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बल, क्षेत्रफल और दाब में संबंध बताइए। | ...

बल, क्षेत्रफल और दाब में संबंध बताइए। | 8 | बल तथा दाब | PHYSICS | MBD HINDI-HARYANA BOARD | Dou...

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गतिक ऊर्जा और संवेग में संबंध|कार्य ऊर्जा प्रमेय|प्रश्न|संरक्षी बल, अंसरक्षी बल और केन्द्रीय बल|OMR|Summary

The total surface area of a hollow cuboid is 340 cm^2 . If the length and the breadth of the cuboid are 10 cm and 8 cm respectively, then what is the length of the longest stick that can be fitted inside the cuboid ? एक खोखले घनाभ का कुल पृष्ठ क्षेत्रफल 340 वर्ग सेमी है | यदि घनाभ की लंबाई और चौड़ाई 10 सेमी तथा 8 सेमी है, तो उस सबसे लंबी छड़ी की लंबाई ज्ञात करें जिसे इस घनाभ में रखा जा सकता है ?

ऊर्जा|यांत्रिक ऊर्जा|गतिज ऊर्जा|संवेग और गति ऊर्जा में संबंध|कार्य ऊर्जा प्रमेय|स्थितिज ऊर्जा|शक्ति|यूनिट|बल और वेग के पदों में शक्ति|अभ्यास प्रश्न

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। लेखक ने अनूठी शिक्षा में ____ बल दिया है।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये बाल्यावस्था में हम शीघ्र ही सबकी बातों पर विश्वास कर लेते हैं और मित्र बना लेते हैं। हमारा मन अनेक कल्पनाओं से भरा रहता है। युवावस्था की मित्रता सहपाठी की मित्रता से अधिक दृढ़ शांत और गंभीर होती है। सच्चा मित्र वही है जो दृढ़-चित्त और सत्य-संकल्प का हो। अपने से अधिक आत्म-बल वाले व्यक्ति से मित्रता करना उचित है। क्योंकि वह महान कार्यों में हमारा मनोबल बढ़ाता है। सम्मानित, शुद्ध ह्दयी, कोमल, मेहनती, शिष्ट और सत्यनिष्ठ व्यक्ति पर हम पूरा विश्वास कर मित्रता कर सकते हैं। उससे धोखे की उम्मीद नहीं रहती। ऐसे जान-पहचान वालों से दूर रहना चाहिए जो न कोई बुद्धिमानी या हँसी-मजाक की बात कर सकते हैं और न दुःख के क्षण में सहानुभूति दिखला सकते हैं। मनुष्य को बुरी संगति करने से बचना चाहिए। नीति और सवृत्ति दोनों का नाश होने में देर नहीं लगती और व्यक्ति दिनोंदिन अवनति के गड्ढे में गिरता जाता है। उसका आध्यात्मिक विकास रूक जाता है। बुरे लोगों की संगति थोड़े समय में अपना प्रभाव डाल देती है और हमारे जीवन की पवित्रता नष्ट कर देती है। अतः अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातें करने वालों से दूर रहना चाहिए। मित्रता अधिक गम्भीर तथा स्थायी होती है।