मंडेला की 'स्वतंत्रता की भूख' ने उनका जीवन कैसे बदल दिया? | 10 | नेल्सन मंडेला-फ्रूट तक लंबी पैदल यात्रा...
मंडेला की 'स्वतंत्रता की भूख' ने उनका जीवन कैसे बदल दिया? | 10 | नेल्सन मंडेला-फ्रूट तक लंबी पैदल यात्रा...
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A man travelled a distance of 42 km in 5 hours. He travelled partly on foot at the rate of 6 km/h and partly on bicycle at the rate of 10 km/h. The distance travelled on foot is: एक आदमी ने 5 घंटे में 42 किमी की दूरी तय की। उसने आंशिक रूप से 6 किमी/घंटा की चाल से पैदल यात्रा की और आंशिक रूप से 10 किमी/घंटा की चाल से साइकिल पर यात्रा की। पैदल यात्रा की दूरी है:
A man travelled a distance of 35 km in 5 hours. He travelled partly on foot at the rate of 4km/h and the rest on bicycle at the rate of 9 km/h. The distance travelled on foot is: एक आदमी ने 5 घंटे में 35 किमी की दूरी तय की। उसने आंशिक रूप से 4 किमी/घंटा की चाल से पैदल यात्रा की और बाकी साइकिल 9 किमी/घंटा की चाल से यात्रा की। पैदल यात्रा की दूरी ज्ञात करे।
Amit travelled from A to B at an average speed of 80 km/h. He travelled the first 75% of the distance in two-third of the time and the rest at a constant speed of x km/h. The value of x is: अमित ने A से B तक 80 किमी/घंटा की औसत चाल से यात्रा की | उसने पहली 75% दूरी दो-तिहाई समय में तथा शेष दूरी x किमी/घंटा की चाल से तय की | x का मान क्या है ?
The given pie-chart depicts the percentage of students coming to school using different modes of transport. Total number of students=1300 दिया गया पाई चार्ट परिवहन के विभिन्न साधनों का प्रयोग करके विद्यालय आने वाले छात्रों का प्रतिशत दर्शाता है | छात्रों की कुल संख्या =1300 In the given pie-chart, the difference between the number of students travel by bus or walk to the number of students travel by car or cycle, इस पाई चार्ट के अनुसार बस सेया पैदल यात्रा करने वाले छात्रों की संख्या एवं कार अथवा साइकिल से यात्रा करने वाले छात्रों की संख्या में क्या अंतर है ?
A and B started their journeys from X to Y and Y to X, respectively. After crossing each other, A and B completed the remaining parts of their journey in 6 1/8 h and 8h respectively. If the speed of B is 28 km/h, then the speed (in km/h), then the speed (in km/h) of A is : A और B ने क्रमशः X से Y और Y से X तक की अपनी यात्राएं शुरू की | एक-दूसरे को पार करने के बाद, A और B ने अपनी यात्रा का शेष भाग क्रमशः 6 1/8 घंटे एवं 8 घंटे में पूरा किया | यदि B की चाल 28 किमी/घंटा है, तो A की चाल ( किमी/घंटा में ) ज्ञात करें |
Amit travelled a distance of 50 km in 9 hours. He travelled partly on foot at 5km/h and partly by bicycle at 10km/h. The distance travelled on the bicycle is: / अमित ने 9 घंटे में 50 किमी की दूरी तय की। उन्होंने आंशिक रूप से 5 किमी / घंटा की पैदल यात्रा की और आंशिक रूप से 10 किमी / घंटा की दर से साइकिल से यात्रा की। साइकिल पर तय की गई दूरी है:
Richa travels from A to B at the speed of 15 km/h, from B to C at 20 km/h, and from C to D at 30 km/h. If AB = BC = CD, then find the Richa.s average speed. रिचा ने A से B तक 15 किमी/घंटा की चाल से, B से C तक 20 किमी/घंटा की चाल से तथा C से D तक 30 किमी/घंटा की चाल से यात्रा की। यदि AB= BC= CD है, तो रिचा की औसत चाल ज्ञात कीजिए।
हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदियों को जन्म दिया है, उनमें गंगा और यमुना नाम की नदियाँ हमारे जीवन की धमनियों की तरह रही हैं। उनकी गोद में हमारे पूर्वजों ने सभ्यता के प्रांगण में अनेक नए खेल खेले। उनके तटों पर जीवन का जो प्रवाह प्रचलित हुआ, वह आज तक हमारे भूत और भावी जीवन को सींच रहा है। भारत हमारा देश है और हम उसके नागरिक हैं यह एक सच्चाई हमारे रोम-रोम में बिंधी हुई है। नदियों की अन्तर्वेदी में पनपने वाले आदि युग के जीवन पर हम अब जितना अधिक विचार करते हैं हमको अपने विकास और वृद्धि की सनातन जड़ों का पृथ्वी के साथ सम्बन्ध उतना ही अधिक घनिष्ठ जान पड़ता है। हमारे धार्मिक पर्वो पर लाखों लोग नदी और जलाशयों के तटों पर एकत्र होते हैं। पृथ्वी के एक-एक जलाशय और सरोवर को भारतीय भावना ने ठीक प्रकार से समझने का प्रयत्न किया, उनके साथ सौहार्द का भाव उत्पन्न किया जो हर एक पीढ़ी के साथ नए रूप में बंधा रहा किन्तु आज स्थिति बड़ी विचित्र और एक सीमा तक चिन्ताजनक हो गई है। हमारी औद्योगिक क्रान्ति ने इन्हें प्रदूषित कर विषैला बना दिया है। जीवनदायिनी नदियाँ आज प्राणघातिनी होती जा रही हैं। मिल-बैठकर सोचने की आवश्यकता है कि क्या करें कि ये पुनः जीवनदायिनी हों और उन सोची हुई योजनाओं को अमल में । लाने की भी आवश्यकता है। स्थिति चिन्ताजनक क्यों हो गई है?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदियों को जन्म दिया है, उनमें गंगा और यमुना नाम की नदियाँ हमारे जीवन की धमनियों की तरह रही हैं। उनकी गोद में हमारे पूर्वजों ने सभ्यता के प्रांगण में अनेक नए खेल खेले। उनके तटों पर जीवन का जो प्रवाह प्रचलित हुआ. वह आज तक हमारे भूत और भावी जीवन को सींच रहा है। भारत हमारा देश है और हम उसके नागरिक हैं यह एक सच्चाई हमारे रोम-रोम में बिंधी हुई है। नदियों की अन्तर्वेदी में पनपने वाले आदि युग के जीवन पर हम अब जितना अधिक विचार करते हैं हमको अपने विकास और वृद्धि की सनातन जड़ों का पृथ्वी के साथ संबंध उतना ही अधिक घनिष्ठ जान पड़ता है। हमारे धार्मिक पर्यों पर लाखों लोग नदी और जलाशयों के तटों पर एकत्र होते हैं। पृथ्वी के एक-एक जलाशय और सरोवर को भारतीय भावना ने ठीक प्रकार से समझने का प्रयत्न किया, उनके साथ सौहार्द का भाव उत्पन्न किया जो हर एक पीढ़ी के साथ नए रूप में बंधा रहा। किन्तु आज स्थिति बड़ी विचित्र और एक सीमा तक चिन्ताजनक हो गई है। हमारी औद्योगिक क्रांति ने इन्हें प्रदूषित कर विषैला बना दिया है। जीवनदायिनी नदियाँ आज प्राणघातिनी होती जा रही हैं। मिल बैठकर सोचने की आवश्यकता है कि क्या करें कि ये पुनः जीवनदायिनी हों। और उन सोची हुई योजनाओं को अमल में लाने की भी आवश्यकता है। गंगा-यमुना को जल कहाँ से मिलता है?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदियों को जन्म दिया है, उनमें गंगा और यमुना नाम की नदियाँ हमारे जीवन की धमनियों की तरह रही हैं। उनकी गोद में हमारे पूर्वजों ने सभ्यता के प्रांगण में अनेक नए खेल खेले। उनके तटों पर जीवन का जो प्रवाह प्रचलित हुआ. वह आज तक हमारे भूत और भावी जीवन को सींच रहा है। भारत हमारा देश है और हम उसके नागरिक हैं यह एक सच्चाई हमारे रोम-रोम में बिंधी हुई है। नदियों की अन्तर्वेदी में पनपने वाले आदि युग के जीवन पर हम अब जितना अधिक विचार करते हैं हमको अपने विकास और वृद्धि की सनातन जड़ों का पृथ्वी के साथ संबंध उतना ही अधिक घनिष्ठ जान पड़ता है। हमारे धार्मिक पर्यों पर लाखों लोग नदी और जलाशयों के तटों पर एकत्र होते हैं। पृथ्वी के एक-एक जलाशय और सरोवर को भारतीय भावना ने ठीक प्रकार से समझने का प्रयत्न किया, उनके साथ सौहार्द का भाव उत्पन्न किया जो हर एक पीढ़ी के साथ नए रूप में बंधा रहा। किन्तु आज स्थिति बड़ी विचित्र और एक सीमा तक चिन्ताजनक हो गई है। हमारी औद्योगिक क्रांति ने इन्हें प्रदूषित कर विषैला बना दिया है। जीवनदायिनी नदियाँ आज प्राणघातिनी होती जा रही हैं। मिल बैठकर सोचने की आवश्यकता है कि क्या करें कि ये पुनः जीवनदायिनी हों। और उन सोची हुई योजनाओं को अमल में लाने की भी आवश्यकता है। लेखक के अनुसार हमारी सभ्यता का जन्म हुआ है
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