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हीमोग्लोबिन के दो कार्य लिखिये। | 10 | ...

हीमोग्लोबिन के दो कार्य लिखिये। | 10 | जैविक प्रक्रियाएँ -पोषण ,परिवहन ,श्वसन एवं उत्सर्जन | B...

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A and B can do a job in 10 days and 5 days respectively. They worked together for two days, after which B was replaced by C and the work was finished in the next three days. How long will C take to finish 60% of the job? A और B क्रमशः 10 दिनों और 15 दिनों में एक कार्य कर सकते हैं। उन्होंने दो दिनों तक एक साथ कार्य किया, जिसके बाद B को C से बदल दिया गया और अगले तीन दिनों में कार्य खत्म कर दिया गया। C को 60% कार्य पूरा करने में कितना समय लगेगा?

A and B can do a work in 15 days and 10 days respectively. They begin the work together but B leaves after two days. Now A completes the remaining work. The total number of days needed for the completion of the work is: A और B क्रमशः 15 दिनों और 10 दिनों में एक कार्य कर सकते हैं। वे एक साथ कार्य शुरू करते हैं लेकिन B दो दिनों के बाद छोड़ देता हैं। अब A शेष कार्य को पूरा करता है। कार्य पूरा होने के लिए आवश्यक कुल दिनों की संख्या है:

A is as efficient as B and C together. Working together A and B can complete a work in 36 days and C alone can complete it in 60 days. A and C work together for 10 days. B alone will complete the remaining work in : A की कार्य क्षमता B और C की कुल कार्य क्षमता के बराबर है | एक साथ कार्य करते हुए, A और B किसी कार्य को 36 दिनों में कर सकते हैं तथा C अकेले इस कार्य को 60 दिनों में कर सकता है | A और C 10 दिनों तक एक साथ कार्य करते हैं | B अकेले शेष कार्य कितने दिनों में समाप्त करेगा ?

A can do a piece of work alone in 10 days. B can do the same work in 15 days alone. They start the work together but B leaves the work 2 days after the start and A alone completes the remaining work. In how many days the work will be completed? A किसी कार्य को अकेला 10 दिन में कर सकता है |B उसी कार्य को अकेला 15 दिन में कर सकता है | वे एक साथ मिलकर कार्य शुरू करते हैं परन्तु B कार्य आरंभ होने के 2 दिन बाद कार्य छोड़ देता है तथा A शेष कार्य को अकेला पूरा करता है | कार्य को पूरा होने में कुल कितने दिन लगेंगे?

आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भी अपने कार्य एवं व्यवहार से मनुष्य के शिक्षण में सहायक होते हैं। किसी भी क्षेत्र विशेष के लोगों पर उसके क्षेत्र का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह प्रभाव भाषा ही नहीं व्यवहार में भी दिखाई पड़ता है। इस तरह की शिक्षा को अनौपचारिक शिक्षण के अन्तर्गत रखा जाता है। इस तरह सामान्य रूप से शिक्षा की दो प्रणालियाँ होती हैं-औपचारिक शिक्षा एवं अनौपचारिक शिक्षा। मुक्त विद्यालय एवं विश्वविद्यालय अनौपचारिक शिक्षा के ही उदाहरण हैं। इनके अलावा परिवार के सदस्य भी बालकों की शिक्षा में प्रत्यक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हैं। समुदाय के अन्य सदस्यों की भी इसमें सहभागिता होती है। बालक अपनी परम्परा एवं अपने रीतिरिवाजों को समाज के अन्य सदस्यों द्वारा ही सीखता है। बालकों पर उसके परिवेश उसके साथियों का भी प्रभाव पड़ता है। गलत संगति में बालकों में गलत आदतों का विकास अथवा आपराधिक प्रवृत्तियों में लिप्त हो जाना इसका उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा में शिक्षण का स्थान सुनिश्चित होता है, जबकि अनौपचारिक में ऐसा नहीं। होता। औपचारिक शिक्षा में प्रवेश के लिए आयु-सीमा निर्धारित होती है, जबकि अनौपचारिक शिक्षा में ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती है। अनौपचारिक शिक्षा के द्वारा शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों एवं प्रौढ़ों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। अनौपचारिक शिक्षा में औपचारिक शिक्षा जैसे कठोर नियम नहीं होते ये अत्यधिक लचीले होते हैं। अनौपचारिक शिक्षा के जरिए औपचारिक शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। प्रौढ़ शिक्षा एवं स्त्री शिक्षा इसी का उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा समाजीय व्यवस्था की एक उपव्यवस्था के रूप में कार्य करती है। इस पर परिवार, संस्कृति, राज्य, धर्म, अर्थव्यवस्था एवं समाज के स्पष्ट प्रभाव होता है, क्योंकि यह इन सभी से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित होता है। सिर्फ शिक्षा पर ही समाज का प्रभाव नहीं होता, बल्कि शिक्षा भी समाज को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। शिक्षा के परिणामस्वरूप ही भारत में स्त्रियों की स्थिति में सुधार हुआ है। शहरीकरण, सामाजिक स्थितियों में बदलाव, संयुक्त परिवारों का एकल परिवारों के रूप में विभाजन ये सभी शिक्षा का समाज पर प्रभाव स्पष्ट करते हैं। मानव किसकी सहायता से शिक्षा प्राप्त करता है?

आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भी अपने कार्य एवं व्यवहार से मनुष्य के शिक्षण में सहायक होते हैं। किसी भी क्षेत्र विशेष के लोगों पर उसके क्षेत्र का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह प्रभाव भाषा ही नहीं व्यवहार में भी दिखाई पड़ता है। इस तरह की शिक्षा को अनौपचारिक शिक्षण के अन्तर्गत रखा जाता है। इस तरह सामान्य रूप से शिक्षा की दो प्रणालियाँ होती हैं-औपचारिक शिक्षा एवं अनौपचारिक शिक्षा। मुक्त विद्यालय एवं विश्वविद्यालय अनौपचारिक शिक्षा के ही उदाहरण हैं। इनके अलावा परिवार के सदस्य भी बालकों की शिक्षा में प्रत्यक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हैं। समुदाय के अन्य सदस्यों की भी इसमें सहभागिता होती है। बालक अपनी परम्परा एवं अपने रीतिरिवाजों को समाज के अन्य सदस्यों द्वारा ही सीखता है। बालकों पर उसके परिवेश उसके साथियों का भी प्रभाव पड़ता है। गलत संगति में बालकों में गलत आदतों का विकास अथवा आपराधिक प्रवृत्तियों में लिप्त हो जाना इसका उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा में शिक्षण का स्थान सुनिश्चित होता है, जबकि अनौपचारिक में ऐसा नहीं। होता। औपचारिक शिक्षा में प्रवेश के लिए आयु-सीमा निर्धारित होती है, जबकि अनौपचारिक शिक्षा में ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती है। अनौपचारिक शिक्षा के द्वारा शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों एवं प्रौढ़ों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। अनौपचारिक शिक्षा में औपचारिक शिक्षा जैसे कठोर नियम नहीं होते ये अत्यधिक लचीले होते हैं। अनौपचारिक शिक्षा के जरिए औपचारिक शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। प्रौढ़ शिक्षा एवं स्त्री शिक्षा इसी का उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा समाजीय व्यवस्था की एक उपव्यवस्था के रूप में कार्य करती है। इस पर परिवार, संस्कृति, राज्य, धर्म, अर्थव्यवस्था एवं समाज के स्पष्ट प्रभाव होता है, क्योंकि यह इन सभी से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित होता है। सिर्फ शिक्षा पर ही समाज का प्रभाव नहीं होता, बल्कि शिक्षा भी समाज को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। शिक्षा के परिणामस्वरूप ही भारत में स्त्रियों की स्थिति में सुधार हुआ है। शहरीकरण, सामाजिक स्थितियों में बदलाव, संयुक्त परिवारों का एकल परिवारों के रूप में विभाजन ये सभी शिक्षा का समाज पर प्रभाव स्पष्ट करते हैं। व्यक्ति की भाषा एवं व्यवहार में उसके क्षेत्र विशेष का प्रभाव स्पष्ट दिखाई पड़ता है, इसे निम्नलिखित में से किसके अन्तर्गत रखा जा सकता है?

आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भी अपने कार्य एवं व्यवहार से मनुष्य के शिक्षण में सहायक होते हैं। किसी भी क्षेत्र विशेष के लोगों पर उसके क्षेत्र का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह प्रभाव भाषा ही नहीं व्यवहार में भी दिखाई पड़ता है। इस तरह की शिक्षा को अनौपचारिक शिक्षण के अन्तर्गत रखा जाता है। इस तरह सामान्य रूप से शिक्षा की दो प्रणालियाँ होती हैं-औपचारिक शिक्षा एवं अनौपचारिक शिक्षा। मुक्त विद्यालय एवं विश्वविद्यालय अनौपचारिक शिक्षा के ही उदाहरण हैं। इनके अलावा परिवार के सदस्य भी बालकों की शिक्षा में प्रत्यक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हैं। समुदाय के अन्य सदस्यों की भी इसमें सहभागिता होती है। बालक अपनी परम्परा एवं अपने रीतिरिवाजों को समाज के अन्य सदस्यों द्वारा ही सीखता है। बालकों पर उसके परिवेश उसके साथियों का भी प्रभाव पड़ता है। गलत संगति में बालकों में गलत आदतों का विकास अथवा आपराधिक प्रवृत्तियों में लिप्त हो जाना इसका उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा में शिक्षण का स्थान सुनिश्चित होता है, जबकि अनौपचारिक में ऐसा नहीं। होता। औपचारिक शिक्षा में प्रवेश के लिए आयु-सीमा निर्धारित होती है, जबकि अनौपचारिक शिक्षा में ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती है। अनौपचारिक शिक्षा के द्वारा शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों एवं प्रौढ़ों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। अनौपचारिक शिक्षा में औपचारिक शिक्षा जैसे कठोर नियम नहीं होते ये अत्यधिक लचीले होते हैं। अनौपचारिक शिक्षा के जरिए औपचारिक शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। प्रौढ़ शिक्षा एवं स्त्री शिक्षा इसी का उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा समाजीय व्यवस्था की एक उपव्यवस्था के रूप में कार्य करती है। इस पर परिवार, संस्कृति, राज्य, धर्म, अर्थव्यवस्था एवं समाज के स्पष्ट प्रभाव होता है, क्योंकि यह इन सभी से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित होता है। सिर्फ शिक्षा पर ही समाज का प्रभाव नहीं होता, बल्कि शिक्षा भी समाज को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। शिक्षा के परिणामस्वरूप ही भारत में स्त्रियों की स्थिति में सुधार हुआ है। शहरीकरण, सामाजिक स्थितियों में बदलाव, संयुक्त परिवारों का एकल परिवारों के रूप में विभाजन ये सभी शिक्षा का समाज पर प्रभाव स्पष्ट करते हैं। गलत संगति में बालकों में गलत आदतों का विकास किसका उदाहरण है?

आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भी अपने कार्य एवं व्यवहार से मनुष्य के शिक्षण में सहायक होते हैं। किसी भी क्षेत्र विशेष के लोगों पर उसके क्षेत्र का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह प्रभाव भाषा ही नहीं व्यवहार में भी दिखाई पड़ता है। इस तरह की शिक्षा को अनौपचारिक शिक्षण के अन्तर्गत रखा जाता है। इस तरह सामान्य रूप से शिक्षा की दो प्रणालियाँ होती हैं-औपचारिक शिक्षा एवं अनौपचारिक शिक्षा। मुक्त विद्यालय एवं विश्वविद्यालय अनौपचारिक शिक्षा के ही उदाहरण हैं। इनके अलावा परिवार के सदस्य भी बालकों की शिक्षा में प्रत्यक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हैं। समुदाय के अन्य सदस्यों की भी इसमें सहभागिता होती है। बालक अपनी परम्परा एवं अपने रीतिरिवाजों को समाज के अन्य सदस्यों द्वारा ही सीखता है। बालकों पर उसके परिवेश उसके साथियों का भी प्रभाव पड़ता है। गलत संगति में बालकों में गलत आदतों का विकास अथवा आपराधिक प्रवृत्तियों में लिप्त हो जाना इसका उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा में शिक्षण का स्थान सुनिश्चित होता है, जबकि अनौपचारिक में ऐसा नहीं। होता। औपचारिक शिक्षा में प्रवेश के लिए आयु-सीमा निर्धारित होती है, जबकि अनौपचारिक शिक्षा में ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती है। अनौपचारिक शिक्षा के द्वारा शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों एवं प्रौढ़ों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। अनौपचारिक शिक्षा में औपचारिक शिक्षा जैसे कठोर नियम नहीं होते ये अत्यधिक लचीले होते हैं। अनौपचारिक शिक्षा के जरिए औपचारिक शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। प्रौढ़ शिक्षा एवं स्त्री शिक्षा इसी का उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा समाजीय व्यवस्था की एक उपव्यवस्था के रूप में कार्य करती है। इस पर परिवार, संस्कृति, राज्य, धर्म, अर्थव्यवस्था एवं समाज के स्पष्ट प्रभाव होता है, क्योंकि यह इन सभी से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित होता है। सिर्फ शिक्षा पर ही समाज का प्रभाव नहीं होता, बल्कि शिक्षा भी समाज को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। शिक्षा के परिणामस्वरूप ही भारत में स्त्रियों की स्थिति में सुधार हुआ है। शहरीकरण, सामाजिक स्थितियों में बदलाव, संयुक्त परिवारों का एकल परिवारों के रूप में विभाजन ये सभी शिक्षा का समाज पर प्रभाव स्पष्ट करते हैं। औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा में प्रमुख अन्तर किससे सम्बन्धित है?

आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भी अपने कार्य एवं व्यवहार से मनुष्य के शिक्षण में सहायक होते हैं। किसी भी क्षेत्र विशेष के लोगों पर उसके क्षेत्र का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह प्रभाव भाषा ही नहीं व्यवहार में भी दिखाई पड़ता है। इस तरह की शिक्षा को अनौपचारिक शिक्षण के अन्तर्गत रखा जाता है। इस तरह सामान्य रूप से शिक्षा की दो प्रणालियाँ होती हैं-औपचारिक शिक्षा एवं अनौपचारिक शिक्षा। मुक्त विद्यालय एवं विश्वविद्यालय अनौपचारिक शिक्षा के ही उदाहरण हैं। इनके अलावा परिवार के सदस्य भी बालकों की शिक्षा में प्रत्यक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हैं। समुदाय के अन्य सदस्यों की भी इसमें सहभागिता होती है। बालक अपनी परम्परा एवं अपने रीतिरिवाजों को समाज के अन्य सदस्यों द्वारा ही सीखता है। बालकों पर उसके परिवेश उसके साथियों का भी प्रभाव पड़ता है। गलत संगति में बालकों में गलत आदतों का विकास अथवा आपराधिक प्रवृत्तियों में लिप्त हो जाना इसका उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा में शिक्षण का स्थान सुनिश्चित होता है, जबकि अनौपचारिक में ऐसा नहीं। होता। औपचारिक शिक्षा में प्रवेश के लिए आयु-सीमा निर्धारित होती है, जबकि अनौपचारिक शिक्षा में ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती है। अनौपचारिक शिक्षा के द्वारा शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों एवं प्रौढ़ों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। अनौपचारिक शिक्षा में औपचारिक शिक्षा जैसे कठोर नियम नहीं होते ये अत्यधिक लचीले होते हैं। अनौपचारिक शिक्षा के जरिए औपचारिक शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। प्रौढ़ शिक्षा एवं स्त्री शिक्षा इसी का उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा समाजीय व्यवस्था की एक उपव्यवस्था के रूप में कार्य करती है। इस पर परिवार, संस्कृति, राज्य, धर्म, अर्थव्यवस्था एवं समाज के स्पष्ट प्रभाव होता है, क्योंकि यह इन सभी से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित होता है। सिर्फ शिक्षा पर ही समाज का प्रभाव नहीं होता, बल्कि शिक्षा भी समाज को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। शिक्षा के परिणामस्वरूप ही भारत में स्त्रियों की स्थिति में सुधार हुआ है। शहरीकरण, सामाजिक स्थितियों में बदलाव, संयुक्त परिवारों का एकल परिवारों के रूप में विभाजन ये सभी शिक्षा का समाज पर प्रभाव स्पष्ट करते हैं। निम्नलिखित में से कौन-से, शिक्षा पर समाज के प्रभाव को स्पष्ट करते हैं?