा जाने वाला धुआं अब सामान्य लकड़ी का धुआं न होकर अब उसमें कार्बन-ऑक्साइड के साथ-ही-साथ नाइट्रसऑक्साइड, धूल जैसे पदार्थों का आधिक्य भी हो रहा है। धातु कणों में सीसा, पारा, निकल, क्रोमियम, तांबा, आदिहोते हैं। सीसे के जहर से मानव मस्तिष्क के तन्तु नष्ट हो जाते हैं। निकल, क्रोमियम से श्वास लेने में कष्ट होता है।फोम, रबर, रेफ्रिजरेशन, एयरोसोल कारखानों से वातावरण में घुलती गैस से प्राणवायु के स्रोत 'ओजन परत' के टूटने का खतरा 1986 में विदित हुआ है। अन्तरिक्ष में विभिन्न उपग्रहों को स्थापित करते समय वायुमण्डल की ओजोनप्रभावित होती है। विषभरी गैसें भवनों को भी प्रभावित करती हैं। वृक्ष वातावरण को शुद्ध करते हैं। एक औसत श्रेणी का वृक्ष 50 वर्षों में 50 हजार किलोग्राम ऑक्सीजन देता है। इन्हें काटकर मनुष्य वातावरण के सन्तुलन को बिगाड़ रहे हैं और वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। आज की प्रमुख समस्या क्या है?

सूचना प्रौद्योगिकी ओर इलेक्ट्रॉनिक उद्योग|प्रौद्योगिकी प्रदूषण ओर पर्यावरण निम्नीकरण वायु प्रदूषण |वायु प्रदूषण |जल प्रदूषण |जल का तापीय प्रदूषण |रेडियोएक्टिव अपशिष्ट |ध्वनि प्रदूषण |उद्योग द्वारा पर्यावरण को होने वाले नुकसान की रोकथाम |OMR

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये वायु प्रदूषण आज की प्रमुख समस्या है। जंगलों के कटने तथा खनिज ईंधन के जलने से वायु में कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा दिनों बढ़ रही है। विश्व पर्यावरण विकास आयोग' के अनुसार औद्योगीकरण के पूर्व वायु के प्रति 10 लाख में 280 कार्बन डाई-ऑक्साइड' थी। यह घनत्व अस्सी के दशक में 340 पहुंच गया तथा इक्कीसवीं शताब्दी के मध्य से अन्त तक यह 560 तक पहुंच जाएगा। वातावरण में छोड़ा जाने वाला धुआं अब सामान्य लकड़ी का धुआं न होकर अब उसमें कार्बन-ऑक्साइड के साथ-ही-साथ नाइट्रसऑक्साइड, धूल जैसे पदार्थों का आधिक्य भी हो रहा है। धातु कणों में सीसा, पारा, निकल, क्रोमियम, तांबा, आदि होते हैं। सीसे के जहर से मानव मस्तिष्क के तन्तु नष्ट हो जाते हैं। निकल, क्रोमियम से श्वास लेने में कष्ट होता है। फोम, रबर, रेफ्रिजरेशन, एयरोसोल कारखानों से वातावरण में घुलती गैस से प्राणवायु के स्रोत 'ओजन परत' के टूटने का खतरा 1986 में विदित हुआ है। अन्तरिक्ष में विभिन्न उपग्रहों को स्थापित करते समय वायुमण्डल की ओजोन प्रभावित होती है। विषभरी गैसें भवनों को भी प्रभावित करती हैं। वृक्ष वातावरण को शुद्ध करते हैं। एक औसत श्रेणी का वृक्ष 50 वर्षों में 50 हजार किलोग्राम ऑक्सीजन देता है। इन्हें काटकर मनुष्य वातावरण के सन्तुलन को बिगाड़ रहे हैं और वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। जंगलों के कटने से क्या हो रहा है।

जल प्रदूषण |जल प्रदूषण के स्त्रोत |कार्बनिक प्रदूषण |औद्योगिक अवशिष्ट |डिटर्जेंट तथा उर्वरक |पीड़कनाशक |अम्लों के द्वारा जल का प्रदूषण |बहुक्लोरीन युक्त बाइफेनिल्स |जल प्रदूषण |मल का उपचार |पीने के जल के अंतराष्ट्रीय मानक |पीने के जल की गुणवत्ता |मृदा प्रद

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये वायु प्रदूषण आज की प्रमुख समस्या है। जंगलों के कटने तथा खनिज ईंधन के जलने से वायु में कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा दिनों बढ़ रही है। विश्व पर्यावरण विकास आयोग' के अनुसार औद्योगीकरण के पूर्व वायु के प्रति 10 लाख में 280 कार्बन डाई-ऑक्साइड' थी। यह घनत्व अस्सी के दशक में 340 पहुंच गया तथा इक्कीसवीं शताब्दी के मध्य से अन्त तक यह 560 तक पहुंच जाएगा। वातावरण में छोड़ा जाने वाला धुआं अब सामान्य लकड़ी का धुआं न होकर अब उसमें कार्बन-ऑक्साइड के साथ-ही-साथ नाइट्रसऑक्साइड, धूल जैसे पदार्थों का आधिक्य भी हो रहा है। वायु में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा 21वीं शती तक कितने यूनिट हो जाएगी।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये वायु प्रदूषण आज की प्रमुख समस्या है। जंगलों के कटने तथा खनिज ईंधन के जलने से वायु में कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा दिनों बढ़ रही है। विश्व पर्यावरण विकास आयोग' के अनुसार औद्योगीकरण के पूर्व वायु के प्रति 10 लाख में 280 कार्बन डाई-ऑक्साइड' थी। यह घनत्व अस्सी के दशक में 340 पहुंच गया तथा इक्कीसवीं शताब्दी के मध्य से अन्त तक यह 560 तक पहुंच जाएगा। वातावरण में छोड़ा जाने वाला धुआं अब सामान्य लकड़ी का धुआं न होकर अब उसमें कार्बन-ऑक्साइड के साथ-ही-साथ नाइट्रसऑक्साइड, धूल जैसे पदार्थों का आधिक्य भी हो रहा है। धातु कणों में सीसा, पारा, निकल, क्रोमियम, तांबा, आदि होते हैं। सीसे के जहर से मानव मस्तिष्क के तन्तु नष्ट हो जाते हैं। सीसे का जहर किस अंग के तन्तुओं को नष्ट कर देता है।